लार थाना क्षेत्र के तारा कुंडावल में मिला घड़ा
लार थाना क्षेत्र के तारा कुंडावल के पूरब पंचरुखिया स्थित खेत में जमीन के नीचे मिला, ढक्कन है गायब
संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। लार थाना क्षेत्र के तारा कुंडावल के पूरब पंचरुखिया स्थित खेत में जमीन के नीचे एक बड़ा मृद भांड (काला घड़ा) मिलने का दावा किया जा रहा है। जमीन से लगभग डेढ़ फीट नीचे गड़े घड़े का ढक्कन गायब है और खाली है। उसकी गहराई करीब तीन फीट से अधिक बताई जा रही है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि घड़े में पुराने जमाने के सिक्के भी रहे होंगे, जिसे किसी ने निकाल लिया है। इसे देखने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। गांव के लोगों ने इसकी सूचना लार पुलिस को दी, लेकिन पुलिस के व्यस्त रहने के कारण खुदाई नहीं हुई और घड़ा जमीन में पड़ा है।
ग्रामीणों के अनुसार जिस जगह पर जमीन के नीचे घड़ा मिला है, कालांतर में वहां कोई पुरानी बस्ती थी। अब वह जगह डीह पड़ गई है। राजस्व अभिलेखों में गैर आबाद गांव पंचरुखिया के रूप में आज भी इसकी पहचान है। कालांतर में जो डीह पड़ी जमीन थी, उसे लोग जोतने बोने लगे। जिस जगह जमीन के अंदर घड़ा मिला, वह जमीन गांव के रमेश तिवारी के परिवार में जोती बोई जाती है। रबी के सीजन में इस खेत में गेहूं की फसल बोई गई थी। घड़ा इतना नीचे था कि जोतने बोने के दौरान कभी पता नहीं चला। अचानक आज कुछ चरवाहों ने खेत में जमीन खोदी हुई देखी। घड़ा का ढक्कन नहीं था। घड़ा खाली था। ग्रामीणों के अनुसार रात में ही किसी ने मिट्टी खोदकर ढक्कन हटाया है, मिट्टी हाल की खोदी लग रही है। घड़ा इतना बड़ा है कि उसमे 200 लीटर पानी समा सकता है। घड़ा में क्या था, अभी यह रहस्य बना हुआ है। करीब साढ़े तीन फीट गहरा होने के कारण उसे घड़ा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। एसओ नवीन चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में ड्यूटी में था। मंगलवार को मौके पर जाकर देखा जाएगा।
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इंसेट-
300 वर्ष पूर्व इस स्थान पर बसा था पचरुखी गांव
जानकी ब्रह्म स्थान व नेटुआबीर बाबा का स्थान
सलेमपुर। लार के कुंडावल तारा गांव के लोगों का कहना है कि पूर्वज बताते थे कि लगभग 300 वर्ष पूर्व इस स्थान पर पचरुखी गांव बसता था। भूकंप आने की वजह से पचरुखी गांव जमींदोज हो गया था। उस वक्त के परिवारों में जानकी नाम के एक ब्राह्मण और एक नट की भी मृत्यु घर में दबकर हो गई थी। किवदंती है कि दोनों की बुरी आत्माएं आस-पास के गांव वालों को तंग करने लगीं। अनहोनी की आशंका से कुंडावल तारा के तिवारी परिवार के लोगों ने जानकी ब्रह्म और नेटुआबीर बाबा का स्थान बनाकर पूजा पाठ शुरू किया। तब से लोगों के यहां शांति हुई। अब भी पचरुखी में कोई आबादी नहीं है।