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Deoria News: प्रदूषण ने बदल दिया मौसम का तेवर, समय से आगे पीछे हो गए बारिश और ठंड

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शहर में गाडियो के निकलने वाले धुआं से भी बढ रहा प्रदुषण।संवाद
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-विशेषज्ञों का दावा है कि प्रदूषण के चलते मौसम का चक्र भी बदलता जा रहा
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-बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डीजल, पेट्रोल की खपत बढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। वायुमंडल में बढ़ रहे प्रदूषण ने मौसम के मिजाज को ही बदल कर रख दिया है। वाहनों से निकलने वाले जहरीले धुएं, ब्लैक कार्बन और निर्माण कार्यों के चलते उड़ रही धूल और गुबार जहां लोगों को बीमार बना रहे हैं, वहीं विशेषज्ञों का दावा है कि प्रदूषण के चलते मौसम का चक्र भी बदलता जा रहा है।
आलम यह है कि अक्तूबर व नवंबर में कुछ वर्षों से धरती तप रही है, जबकि यह मौसम ठंड की शुरुआत होता है। सर्द मौसम अब दिसंबर के मध्य तक जा पहुंचा है, और इसकी अवधि भी कम होना देखने में आ रहा है। बीआरडी पीजी कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. हरिशंकर गोविंद राव कहते हैं कि बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डीजल, पेट्रोल की खपत बढ़ी है। इससे निकलने वाले धुएं में कार्बन का कण होता है। ऊपर से सूरज की किरण से कार्बन के कण अवशोषित करने से तापमान बढ़ रहा है। विकास कार्यों के तहत निर्माण कार्य बढ़े हैं। बढ़ते वाहनों की संख्या से हरियाली कम हुई है। इसका असर प्राकृतिक चक्र पर पड़ा है। इसके चलते बारिश और सर्दी के दिनों की अवधि कम हो गई है।
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विकास की भेंट चढ़ गए हजारों पेड़
देवरिया व आसपास के क्षेत्रों में कुछ वर्षों में फोरलेन का निर्माण कार्य हुआ है। कुछ सड़कों को वन लेन से टू लेन किया जा रहा है। इससे करीब 10 हजार पेड़ काट दिए गए हैं। इसका सीधा असर भी पर्यावरण पर पड़ा है। गोरखपुर से देवरिया, सलेमपुर से बलिया तक जाने वाला फोर लेन अभी निर्माणाधीन है। इस मार्ग पर अब तक हजारों पेड़ काटे गए हैं। डीएफओ जगदीश आर ने बुधवार को बताया कि जिले में वन विभाग सहित सभी विभागों ने पिछले पांच सालों में दो करोड़ से अधिक पौधे लगाए हैं। फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 के सापेक्ष जिले में जंगल कवर के रूप में क्षेत्रफल भी बढ़ा है।


स्पीकअप
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हरियाली कम होने से बढ़ रहा है प्रदूषण
मानव जीवन के लिए पेड़-पौधों का योगदान सबसे अहम है। विकास एवं निर्माण कार्यों के चलते इनकी कटाई की जा रही है, जबकि ऑक्सीजन हमें इन्हीं से मिलता है। कार्बन डाई ऑक्साइड यह अवशोषित कर लेते हैं। इसके नियंत्रण अनुपात को संतुलित रखने में यह बड़ी भूमिका निभाते हैं। हरियाली कम होने से प्रदूषण में लगातार वृद्धि हो रही है, इससे सभी को सचेत होने की आवश्यकता है।
-प्रो. हरिशंकर गाेविंद राव, विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान, बीआरडी पीजी कॉलेज


मौसम में बदलाव का बड़ा कारण ग्लोबल वाॅर्मिंग है। इसी से कभी अचानक बारिश, कभी तेज धूप हो रहा है। मई-जून में तापमान भी इसी से बढ़ रहा है। इस समय ठंड होनी चाहिए, लेकिन दिन में मौसम अभी भी गर्म है। पौधे जब खत्म होंगे या किए जाएंगें तो यह समस्या स्वाभाविक रूप से आएगी।

-डॉ. अमरनाथ एसोे. प्रो. रसायन विज्ञान, बीआरडी पीजी कॉलेज
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पेड़-पौधों की लगातार कमी से स्थानीय मौसम बदल रहा है। ग्लोबल वाॅर्मिंग और स्थानीय कारणों का इस पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। यह वायु की गति, दिशा, वर्षा, नमी आदि को प्रभावित करता है। स्थानीय हरित क्षेत्र, ताल-तलैये, वन आदि भी मौसम में अपना व्यापक योगदान देते हैं। वर्तमान में घटती आद्रर्ता और तापमान के कारण धूल व प्रदूषण के कणों की एक परत क्षेत्र के ऊपर जमा जाती है, इससे तापमान में घटता और बढ़ता रहता है।
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-शमशाद मलिक, पर्यावरण प्रहरी

प्रदूषण के चलते नाक, कान, गले में एलर्जी के मरीज बढ़े हैं। आंख के पास खुजली, नाक से छींक आदि की समस्याएं देखने में आ रही हैं। ध्वनि प्रदूषण से कान संबंधी बीमारियां भी अधिक उत्पन्न हुई हैं। जिन इलाकों में या मुख्य मार्गों पर प्रदूषण की मात्रा ज्यादा है, ऐसे में वहां मॉस्क पहनकर ही जाएं। बीमारी की चपेट में आने से संबंधित चिकित्सक से ही दिखाएं।
-डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता, ईएनटी, मेडिकल कॉलेज

साल दर साल ऐसे बढ़ते गए वाहन
वर्ष वाहनों की संख्या
2018 46785
2019 49460
2020 552981
2021 61612
2022 55196
2023 59445
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