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नगर पालिका और नगर पंचायतों के वार्डों का चार नवंबर तक तय हो जाएगा आरक्षण

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नगर पालिका और नगर पंचायतों के वार्डों का चार नवंबर तक तय हो जाएगा आरक्षण
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नए वार्डों का जनसंख्या के आधार पर तय होगा
नगर पालिका देवरिया और बरहज के सीमा विस्तार होने पर पड़ेगा असर
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। नगर निकाय चुनाव की तैयारी पूरे जोर के साथ चल रही है। सभी निकायों के वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया चार नवंबर तक पूरा कर दी जानी है। इसके लिए प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी को पत्र भेजा है। आरक्षण के गुणा-गणित का सबसे अधिक असर देवरिया नगर पालिका परिषद और गौर बरहज नगर पालिका परिषद पर पड़ेगा, क्योंकि दोनों का सीमा विस्तार किया गया है।
नगर पालिका और नगर पंचायतों के वार्डों के आरक्षण प्रक्रिया दीपावली के बाद तेज हो जाएगी। शासन स्तर से निर्देश है कि हर हाल में इसे चार नवंबर तक शासन को भेज दिया जाए। इसको लेकर आला अफसर भी गंभीर हो गए हैं।
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निकाय के सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो नव सृजित नगर निकायों के वार्डों का आरक्षण चक्रानुसार होगा। जबकि नगर पालिक देवरिया और बरहज नगर पालिका में शामिल जो गांव वार्ड बने हैं, उनका आरक्षण जनसंख्या के आधार पर किया जाएगा। नगर पालिका क्षेत्र के जिन वार्डों में पचास प्रतिशत के करीब नए क्षेत्र जुड़े हैं, वहां भी आरक्षण जनसंख्या के आधार पर होगी, लेकिन इससे कम संख्या पर चक्रानुसार आरक्षण तय किया जाएगा।
निगम के सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो देवरिया में 23 गांव शामिल होने के बाद आठ वार्ड नए बनाए गए हैं। इसके कारण 25 की जगह 33 वार्ड हो गए हैं। इसका व्यापक असर अन्य वार्डों पर भी पड़ेगा, क्योंकि कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पर पुराने की जनसंख्या से अधिक नई जनसंख्या हो गई है। इसके कारण यहां पर आरक्षण में बदलाव नए सिरे होगा।
इसी तरह गौरा बरहज नगर पालिका क्षेत्र में आठ गांव शामिल किए गए हैं। नई आबादी शामिल होने पर वार्ड की संख्या 25 जरूर रह गई है, लेकिन जनसंख्या पर असर पड़ा है। इसके कारण आरक्षण में बदलाव की स्थिति आएगी।
कोट
स्थानीय निकाय के वार्डों के आरक्षण के लिए दिशा निर्देश आए हैं। नियमानुसार आरक्षण तय किया जाएगा। आपत्तियों के आधार पर रैपिड सर्वे का निस्तारण किया जाएगा।
-रोहित सिंह, ईओर
नगर पालिका के रैपिड सर्वे पर उठ रहे सवाल
देवरिया। नगर पालिका क्षेत्र के कराए गए रैपिड सर्वे की रिपोर्ट को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि अचानक ओबीसी की जनसंख्या घट गई है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि आरक्षण को लेकर बड़ा खेल करने की योजना बनाई गई है। इस बार नगर पालिका क्षेत्र में 36 प्रतिशत पिछड़ी जाति की संख्या बताई गई है, जो 1,82,145 में 66,504 है।
शहर के मालवीय रोड निवासी अभिषेक गुप्ता ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर बताया है कि 2017 के रैपिड सर्वे के अनुसार नगर पालिका क्षेत्र में पिछड़ी जाति की संख्या 53,034 थी। इस बार जो 23 गांव शामिल हुए हैं, 2011 की जनसंख्या के अनुसार उन गांवों में पिछड़ी जाति की आबादी 32,582 है। अगर दोनों को जोड़ा जाए नगर पालिका क्षेत्र में पिछड़ी जाति की आबादी 85,650 होगी, लेकिन नए रैपिड सर्वे के अनुसार जनसंख्या घटकर 66,504 हो गई। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि करीब बीस हजार पिछड़ी जाति की जनसंख्या के बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही है। इसको लेकर शिकायकर्ता ने फिर से सही तरीके से रैपिड सर्वे कराने की मांग की है।
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इसी तरह बड़हरा वार्ड नंबर दो में लेखपाल की सर्वे रिपोर्ट में पिछड़ी जाति की जनसंख्या 2832 है, लेकिन रैपिड सर्वे में संख्या 1179 दर्शाई गई है। भाजपा नेता राजेंद्र मल्ल ने पिछड़ी जाति की जनसंख्या को छिपाने की शिकायत जिलाधिकारी से की है। संवाद
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