छह करोड़ खर्च के बाद भी नहीं मुड़ रही नदी
गायघाट में एक साल से नदी का रुख बदल रहा सिंचाई विभाग का मैकेनिकल डिविजन
धारा बदलने में चली गई काश्तकारों की जमीन, नहीं मिला मुआवजा
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। गांवों को बचाने के लिए नदी का रुख मोड़ने में दक्ष सिंचाई विभाग का मैकेनिकल डिविजन गायघाट में एक साल से बीरबल की खिचड़ी पका रहा है। यहां छह करोड़ रुपये की लागत से राप्ती और गोर्रा नदी की धारा को मोड़ने का प्रयास चल रहा है। मानसून आने में अब दो चार दिन की देरी को देखते हुए एक बार फिर नदी को मोड़ने के नाम पर करोड़ों की बर्बादी तय मानी जा रही है।
रुद्रपुर के बाढ़ प्रभावित गायघाट में तीन नदियों का संगम है। यहां राप्ती, गोर्रा और बथुआ नदी मिलती हैं। एक साथ मिलने के बाद तीनों नदियां बाढ़ में विकराल रूप ले लेती हैं। यह नदी अब तक तीन बार गायघाट गांव को उजाड़ चुकी है। पूरब की ओर बढ़ रही नदी से मदनपुर कस्बे को भी खतरा है। नदी की धारा बदलने के लिए पिछले साल भी सिंचाई विभाग का मैकेनिकल डिविजन असफल प्रयास कर चुका है।
नदी का रुख बदलने में करीब 100 काश्तकारों की भूमि अधिग्रहीत की गई है। लेकिन बरसात आते ही सभी किए धरे पर पानी फिर जाता है। विभाग नदी की तलहटी तक बड़ी मशीनों से खोदाई कर नया रास्ता बना रहा है। इसमें गांव के लोगों की कई एकड़ भूमि चली गई। काश्तकारों ने भूमि का मुआवजा मांगा तो प्रशासन ने चुप करा दिया।
बालू से तेल निकाल रहा विभाग गांवघाट के किसान योगेंद्र यादव ने कहा कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ धन की बर्बादी के लिए बनाया गया है। इससे कोई फायदा नहीं होने वाला, पहली बारिश में ही सब पट जाएगा। इससे पहले भी सारी मेहनत और धन बर्बाद हो चुका है। यह परियोजना कहीं सफल नहीं हुई है। नउआबह और गोबरौल में भी नदी का रुख बदलने का असफल प्रयास किया गया। सोनबह के किसान प्रेम यादव ने कहा सरकारी मशीनरी सरकारी धन को पानी में बहा रही है। एक साल से काम चल रहा है। बरसात में सब किए धरे पर पानी फिरना तय है। सिंचाई विभाग धरातल पर कोई काम नहीं करता है न ही यहां के बाशिंदों की राय ली जाती है। सिंचाई विभाग बालू से तेल निकालने का प्रयास कर रहा है।
अंकित सिंह ने कहा कि नदी का रास्ता बदलने में करीब 100 किसानों की कृषि योग्य भूमि बर्बाद हो गई। तमाम किसान भूमिहीन हो गए। वे अपने रकबे से गेहूं की एक फसल हर साल काट रहे थे। मुआवजा के लिए किसानों ने आंदोलन किया तो दबा दिया गया।
सपा के किसान नेता हरेंद्र सिंह त्यागी ने कहा कि यह सरकार किसान विरोधी है। किसानों की काश्तकारी चौपट करने के बाद भी नदी का रुख मुड़ने वाला नहीं है। आंदोलन को दबाने वाली सरकार को किसानों का मुआवजा देना पड़ेगा। इस बार किसान आर-पार की लड़ाई लड़ेगा। इस प्रोजेक्ट में सरकारी धन की बंदरबांट हो रही है।
वर्जन
गायघाट में नदी का रुख मोड़ने का काम कानपुर का मैकेनिकल डिविजन कर रहा है। बरसात के पूर्व काम पूरा होने की पूरी संभावना है। इस काम पर जिले के सिंचाई विभाग का नियंत्रण नहीं है। लेकिन काम की निगरानी की जा रही है।
-सचिन अग्रवाल, अवर अभियंता, सिंचाई विभाग