भवन बना रहे तो जान लीजिए विभागों के कायदे कानून, वरना पड़ जाएंगे लेने के देने
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। श्रम विभाग ने शहर में दस लाख की लागत से अधिक का भवन निर्माण कराने के बाद एक प्रतिशत लेबर सेस न जमा करने वाले भवन स्वामियों को चिह्नित किया है। इसमें शहर के बड़े व्यवसायिक भवन, नर्सिंग होम, पेट्रोल पंप, डिग्री काॅलेज, होटल सहित डेढ़ सौ भवनों को उप श्रम आयुक्त कार्यालय गोरखपुर की ओर से नोटिस दिया गया है। करीब 150 भवन स्वामियों को नोटिस और बीस भवन स्वामियों को लेबर शेष जमा नहीं करने पर उनके खिलाफ आरसी जारी करने की तैयारी चल रही है।
हर साल करीब तीन हजार भवन जनपद में बनते हैं। इसमें सबसे अधिक शहर में भवन का निर्माण होता है। इसमें सबसे गंभीर बात तो यह है कि श्रम विभाग के नियम के तहत भवन निर्माण का एक प्रतिशत लेबर सेस के रूप में जमा करना होता है। जिसे जमा करने में लापरवाही बरती जा रही है। मोटी रकम बचाने के चक्कर में अब कार्रवाई की जद में फंस रहे हैं। अगर कोई व्यक्ति शहर में किसी का मकान खरीद लिया और उसका लेबर सेस जमा नहीं हुआ है तो भवन स्वामी को जमा करना पड़ेगा। इसमें जिसके नाम नोटिस जारी होने के दिन भवन होगा, उसे ही जमा करना होगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार लेबर सेस जमा करने में बड़े पैमाने पर शहर में लापरवाही बरती जा रही है। ऐसे भवनों को श्रम विभाग चिह्नित करने का काम कर रहा है। अभी तक शहर में करीब 150 भवन है, जिसमें बड़े भवनों की संख्या अधिक है। ऐसे भवनस्वामियों को नोटिस देकर रुपये जमा करने को कहा गया है।
वर्जन
श्रम विभाग लेबर शेष जमा नहीं करने वाले भवन स्वामियों को चिन्हित कर नोटिस भेज रहा है। जिले में नर्सिंग होम, पेट्रोल पंप, डिग्री कालेज, होटल आदि डेढ़ सौ भवनों को उप श्रम आयुक्त कार्यालय गोरखपुर की ओर से नोटिस दी गई है। कई नोटिस के बावजूद लेबर शेष जमा नहीं करने वाले 20 भवन स्वामियों के खिलाफ आरसी जारी करने की तैयारी चल रही है।
अमित कुमार मिश्र,उप श्रम आयुक्त
देहात में भी नक्शा पास न कराने पर होगी दिक्कत
शहर की तर्ज पर गांवों को बेतरतीब बसावट से निजात दिलाने के लिए बीते साल तीन सितंबर को शासन की ओर से भवन मानचित्र सामग्री गजट प्रकाशित हुआ था। इसके मुताबिक तीन सौ वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल में भवन निर्माण कराने वालों को जिला पंचायत से नक्शा पास कराना होगा। बिना स्वीकृत मानचित्र के भवन बनाने की अनुमति नहीं होगी। शासन की मंशा है कि गांवों में नक्शा पास कराकर भवनों का निर्माण कराने से सड़क, नाली, बिजली आपूर्ति आदि विकास कार्य कराने में कठिनाई नहीं होगी। जो भी भवन बनेंगे वहां इन सुविधाओं के लिए जगह का ख्याल रखा जाएगा। गजट प्रकाशित हुए नौ माह गुजरने के बाद भी ज्यादातर लोग इस नियम से अनजान हैं। अबतक करीब 15 से 20 लोगों ने ही जिला पंचायत से भवन का नक्शा पास कराया है।
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यह है नक्शा पास कराने का नियम
तीन सौ वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल में आवासीय या व्यवसायिक भवन निर्माण कराने वालों को जिला पंचायत में आवेदन करना होता है। यहां के मानचित्रकार की मदद से भवन का नक्शा तैयार किया जाता है। आवासीय, शैक्षणिक 25 रुपये, और व्यावसायिक भवन 50 रुपये वर्ग मीटर की दर पर विकास शुल्क जमा करने के उपरांत कार्य अधिकारी के कार्यालय से नक्शा स्वीकृत होता है।
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नक्शा पास नहीं कराने में लगेगा जुर्माना
बिना नक्शा पास कराए भवन निर्माण कराने वालों के खिलाफ विकास शुल्क का 20 प्रतिशत अतिरिक्त, जुर्माना के रुप में वसूलने का प्रावधान है। इसके अलावा भवन का नक्शा पास न होने पर अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं मिल पाएगी। अगर आप व्यवसायिक लोन लेना चाह रहे तो उसमें भी अड़चन आएगी।
बेतरतीब बसावट से मिलेगी मुक्ति
भवनों का नक्शा पास कराकर निर्माण कराने से गांवों के बेतरतीब बसावट से मुक्ति मिलेगी। सड़क, नाले की व्यवस्था आसानी से हो जाएगी। इसकी जानकारी अभी अधिकांश लोगों को नहीं है। जिसके चलते वह बिना नक्शा के मकान बनवा रहे हैं। -बीर बहादुर कुशवाहा
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सुव्यवस्थित होंगे गांव
गांवों में भवनों का नक्शा पास कराने संबंधी नियम की जानकारी नहीं है। यह पहल अच्छी है। विकास शुल्क नाम मात्र का होना चाहिए। नक्शा पास कर भवन बनने से गांव सुव्यवस्थित होंगे। शहर जैसी सुविधाएं होंगी। -ज्ञानेश्वर शुक्ला, पिपरा खेमकरण
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नोटिस की तैयारी में जिला पंचायत
जिला पंचायत के कार्य अधिकारी प्रमोद सिंह ने बताया कि तीन सौ वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल में बने ऐसे आवासीय और व्यवसायिक भवनों को चिन्हित करने की तैयारी में है जिनका नक्शा पास कराए बिना निर्माण हुआ है। पहले चरण में शैक्षणिक संस्थान, रेस्टोरेंट, औद्योगिक भवनों को चिह्नित कर नोटिस दिया जाएगा।