दो माह बाद भी एक प्रशिक्षक का इंतजाम नहीं कर पाए जिम्मेदार
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। रवींद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम स्थित क्रिकेट छात्रावास के खिलाड़ी बिना प्रशिक्षक के ही अभ्यास करने को मजबूर हैं। दो माह से वह प्रशिक्षक की राह देख रहे हैं। इधर नए सत्र के शुरू में ही स्टेडियम के क्रिकेट शिविर के प्रशिक्षक जो छात्रावास के प्रशिक्षुओं को भी प्रशिक्षण दे रहे थे, चार दिन पहले उनके भी निलंबन के बाद से स्टेडियम के यह खेल अब अनाथ सा प्रतीत होने लगा है। समस्या को जानते हुए भी जिम्मेदारों की ओर से इस संबंध में कोई पहल नहीं की जा रही है।
स्टेडियम में क्रिकेट सीखने और सिखाने वालों के दिन आजकल अच्छे नहीं चल रहे हैं। यहां 22 गज की पिच और सीमेंटेड व टर्फ विकेट विवादों का अखाड़ा बन रहे हैं। नौ फरवरी को क्रिकेट छात्रावास के प्रशिक्षक रहे अब्दुल अहद को एक प्रशिक्षु से मालिश कराने का वीडियो वायरल होने के बाद से ही यहां से निलंबित कर रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम लखनऊ में अटैच कर दिया गया।
उनके जाने के बाद स्टेडियम में खेल शिविर के प्रशिक्षक पवन कुमार को छात्रावास के प्रशिक्षुओं को भी प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी दी गई थी। इधर बीते 24 अप्रैल को यहां का क्रिकेट प्रशिक्षण शिविर को भी स्थगित कर दिया गया। इससे प्रशिक्षक के नहीं आने से यहां प्रशिक्षण भी बंद हो गया है और छात्रावास के खिलाड़ी भी अब बिना गुरु के ही सीखने को विवश है। इससे उनकी प्रैक्टिस बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
प्रशिक्षक ही खिलाड़ी के प्लस और माइनस प्वाइंट पर रखता है नजर
वर्तमान में देवरिया क्रिकेट एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष व पूर्व खिलाड़ी नागेंद्र त्रिपाठी बताते हैं कि खेल में प्रशिक्षक ही खिलाड़ी के प्लस और माइनस प्वाइंट पर निरंतर नजर रखता है। गलती होने पर उसे डांटता तो अच्छा प्रदर्शन करने पर प्रोत्साहित भी करता है। साथ ही खेल में आगे कैसे बढ़े और क्या-क्या और कहां स्कोप है, इसकी जानकारी देता है। प्रशिक्षक का न होना खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा नुकसान है।
-
क्रिकेट छात्रावास के खिलाड़ियों को स्टेडियम के अन्य खेलों के प्रशिक्षक ही फिटनेस से जुड़ी गतिविधियां कराते हैं। छात्रावास व स्टेडियम के शिविर के लिए प्रशिक्षक की तैनाती हो, इसके लिए खेल निदेशालय को सूचित कर दिया गया है। खिलाड़ियों का नुकसान न हो, इसके लिए जल्द ही व्यवस्था बन जाएगी।
-राज नारायण प्रसाद, क्रीड़ाधिकारी