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Deoria News: उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और वृद्धि योग में पितृपक्ष आज से

Fri, 29 Sep 2023 01:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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देवरिया। पितृपक्ष का प्रारंभ 29 सितंबर दिन शुक्रवार से शुभ दिन और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र तथा वृद्धि नामक योग में हो रहा है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दिन चंद्रमा की स्थिति शुभ ग्रह बृहस्पति के राशि मीन पर है। इसलिए यह पितरों की पूर्ण तृप्त करने वाला और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ रहेगा। पक्ष का समापन 14 अक्तूबर दिन शनिवार को होगा। इस तिथि को सौम्य नश्रत्र हस्त और चंद्रमा की स्थिति कन्या राशिगत होने से उत्तम है।
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इस बार पूर्णिमा श्राद्ध 29 सितंबर, 30 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध, लेकिन द्वितीया और तृतीया का श्राद्ध एक ही दिन पहली अक्तूबर को होगा। इसका कारण यह है कि कुतप बेला द्वितीया और तृतीया तिथि का ( मध्याह्न के समय दोनों तिथियों का काल होने से) मध्याह्न में ही दोनों पुण्य तिथियों का श्राद्ध इसी दिन होगा। चतुर्थी तिथि का श्राद्ध दो अक्तूबर को संपन्न किया जाएगा। पुनः मातृ नवमी का श्राद्ध सात अक्तूबर दिन शनिवार को होगा। सर्व पितृ विसर्जन की अमावस्या 14 अक्तूबर को है। ज्योतिषाचार्य पं. शरद चंद मिश्र बताते हैं कि जिन लोगों को अपने पितरों की क्षयाह तिथि अवगत न हो, वे इस सर्व पितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध संपन्न कर सकते हैं, क्योंकि अमावस्या सभी पितरों के श्राद्ध का दिन माना गया है। अमावस्या के स्वामी पितृ गण ही हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पितृपक्ष का श्राद्ध शुभ दिन शुक्रवार या से प्रारंभ होकर 14 अक्तूबर दिन शनिवार तक रहेगा। वैसे तो आश्विन कृष्ण पक्ष 30 सितंबर से 14 अक्तूबर तक है। लेकिन श्राद्ध का कार्य एक दिन भाद्रपद पूर्णिमा से ही शुरू हो जाता है। इसलिए महालयारंभ (पितृपक्ष का श्राद्ध) 29 सितंबर से ही माना जाएगा। इन दिनों पितरों को जल दिया जाता है तथा उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध किया जाता है। पितृपक्ष में पिता की मृत्यु तिथि के दिन सर्वसुलभ जल, तिल, जौ, कुश,अक्षत, दुध, पुष्प आदि से उनका श्राद्ध संपन्न किया जाता है।

इन तिथियों में होगा श्राद्ध का कर्मकांड
29 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध, 30 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध, एक अक्तूबर को द्वितीया और तृतीया दोनों श्राद्ध, दो अक्तूबर चतुर्थी श्राद्ध, तीन अक्तूबर को पंचमी श्राद्ध, चार अक्तूबर को षष्ठी श्राद्ध, पांच अक्तूबर को सप्तमी श्राद्ध, छह अक्तूबर को अष्टमी श्राद्ध, सात अक्तूबर को नवमी श्राद्ध, आठ अक्तूबर को दशमी श्राद्ध, नौ अक्तूबर को कोई श्राद्ध नहीं किया जाएगा। 10 अक्तूबर एकादशी श्राद्ध, 11 अक्तूबर को द्वादशी श्राद्ध, 12 अक्तूबर को त्रयोदशी श्राद्ध, 13 अक्तूबर चतुर्दशी श्राद्ध, 14 अक्तूबर को सर्व पैत्री अमावस्या श्राद्ध होगा। इसी दिन पितृविसर्जन भी होगा। 15 अक्तूबर को प्रातः काल दौहित्रकृत मातामह श्राद्ध ( नानाजी के लिए) किया जाएगा।
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स्पीकअप
पितरों के श्राद्ध से परिवार में सुख समृद्धि एवं पुत्र-पौत्र आदि एवं धनधान्य में वृद्धि होती है। जिस परिवार में पितृपक्ष में पारवन श्राद्ध एवं जल तर्पण किया जाता है, उस कुल के पितर अपने कुल को आशीर्वाद देते हैं। पुत्र का धर्म है कि अपने पितरों का सविधि श्राद्ध एवं जल, तिल, जौ, चावल सहित तर्पण करें।
- डॉ.श्रीप्रकाश मिश्र, भागवताचार्य

पितृ पक्ष में ब्राह्मण को आदर व सम्मान से घर बुलाएं और भोजन कराएं। ब्राह्मणों को भोजन के कराने के बाद गाय, कुत्ते व कौवे को भोजन दें। श्राद्ध का शुभारंभ दोपहर के समय किया जाना शास्त्रों में सही बताया गया है। ब्राह्मणों के सहयोग से मंत्रोच्चार के साथ श्राद्ध शुरू करें, उसके बाद जल से तर्पण करें।
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- पं.विवेक उपाध्याय, ज्योतिषाचार्य
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