अब आधार व मोबाइल नंबर बताने पर मिलेगी पर्ची, होगा इलाज
डाटा की गुणवत्ता होगी सही, एनएमसी के मानक से होगा कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज अब ऑनलाइन की तरफ बढ़ रहा है। एनएमसी के मानक के मुताबिक अब मरीजों का ब्योरा फीड किया जाएगा। मरीजों को अब आधार कार्ड और मोबाइल नंबर के साथ आना होगा। तभी होगा उनका इलाज हो पाएगा। पर्ची तभी मिलेगी जब उनके पास आधार कार्ड और मोबाइल होगा।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की जा रही है। मरीजों के लिए आधार और मोबाइल नंबर अनिवार्य कर दिया गया है। अब तक रजिस्ट्रेशन में मरीज का नाम, उम्र और कोई भी मोबाइल नंबर लिख दिया जा रहा है। इससे मरीज का ऑनलाइन ब्योरा मिलने में दिक्कत होती थी। इसे लेकर एनएमसी सख्त हो गया है। इसके बाद रजिस्ट्रेशन काउंटर पर ड्यूटी करने वाले मल्टीपरपज वर्कर (एमपीडब्ल्यू) को एमएमसी के नियमों के मुताबिक मरीज का ब्योरा रजिस्ट्रेशन के समय भरने के निर्देश दिए गए। इसके बाद शनिवार से यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। अब मरीज के नाम, पता, पिता व पति के नाम के अलावा उम्र, इलाज कराने वाले विभाग का नाम, मोबाइल नंबर, आधार कार्ड नंबर दर्ज करना होगा। अब मरीज को आधार कार्ड और मोबाइल नंबर के साथ इलाज कराने आना होगा। अब बिना डिटेल के कोई दूसरा व्यक्ति रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकेगा।
मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीज को पर्ची काउंटर पर ब्योरा दर्ज कराने के बाद उसका उसका सेंट्रल रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। 15 दिन बाद पुन: दिखाने आने पर मरीज को पूरा ब्योरा नहीं देना होगा। उसे काउंटर पर केवल सीआर नंबर व रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बताना होगा। इसके बाद उसे तत्काल पर्ची उपलब्ध हो जाएगी। इससे समय की बचत होगी। वहीं, आने वाले समय में एमआरडी माड्यूल (मेडिकल रिकाॅर्ड डिपार्टमेंट) भी शुरू होगा। रजिस्ट्रेशन की नई व्यवस्था लागू होने के बाद रिकाॅर्ड में सहूलियत होगी।
लावारिस मरीज के आने पर होगी दिक्कत
मेडिकल कॉलेज में रजिस्ट्रेशन के लिए आधार व मोबाइल नंबर को अनिवार्य कर दिया गया है। जबकि इमरजेंसी में लावारिस हालत में दुर्घटना व अन्य बीमारी से पीड़ित को लोग पहुंचाते हैं। मरीज के होश में न होने और तीमारदार न रहने पर कौन आधार और मोबाइल नंबर देगा। ऐसे में उस मरीज का रजिस्ट्रेशन और इलाज कैसे होगा। यह समस्या हो सकती है।
मेडिकल कॉलेज में शुरू होगा एचएमआईएस माॅड्यूल
मेडिकल कॉलेज में एचएमआईएस माॅड्यूल (हाॅस्पिटल मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम) भी आने वाले दिनों में शुरू होगा। ओपीडी में डॉक्टर डेस्क की सुविधा उपलब्ध होगी। मरीजों के डायग्नोसिस से लेकर दवा सहित अन्य ब्योरा कंप्यूटर में दर्ज होगा। इसकी फाइल मरीज के पास भी होगी। इसके शुरू होने से डॉक्टर को इलाज करने और मरीज को भी सहूलियत होगी। ओपीडी के हर विभाग में कंप्यूटर और प्रिंटर लगाया जाएगा। कुछ जगह लगना शुरू हो गया है। डॉक्टर को आईडी, पासवर्ड दिया जाएगा। डॉक्टर यहां आने वाले मरीज का परीक्षण करने के बाद डायग्नोसिस, दवा और जांच की सलाह सब दर्ज किया जाएगा। उसका प्रिंट पर्ची के साथ मरीज को उपलब्ध कराया जाएगा। पैथाेलाॅजी भी एचएमआईएस से इंटीग्रेड कर दिया गया है। इससे ब्लड की जांच रिपोर्ट डॉक्टर के कंप्यूटर में सीधे पहुंच जाएगी। मरीज को इसके लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। मरीज का पूरा ब्योरा कंप्यूटर में सुरक्षित रहेगा। दूसरी बार मरीज के आने पर पर्ची का सीआर नंबर डालते ही सब कुछ डॉक्टर के सामने स्क्रीन पर आ जाएगा। अभी तक यह सब पेन से पर्ची पर लिखा जाता है और पैथाेलाॅजी रिपोर्ट मरीज को लाकर दिखानी पड़ती है।
पैथोलाजी रिपोर्ट की ऑनलाइन सुविधा
पैथाेलाॅजी रिपोर्ट की ऑनलाइन सुविधा है। इसे यूपीएचएमआईएस पोर्टल व ई-सुसूत्र यूपीडीएमएमई एप पर भी देखा जा सकता है। मोबाइल पर देखने के लिए मरीज को पर्ची का सीआर नंबर डालना होगा। इसके बाद रिपोर्ट दिख जाएगी।
मेडिकल कॉलेज में ऑनलाइन व्यवस्था को धीरे-धीरे शुरू किया जा रहा है। कंप्यूटर से रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं। इमरजेंसी से ओपीडी तक रजिस्ट्रेशन में आधार और मोबाइल नंबर को अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे का सेंट्रल रजिस्ट्रेशन हो सके। आभा एप पर भी रजिस्ट्रेशन की सुविधा है। इससे मरीजों का डाटा कलेक्ट करने में आसानी होगी। इमरजेंसी पर आने वाले लावारिस मरीज के इलाज में दिक्कत नहीं होगी। अज्ञात के नाम से रजिस्ट्रेशन होगा। उसके होश में आने व परिजनों के बताने पर ब्योरा दर्ज किया जाएगा। अस्पताल में पैथाेलाॅजी रिपोर्ट की ऑनलाइन सुविधा है। आने वाले समय में एचएमआईएस माॅड्यूल भी शुरू होगा। मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
-डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस