इस क्रम में पता चला कि आरोपी शिक्षक के स्नातक अनुक्रमांक 166496 वर्ष 1985 एवं बीएड अनुक्रमांक 6388 वर्ष 1990 के संबंध में संबंधित संस्था दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने अवगत कराया है कि विश्वविद्यालय अभिलेखों के अनुसार यह अनुक्रमांक बीए एवं बीएड कक्षा के लिए किसी छात्र या छात्रा को आवंटित नहीं किए गए हैं।
ऐसे में प्रथम दृष्टया यह सिद्ध हो गया कि संबंधित ने फर्जी एवं कूटरचित स्नातक व बीएड का अंकपत्र व प्रमाण पत्र के आधार पर षडयंत्र कर नौकरी हासिल करने में कामयाबी पाई है। सात जनवरी वर्ष 2023 को इस आधार पर शिक्षक को निलंबित कर दिया गया और स्पष्टीकरण जारी किया गया। प्रकरण की जांच के लिए बीईओ भलुअनी सूरज कुमार को नियुक्त किया गया।
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बीईओ ने उक्त शिक्षक को आरोप पत्र भी उपलब्ध करा दिया। इस पर आरोपी शिक्षक ने पुन: सत्यापन कराने की मांग की। दोबारा हुए सत्यापन में भी उनके प्रमाण पत्र फर्जी मिले हैं। शिक्षक को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय दिया गया हालांकि आरोपों के संबंध में वह कार्यालय को साक्ष्यमय स्पष्टीकरण नहीं उपलब्ध करा सके।
बीएसए ने बताया कि गोरखपुर विश्वविद्यालय से मिले आख्या के आधार पर एवं फर्जीवाड़े की पूर्णतया पुष्टि होने के बाद एवं विभागीय प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद प्रधानाध्यापक जयप्रकाश तिवारी को प्रथम नियुक्ति तिथि से ही सेवा से बर्खास्त किया जाता है। साथ ही खंड शिक्षाधिकारी भागलपुर को उनके खिलाफ केस दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।