संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर का मुख्य मार्ग हो या फिर जिले के अन्य मार्ग। आपको दर्जनों पेट्रोल पंप मिलेंगे, डीजल-पेट्रोल भी मिलेगा। अब सोचिए कि लगे हाथ अपने वाहन में हवा भी भरवा लिया जाए तो आप भूल ही जाएं। कारण, शहर के अधिकांश पेट्रोल पंप पर मशीनें तो लगाई गई हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए कर्मचारी ही नहीं हैं।
संचालक अब कर्मियों की छुट्टी करने लगे हैं, जिसकी वजह से बुनियादी सुविधाओं को बनाए रखने में मुश्किल हो रही है। पेट्रोल पंप पर ईधन (पेट्रोल-डीजल) भरवाने के अलावा भी कुछ सेवाएं वाहनों एवं वाहन चालकों के लिए उपलब्ध करवाई जाती हैं, जिन्हें रखना हर पेट्रोल पंप के लिए अनिवार्य है। इन सेवाओं के बदले ग्राहकों को पैसे देने की भी बाध्यता नहीं होती है।
हालात यह है कि पेट्रोल पंपों पर कहीं पेयजल नहीं है, तो हवा की मशीन खराब है। ग्राहकों को डीजल पेट्रोल की गुणवत्ता परखने वाले पेपर का भी अभाव मिला। जांच के दौरान अधिकतर पेट्रोल पंपों पर शौचालयों की हालत खस्ताहाल थी, तो कुछ में ताले लटके मिले।
जिले में इंडियन ऑयल के 92 पेट्रोल पंप, भारत पेट्रोलियम के 41 पेट्रोल पंप, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 34 पेट्रोल पंप नायरा के 9 और रिलायंस के दो पेट्रोल पंप हैं। शहर के अतिव्यस्त इलाके अन्य पेट्रोल पंप पर हवा भरने वाली मशीन जंग खा रही है या फिर उस पर धूल आदि जमा हुआ है। वहां हवा भरने के लिए कोई मौजूद नहीं है। वहीं शौचालय खस्ताहाल है। कही जर्जर शौचालय तो कही शौचालय में तला बंद। पेट्रोल पंपों पर पीने का पानी भी नहीं मिल पाता है।
रुद्रपुर मोड़ के नजदीक एक पेट्रोल पंप पर हवा, पानी और टायलेट की व्यवस्था थी लेकिन यहां महिला टायलेट में ताला बंद मिला। शहर में हाईडिल के नजदीक भारत पेट्रोलियम के मित्तल ऑटो फ्यूल पर सारी सुविधाएं व्यवस्थित मिलीं। यहां पर ग्राहकों को पीने का पानी, शौचालय और निःशुल्क हवा की व्यवस्था दुरूस्त मिली।
यहां के मैनेजर गंगा सागर यादव ने बताया कि हमारे पंप पर किसी प्रकार की शिकायत न हो, हम ग्राहकों की संतुष्टि का प्रयास करते हैं। यहां पेपर मौजूद है जिससे मिलावटी तेल का परीक्षण किया जा सकता है।