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Deoria News: मेडिकल कॉलेज में फिजियोथेरेपी की सुविधा नहीं, परेशान हो रहे मरीज

Thu, 08 Feb 2024 02:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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- फोटो
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प्राइवेट में कराना पड़ता है इलाज, अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में फिजियोथेरेपी की सुविधा न होने से जोड़ों के दर्द व नस से संबंधित मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ठंड के मौसम में ऐसे मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है।
लकवा, प्लास्टर व ऑपरेशन के बाद मरीजों को दिक्कत होने वाली दिक्कत से राहत के लिए सुविधा नहीं मिल पा रही है। हर रोज करीब 50 से अधिक मरीजों को निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है। इससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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ठंड के मौसम में नस तथा जोड़ों के दर्द के मरीजों की दिक्कत बढ़ जाती है। जबकि लकवा की चपेट में लोग आते हैं। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग में इन दिनों प्रतिदिन करीब तीन सौ मरीजों का इलाज होता है। इसमें हड्डी टूटने के अलावा कमर, घुटन, एड़ी, गर्दन दर्द, सर्वाइकल से पीड़ित मरीजों की संख्या अधिक होती है।
मेडिसिन विभाग में भी जोड़ों के दर्द तथा लकवा के मरीज आते हैं। अभी रविवार को चार, सोमवार को छह तथा मंगलवार की रात तीन मरीज इमरजेंसी में आए थे। इन मरीजों को दवा के साथ फिजियोथेरेपी की भी जरूरत होती है। डॉक्टर कुछ व्यायाम बताते हैं और फिजियोथेरेपी की भी सलाह देते हैं। लेकिन, अस्पताल में यह सुविधा अब तक नहीं हो सकी है। इससे मरीजों को मजबूरी में निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है।
डॉक्टरों को कहना है कि फिजियोथेरेपी पोस्ट ट्राॅमा में रिहैबिलिटेशन में सहयोगी होता है। जोड़ों के दर्द, गठिया, सर्वाइकल आदि बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए जरूरी होता है।
कोट
- फिजियोथेरेपी के निजी सेंटरों पर मरीजों को प्रतिदिन आधे से एक घंटे के लिए 400-500 रुपये शुल्क देना पड़ता है। अधिकांश मरीजों को कम से कम 10 से 15 दिन फिजियोथेरेपी करानी पड़ती है। इसके बाद राहत मिलने पर उनहें घर पर ही व्यायाम करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में एक मरीज को कम से कम चार से पांच सौ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जबकि घर जाकर विजिट करने के लिए और अधिक चार्ज किया जाता है।

इन मरीजों को होती है जरूरत
देवरिया। फिजियोथेरेपी की जरूरत हड्डी टूटने पर प्लास्टर कटने तथा ऑपरेशन के बाद जोड़ खोलने के लिए पड़ती है। इसके अलावा कमर, घुटना, एड़ी, गर्दन दर्द, सर्वाइकल, लकवा, चेहरे के लकवा के मरीजों, खांसी, सर्दी के ज्यादा समय होने पर चेस्ट तथा हाथ की मांसपेशियों को मजबूत करने आदि मरीजों को जरूरत होती है।
लंबे समय से शुगर के मरीजों को न्यूरोपैथिक दर्द होता है। इन मरीजों की भी फिजियोथेरेपी होती है। मंदबुद्धि बच्चों में विकलांगता आ जाती है। उनके लिए भी जरूरत होती है।

- लकवा से ग्रसित हो गया था। गोरखपुर स्थित एक अस्पताल में दिखाया। डॉक्टर ने फिजियोथेरेपी कराने की सलाह दी। यहां मेडिकल कॉलेज में कराने के लिए पता किया तो यह सुविधा नहीं है। इसके बाद शहर के राघवनगर स्थित एक सेंटर पर करा रहा हूं। इससे आर्थिक बोझ पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में इसकी व्यवस्था होने से सस्ते में हो जाता।
-धनंजय विश्वकर्मा, साेनूघाट

दुर्घटना में घायल होने के बाद हाथ फ्रैक्चर हो गया था। प्लास्टर हुआ था। फिर ऑपरेशन हुआ था। घाव ठीक होने के बाद परेशानी हो रही थी। डॉक्टर ने फिजियोथेरेपी कराने को कहा। पर यहां मेडिकल कॉलेज में सुविधा न होने से मजबूरी में निजी फिजियोथेरेपी सेंटर का सहारा लेना पड़ा। इसके लिए काफी पैसा खर्च करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में होने से काफी राहत रहती।
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- वीरेंद्र प्रताप सिंह, पचौहा
कोट
अस्पताल में फिजियोथेरेपी विभाग के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। फिजियोथेरेपिस्ट आउट सोर्सिंग कंपनी से आने हैं। इसके लिए मांग की गई है। रिमाइंडर भी भेजा गया है। आने वाले समय में यह सुविधा मरीजों को मिलने लगेगी।
-डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस
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