देवरिया। ठंड बढ़ने के साथ वायरस संक्रमण की चपेट में लोग आ रहे हैं। खांसी, बुखार, सर्दी, सांस लेने में परेशानी हो रही है। खांसी ठीक होने में दस दिन तक का समय लग जा रहा है। इसके बाद भी कुछ दिनों तक कमजोरी बनी रह रही है। इस तरह के मरीजों कमी संख्या बढ़ी है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना सांस और खांसी, बुखार के करीब 150 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। डॉक्टर दवा देने के साथ ही ठंड से बचने और सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। पारा गिरने से वातावरण में नमी है। इस मौसम में वायरस का ग्रोथ करते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ रही है। इसकी चपेट में आने से लोगों की सेहत बिगड़ रही है। कम प्रतिरोधक क्षमता के लोगों में संक्रमित होने की संभावना अधिक रहती है। आरएसबी वायरस के संक्रमण की वजह से लोग बुखार, सर्दी, खांसी, उल्टी से पीड़ित हो रहे हैं। वहीं सांस, अस्थमा के मरीजों की दिक्कत बढ़ रही है। ठंडी हवा के नाक और कान से होकर अंदर जाने पर पुराने मरीजों की परेशानी बढ़ जा रही है। नमी की वजह से एलर्जी के मरीजों को परेशानी हो रही है। आंख में खुजली, नाक से पानी और छींक से पीड़ित हो जा रहे हैं। इलाज में लापरवाही से निमोनिया से लोग पीड़ित हो जाते हैं। ठंड बढ़ने के साथ अस्पताल आने वाले मरीज बढ़ गए हैं। मंगलवार को चेस्ट व श्वांस विभाग की ओपीडी में इन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ गई है। करीब 200 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। वहीं मेडिसिन विभाग में भी वायरस संक्रमण के पीड़ित पचास से अधिक मरीज पहुंचे। डॉक्टर इस मौसम में सजग रहने की सलाह दे रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. विजय कुमार गुप्ता का कहना है कि ठंड के मौसम में सावधानी बरतने की जरूरत है। इस समय वायरस का संक्रमण होने से लोग चपेट में आ रहे हैं। बुखार, सर्दी, खांसी से पीड़ित हो रहे हैं। इस तरह के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसके अलावा ब्रानो कांस्ट्रेक्शन की समस्या आती है, जिससे सांस, अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। वहीं ठंड की वजह से कुछ लोगों में बेजो कांस्ट्रेक्शन की वजह से बीपी, पल्स बढ़ जाता है, जिससे हर्ट, स्ट्रोक की भी दिक्कत हो सकती है। ऐसे में सतर्क रहें। दिक्कत होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराएं।
लीड कॉन्वेंट स्कूल में क्रिसमस पर आयोजित कार्यक्रम में सजधज कर आए बच्चे। स्रोत : स्कूल
लीड कॉन्वेंट स्कूल में क्रिसमस पर आयोजित कार्यक्रम में सजधज कर आए बच्चे। स्रोत : स्कूल