नोट : खबर में दो घटनाओं का बाक्स भेज रहा हूं।
फोटो समाचार...........
पुल में कई जगह बने गड्ढे तो पुल के एप्रोच की दीवार में पड़ीं दरारें
पुल से उतरते ही यातायात विभाग ने बना दिया है डिवाइडर
हर समय डिवाइडर से टकरा कर चोटिल होने का बना रहता है डर
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। देवरिया-गोरखपुर मुख्य मार्ग पर कुर्ना नाला पर बने ओवरब्रिज को बने लगभग तीन दशक पूरे हो चुके हैं। पुल में कहीं-कहीं गड्ढे बन गए हैं। एक तरफ एप्रोच में दरार पड़ गई है। पुल के एक तरफ किनारे में पेड़-पौधे उग गए हैं। वहां की मिट्टी तक हट गई है। इससे हर समय हादसे का भय बना रहता है। वाहनों के गुजरते समय कंपन से राहगीर कांप उठते हैं। बावजूद इसके जनप्रतिनिधि और अफसर बेपरवाह हैं।
उत्तर-पश्चिम सीमा से कुर्ना नाला गुजरा है। इसके आसपास हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के लोगों का पूजा स्थल है। कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थान हैं। इसके बिल्कुल करीब शहीद बाबा का मजार और उसके सामने कुर्ना नाले के तट पर देइया माई के अलावा सोमनाथ, रामजानकी मंदिर और महुआबारी में चर्च है। साईं मंदिर, देवरही मंदिर, गायत्री मंदिर के अलावा सिंधी मिल कॉलोनी में गुरुद्वारा है। हालत यह है कि पुल से कोई वाहन गुजरता है तो कंपन दूर तक महसूस की जाती है।
मालूम हो कि चिरैया ढाला रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रैफिक दबाव बढ़ने के बाद वर्ष 1992 में फ्लाईओवर बनाया गया। यह देवरिया से गोरखपुर समेत अन्य इलाकों में आने-जाने के लिए एकमात्र रास्ता है। बीआरडीपीजी कॉलेज के अलावा कई अन्य शैक्षणिक संस्थान हैं। यह सड़क अति व्यस्त है। सुबह से शाम तक इस पुल पर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही लगी रहती है। यूं कहें तो गोरखपुर से आने के लिए देवरिया वासियों के लिए यह मात्र इकलौता पुल है। पुल जिस समय आवागमन के लिए बना था, उस समय पुल पर आने व जाने वालों वाहनों की संख्या कमतर थी। इन दिनों पुल पर हजारों गाड़ियां आती व जाती हैं। लेकिन पुल की मरम्मत का ख्याल किसी को नहीं है। गोरखपुर से आते समय जब ओवरब्रिज पर चढ़ते हैं तो पुल के सटे किनारे पेड़-पौधे उग गए हैं। वहां की मिट्टी हट गई है। पुल में जगह-जगह दरारें भी दिख रही हैं। साथ ही पुल पर चढ़ते समय सुरक्षा का ख्याल न रखा जाए जो हादसा हो जाएगा।
पुलिस ने एप्रोच के किनारे बना दिया डिवाइडर
अगर आप गोरखपुर की तरफ से आ रहे हैं तो पुरवा ढाला से चढ़ते समय तो आपको ख्याल रखना ही पड़ेगा। उससे ज्यादा आपको उतरते समय ख्याल रखना होगा। क्योंकि अगर आपकी आंखें इधर-उधर हुई तो आप उतरते समय डिवाइडर से टकरा कर सामने आ रहे वाहन से भिड़ जाएंगे। पुलिस ने देवरिया की तरफ से चढ़ते समय पुल के एकदम समीप से डिवाइडर बना दिया है। अगर उतरते समय कोई वाहन चालक ध्यान न दे तो दुर्घटना निश्चित है।
कोट
सेतु निगम पुल का निर्माण कराकर उसे पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर कर दिया जाता है। पुल के मेटनेंस से लेकर अन्य की जवाबदेही पीडब्ल्यूडी की है।
-आरपी गौंड, अपर परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम
कोट
ओवरब्रिज पर रेलवे लाइन के ऊपरी हिस्सों में टूटा-फूटा है। एप्रोच में दरार जैसा कुछ नहीं है। साइडवाल में हल्की दरारें हो सकती हैं। उसे दिखवाता हूं। पुल पर कंपन की बात है तो आप किसी पुल से गुजरें और वह आजाज न करे तो वह खतरे की घंटी होगी। ये सभी समस्याएं रूटीन मेंटेनेंस की है। चुनाव बाद पुल का रूटीन मेंटेनेंस कराकर उक्त समस्याएं दूर करा ली जाएंगी।
-मनोज पांडेय, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
आठ साल से दूसरा ओवरब्रिज बनाने की राह में आ रही बाधा
वर्तमान ओवरब्रिज के दोनों तरफ भूमि का पेच फंसा
देवरिया। फोरलेन पर वाहनों की रफ्तार भले ही बढ़ गई है, लेकिन वाहनों की रफ्तार शहर में प्रवेश करते हुए थम जा रही है। गोरखपुर रोड पर सिंगल ओवरब्रिज होने से जाम की समस्या विकराल हो गई है। दूसरे ओवरब्रिज निर्माण को लेकर न तो सेतु निगम गंभीर है और न ही लोक निर्माण विभाग।
गोरखपुर रोड पर दूसरा ओवरब्रिज बनाने की राह में आठ साल से बाधा आ रही है। वर्तमान ओवरब्रिज के दोनों तरफ भूमि का पेंच फंसा है। एक तरफ शहरी कांशीराम आवास तो दूसरी तरफ धार्मिक स्थल होने से अधिकारी एस्टीमेट तैयार करने से कतरा रहे हैं। वे पचड़े से दूर भाग रहे हैं। इसके कारण दूसरे ओवरब्रिज निर्माण के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। यही कारण है कि अधिकारियों ने दूसरे ओवरब्रिज निर्माण को हाशिए पर रखा है। दूसरे ओवरब्रिज निर्माण से जाम की समस्या काफी हद तक दूर जाएगी। शहर से आना व जाना आसान होगा। हादसों में भी कमी आएगी।