लकड़ी की बेंच पर शवों का पोस्टमार्टम
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में बने नए हाउस में लकड़ी की बेंच पर शव रखकर पोस्टमार्टम करने का मामला सामने आया है। माना जा रहा है कि इससे पोस्टमार्टम के समय बेंच में कंपन हो सकता है। इसका असर रिपोर्ट पर भी पड़ सकता है। इस में एक शिकायतकर्ता ने अधिवक्ता के जरिए सीएमओ को नोटिस भेजा है।
मेडिकल कॉलेज में बने जिस कमरे में शवों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है, उसमें स्थायी चबूतरा ही नहीं बना है। इस कारण लकड़ी की बेंच पर शवों को रखकर पोस्टमार्टम किया जा रहा है। जानकार बताते हैं कि लकड़ी के बेंच पर पोस्टमार्टम करना ठीक नहीं। इससे शव के कठोर जगहों पर वार करते समय बेंच हिल सकती है। इतना ही नहीं, कमजोर लकड़ी होने के चलते टूटने का भी भय रहता है। इस सबका असर रिपोर्ट पर भी पड़ सकता है।
इस लापरवाही के कारण रिपोर्ट पर असर पड़ने की आशंका जताते हुए समाजसेवी संजय पाठक ने सिविल कोर्ट के अधिवक्ता रणजीत पाल सिंह के माध्यम से सीआरपीसी की धारा 80 के तहत मुख्य चिकित्साधिकारी को नोटिस भेजा है। सीएमओ को नोटिस के जरिए बताया गया है कि लकड़ी के बेंच पर शवों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है, जिससे रिपोर्ट पर असर पड़ सकता है। चोट का सही आंकलन करने में दिक्कत हो सकती है।
अधिवक्ता वीरेंद्र साहनी ने बताया कि पोस्टमार्टम बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसके जरिए साक्ष्य मिलता है और दोषी को सजा होती है। लकड़ी के बेंच पर पोस्टमार्टम कराने से रिपोर्ट पर असर पड़ सकता है। झटके से पोस्टमार्टम इंजरी भी होती है।
पोस्टमार्टम हाउस में शासन स्तर से टेबल आनी है। अभी अस्थाई व्यवस्था है। अगर टेबल में कील नहीं निकली है तो रिपोर्ट पर कोई नहीं पड़ना चाहिए। पोस्टमार्टम के लिए व्यवस्था सीएमओ कार्यालय से की जाती है।
डॉ. राजेश कुमार बरनवाल, फोरेंसिक विभाग
अभी अस्थाई व्यवस्था की गई है, क्योंकि पुराने पोस्टमार्टम हाउस में पानी लग जाता था। बहुत जल्द व्यवस्था को ठीक कर दिया जाएगा। मेरे ख्याल से रिपोर्ट पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
- डॉ. राजेश झा, सीएमओ