प्रदेश सरकार से धन मिलने में देरी से किसानों में नाराजगी है। निराश किसानों को फिलहाल उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आ रही है। वहीं प्रशासन ने जिले में एक अरब 59 करोड़ रुपये की मूल्य की धान की फसल बर्बाद होने की अनुमान लगाया है। प्रशासन ने नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेज दी है।कुदरत की मार से बेहाल किसानों को शासन-प्रशासन से राहत नहीं मिल रही है। जिला प्रशासन के मुताबिक, इस साल जिले में एक लाख 18 हजार 319 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की फसल सूख गई। जिससे एक अरब 59 करोड़ 73 लाख छह हजार पांच सौ रुपये का नुकसान हुआ है। धान की सूखी फसल को किसानों ने काटकर पशुओं को चारे के रूप में खिलाया। मौसम को देखते हुए आगामी रबी के सीजन के फसल की चिंता सता रही है। यह साल किसानों के लिए तकलीफदेय रहा है। रबी फसल बर्बाद होने से किसानों का मनोबल पहले से गिरा है। वहीं प्रदेश सरकार की तरफ से मुआवजे की राशि देने में देरी से उनका दर्द बढ़ गया है। वहीं मार्च अप्रैल में रबी के सीजन में नुकसान की भरपाई के लिए जिला प्रशासन ने शासन से 99.7697 करोड़ रुपये की मांग की थी। शासन से अबतक 28.85 करोड़ रुपये मिला है। इसमें 26.85 लाख रुपये 63761 किसानों में बांट दिया गया। बाकी दो करोड़ रुपये को सभी पांच तहसीलों में 40-40 लाख रुपये भेज दिया गया है। जिले के करीब पौने छह लाख किसानों के लिए करीब 71 करोड़ रुपये की जरूरत है। किसानों का कहना है कि केंद्र और प्रदेश उनकी सुधि नहीं ले रही है। इसको लेकर कई बार आंदोलन किया गया लेकिन सरकारों पर इसका कोई असर नहीं हुआ।