देवरिया। निजी अस्पतालों से सांठगांठ करने वाली दस आशा बहुओं पद से हटा दिया जाएगा। इसके लिए सीएमओ कार्यालय से ग्राम प्रधानों को नोटिस भेज दिया गया है। मरीजों को निजी अस्पताल पहुंचाने के खेल में इन दस आशा बहुओं का नाम सामने आया। इसका खुलासा सीएमओ द्वारा कराई गई जांच में हुआ। वहीं, 28 आशा बहुओं की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। उनको अपने कार्य में सुधार करने की नोटिस दी गई है।
सरकारी अस्पतालों में प्रसव में लगातार कमी आ रही थी। इसे देख सीएमओ ने जांच कराई। जांच में सामने आया कि दस आशा बहुएं ऐसी हैं जो सरकारी अस्पताल से गर्भवती को निजी अस्पताल में पहुंचाती थी। इनका गठजोड़ निजी अस्पताल के दलालों से था। उनके जरिए निजी अस्पतालों मरीजों को पहुंचाया जाता था। सीएचसी, पीएचसी पर होने वाले संस्थागत प्रसव की रिपोर्ट में भी इसका खुलासा हुआ।
आशा बहुओं ने नोटिस का नहीं दिया जवाब
जांच में दोषी पाई गई दस आशा बहुओं को 20 दिन पहले सीएमओ के निर्देश पर सीएचसी अधीक्षक ने चेतावनी नोटिस जारी किया था। नोटिस मिलने के बाद भी आशा बहुओं ने जवाब नहीं दिया। इसके बाद सीएचसी अधीक्षक ने ग्राम प्रधानों को इन आशा बहुओं को हटाकर दूसरे का चयन करने का नोटिस दिया है। सीएचसी अधीक्षक ने बताया कि अभी तक किसी भी प्रधान ने आशा बहुओं के लिए प्रस्ताव नहीं भेजा है।
लापरवाह आशा बहुओं को दी गई चेतावनी नोटिस
जुलाई, अगस्त और सितंबर में 28 आशा बहू ऐसी मिली हैं जिनका काम नहीं के बराबर था। इनके गांवों के गर्भवती महिलाओं का प्रसव भी संबंधित सीएचसी, पीएचसी पर नहीं हो रहा था। गांव में इनकी सक्रियता भी नहीं मिली। सीएचसी अधीक्षक ने आशा बहुओं के साथ गांव के प्रधानों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि 28 आशाओं की कार्यशैली ठीक नहीं है। टीकाकरण से लेकर गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराने में इनकी भूमिका संदिग्ध है। ग्राम सभा की बैठक में आशा बहू पद के लिए दूसरे का प्रस्ताव भेजने के लिए कहा गया है, लेकिन अभी किसी भी गांव के प्रधानों ने अपना प्रस्ताव नहीं भेजा है।
-
आंकड़ों में अंतर चिह्नित हुईं आशा
टीका सरकारी, जांच भी सरकारी, लेकिन प्रसव के आंकड़ों में अंतर मिलने पर आशा बहुओं की दलालों से मिलीभगत पकड़ी गई। बीस में संस्थागत प्रसव में कमी आने के कारण स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने शिकंजा कसना रूशु किया तो 10 आशा बहुओं का नाम सामने आया। इनको हटाकर दूसरे की नियुक्ति करने की तैयारी में स्वास्थ्य महकमा है। डीएचएस की बैठक में डीएम अखंड प्रताप सिंह भी सीएमओ को ऐसी आशा कार्यकर्ता को ट्रेस कर हटाने का निर्देश दे चुके हैं।
-
प्रधान खुद कर रहे आशा को रखने के लिए पैरवी
आशा बहुओं को रखने के लिए ग्रामसभा की ओर से प्रस्ताव आना जरूरी है। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग उसका चयन आशा पद के लिए करेगा। स्वास्थ्य विभाग आशा बहू को ऐसे नहीं रख सकता है। दो सीएचसी अधीक्षकों ने बताया कि नोटिस की कार्रवाई पूरा होने के बाद भी कई प्रधान आशा बहुओं को हटाने के पक्ष में नहीं है। वह उसी आशा बहू को बने रहने के लिए पैरवी करा रहे हैं। इसकी वजह से आगे की कार्रवाई में तेजी नहीं आ रही है।
वर्जन
संस्थागत प्रसव के लिए शासन से मिलने वाले लक्ष्य के हिसाब से इन दिनों ठीक चल रहा है। बीच में आशा बहुओं की लापरवाही से कम हुआ था। दस आशा को चिह्नित किया गया है, जो गर्भवतियों को निजी अस्पतालों में प्रसव के लिए पहुंचाती थी। इनको हटाने के लिए कार्रवाई चल रही है। बाकी 28 आशा बहुओं की भूमिका संदिग्ध मिली है। इन्हे चेतावनी नोटिस सीएचसी अधीक्षकों के माध्यम से भिजवाया गया है। ऐसे आशा बहुओं को चिह्नित किया जा रहा है।
डॉ. राजेश झा, सीएमओ