मेडिकल कालेज के ईएनटी विभाग में कान की जांच करते डॉ प्रदीप कुमार गुप्ता
देवरिया। दिवाली पर पटाखों की शोर से लोगों के सुनने की क्षमता पर पड़ी है। इसके बाद ईएनटी विभाग में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। पटाखों की तेज आवाज का असर लोगों की कानाें पर पड़ा है। तीन दिन में करीब तीस पीड़ित इलाज के लिए पहुंचे। इनमें माइल्ड ईयरिंग लास मिला है।
दिवाली पर शहर से लेकर पटाखा जमकर फोड़े गए। पटाखा के तेज आवाज का दुष्प्रभाव कुछ लोगों के कानों के सुनने की क्षमता पर पड़ा है। 70 डेसिबल से अधिक अचानक तेज आवाज से सडन ईयरिंग लास से लोग पीड़ित हुए हैं। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के नाक, कान, गला विभाग में इस समस्या से पीड़ित मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। तीन दिन के अंदर तीस से अधिक लोग इलाज कराने पहुंचे हैं। इसमें कुछ लोगों को कान में दर्द, सनसनाहट की दिक्कत थी। जबकि चार लोग कान से अचानक कम सुनाई देने की समस्या से पीड़ित थे। शनिवार को ओमप्रकाश, नितीश यादव व शिवेंद्र कम सुनाई की शिकायत लेकर पहुंचे थे। डॉक्टर ने दवा दिया और पांच दिन बाद बुलाया। आराम न मिलने पर प्योर टोन आडियोमेट्री जांच कराने की सलाह दी।
इतने के कानों की हुई जांच
- मेडिकल कॉलेज के आडियो मेट्री जांच कक्ष में बृहस्पतिवार को अठारह लोगों की जांच हुई। शुक्रवार को नौ तथा शनिवार को आठ मरीजों की जांच की गई। इसमें अधिकांश को कान से सुनाई देने की समस्या थी।
तेज आवाज होती है परेशानी
-कान, सिर दर्द, चक्कर आना
-कान में सनसनाहट की होना
-कान की नस सूखने व पर्दा फटना
पटाखा की तेज आवाज से सुनाई कम देने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। तेज आवाज कान के लिए नुकसानदायक होता है। पटाखा की तेज आवाज से अचानक सुनाई देना बंद हो जाता है। वहीं कान की नस सूख सकती है और पर्दा में छेद हो सकता है। जबकि दर्द, सनसनाहट की समस्या उत्पन्न होती है। 90 डेसिबल से अधिक पर सुनाई कम देता है। नसे सूखने लगती हैं। माइल्ड ईयरिंग लास के मरीज अधिक आए हैं। दवा के साथ जरूरत पड़ने पर जांच भी कराई जा रही है।