देवरिया। आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र की जरूरत इस समय हर किसी को पड़ती है। 30 रुपये में ऑनलाइन आवेदन कर रिपोर्ट लगवाने का नियम है। पर हकीकत यह है कि रिपोर्ट लगवाने के लिए लोगों के पसीने छूट जा रहे हैं। अगर चढ़ावा नहीं दिया तो सात दिन के भीतर जारी होने वाला यह प्रमाणपत्र जल्दी नहीं मिलेगा। कमियां निकालने के बाद प्रमाणपत्र लंबित रह जाएगा और तहसील का चक्कर लगाते लगाते थक जाना होगा।
जिले के सभी तहसील में कार्यरत लेखपालों के पास आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र उनके पोर्टल में काफी दिनों से पड़े हुए हैं। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद राजस्व कर्मियों की रिपोर्ट लेट-लतीफ आ रही है। इनके ईद-गिर्द ऐसे लोग मंडरा रहे हैं, जो आवेदकों से भेंट चढ़वाने के बाद रिपोर्ट लगवा दे रहे हैं। तहसील से जुड़े लोगों की बातों पर गौर किया जाए तो रिपोर्ट लगाने में ढिलाई के कारण कई बार कोई न कोई दिखाकर आवेदन लौटा दिए जा रहे हैं। जिले में आय, जाति और निवास के करीब 11431 आवेदन लंबित हैं।
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दो सौ रुपये दीजिए हफ्ते भर के भीतर पाइए प्रमाणपत्र
देवरिया। सदर तहसील के लोकवाणी केंद्र पर दो-तीन लोग ऐसे मौजूद रहते हैं, जो आवेदन करने के लिए आने वालों पर नजर रखते हैं। सोमवार को मौजूद आमोद तिवारी ने बताया कि सौ से दो सौ रुपये लिया जाता है। इसमें आवेदन से लेकर रिपोर्ट लगवाने तक की जिम्मेदारी होती है। आवेदक केवल फोन से बता दे तो हम लोग काम करा देते हैं। अगर लेखपाल के पास पहल न की जाए तो प्रमाणपत्र लंबित ही रह जाएगा।
तहसीलवार लंबित प्रार्थना पत्र
- देवरिया सदर- 3203
- सलेमपुर- 2105
- बरहज - 2020
- भाटपाररानी - 1903
- रुद्रपुर - 2200
प्रमाण पत्र न बनाने के कई बहाने
- जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने के बाद आवेदक के प्रमाणपत्रों की जांच की जाती है। राजस्व कर्मी संबंधित आवेदक के पास पहुंचकर रिपोर्ट तैयार करते हैं। इसमें राज्य, जिला, किरायदारी सहित अन्य कारणों का हवाला देकर लेखपाल रिपोर्ट नहीं लगाते हैं। इसके बाद जब चढ़ावा चढ़ता है तो वह रिपोर्ट लगाते हैं। यहां तक कि सभी तहसीलों में हर माह 10 से 15 प्रतिशत प्रमाणपत्र अस्वीकृत हो जाते हैं।
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यह फंसता है पेंच
- किराए के कमरे में रहने वाले लोगों के प्रमाणपत्र जैसे आधार आदि के संशोधन के लिए कहते हैं। नाम और पता आंशिक बदलाव व गड़बड़ी को आधार बनाकर आवेदन निरस्त कर दिया जाता है। लेखपाल की जगह उनके मुंशी आदि से बात करने के बाद ही रिपोर्ट लग पाती है। अनुचित मांग पूरा न होने पर आवेदन निरस्त कर दिया जाता है। इससे लोगों को दोबारा आवेदन करना पड़ता है। लेखपाल बाहर होने व किसी कार्य में व्यस्त होने का हवाला देकर टाल देते हैं।
केस-1
- धरमेर गांव निवासी कलावती देवी की बेटी की शादी 20 मई को है। उसने पेंशन और शादी अनुदान के लिए आय प्रमाण जारी कराने के लिए आवेदन किया था। करीब 20 दिन बीत जाने के बाद भी प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ तो उसने एक व्यक्ति के जरिये प्रमाणपत्र बनवाया।
केस-2
- पायल कुशवाहा ने 15 अप्रैल को आय प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था, लेकिन अभी तक उसका प्रमाणपत्र जारी नहीं हो सका है। लेखपाल के पास फोन करने पर वह व्यस्त होने का बहाना बना रहे हैं। उसे प्रवेश फार्म के आवेदन में लगाना है।
ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। पूरी प्रक्रिया पूरा करने के बाद प्रमाणपत्र जारी होता है। अगर सात दिन के भीतर अकारण कोई प्रमाणपत्र लंबित रखता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-गौरव श्रीवास्तव, एडीएम प्रशासन