यूं तो पपीते की प्रजातियों की संख्या 20 से अधिक हैं लेकिन, स्थानीय वातावरण के लिहाज से दो प्रजातियां उपयुक्त मानी जा रही हैं। प्रगतिशील किसान जय सिंह ने बताया कि रेड लेडी ताइवान, रेड लेडी 786, सपना, पूसा नन्हा व पूसा डवार्फ की पैदावार यहां अच्छी हो रही है। इनसे प्रति पौधा 25 से 50 किलो फल प्राप्त हो रहा है। किसान प्रभास्कर नारायण त्रिपाठी का कहना है कि निजी नर्सरी पर पपीते के पौधे 30 रुपये तक बेचे जाते हैं। एक पौधा सालभर तक फल देता है।
ऐसे करें लाभ का आकलन
वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक सीताराम यादव ने बताया कि एक हेक्टेयर में तीन हजार पपीते के पौधे लगाए जाते हैं। पूरे साल मिलाकर प्रति पौधा औसत खर्च सौ रुपये आता है। एक हेक्टेयर पपीते की खेती में तीन लाख रुपये खर्च होंगे। एक पौधा 25 से 50 किलो फल देता है। 25 किलो प्रति पौधा फल और बाजार भाव 15 रुपये प्रति किलो के हिसाब से आकलन करें तो 11.25 लाख रुपये कुल आय होगी। इस पर तीन लाख रुपये खर्च होगा। ये आंकड़े संसाधनों की उपलब्धता और मौसम के लिहाज से घट-बढ़ सकते हैं।
पपीते की खेती पर उद्यान विभाग की ओर से अनुदान दिया जाता है। जिला उद्यान अधिकारी राम सिंह यादव ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत प्रति हेक्टेयर 23,120 रुपये अनुदान दिए जाते हैं। फरवरी-मार्च का महीना पपीते की पौध लगाने के लिए उपयुक्त होता है। इस समय जिले में करीब 70 से 100 हेक्टेयर में पपीते की खेती की जा रही है।
ये बरतें सावधानी
पपीते की खेती के लिए ऊंचे स्थान की जरूरत होती है। अगर पपीते के खेत में एक घंटे से अधिक समय तक बारिश का पानी रुक गया तो फसल बर्बाद हो जाएगी। इसके लिए जरूरी है खेत में पानी बिल्कुल भी न लगने पाए। -जय सिंह कुशवाहा, किसान, कैथवलिया, तरकुलवां।
एक पेड़ से दो हजार की आय
अभी एक एकड़ में पपीते की खेती की है। इसमें कम लागत लगाकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। एक पेड़ से कम से कम दो हजार रुपये की आय होती है। मैंने दो हेक्टेयर में पपीते की नर्सरी तैयार की है। -प्रभास्कर नारायण त्रिपाठी, किसान भौंसर, भाटपाररानी।