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पुष्यतिथि पर विशेष : मोती बीए, रे सखी घूंघट के पट खोल...

Thu, 18 Jan 2024 01:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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बरहज। नंदना पश्चिमी वार्ड निवासी और एसके इंटर कॉलेज में इतिहास के प्रवक्ता रहे मोती बीए 1935 में रे सखी घूंघट का पट खोल..., हर गुलशन में हैं शबनम के कतरे...सहित दर्जनों कवितांए लिखी थीं। जो कविताएं काव्य जगत के मंचों पर धूम मचाई थीं। उन्होंने 1942 में मुंबई के फिल्मीस्तान स्टूडियो और लाहौर के पंचौली आर्टस में फिल्मों के लिए गीत लिखना शुरु किया था। जो आज भी लोगों के लबों पर हैं।
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रुपहले पर्दे पर मोती बीए ने स्वलिखित गीतों के जरिए भोजपुरी की महक बिखेरी थी। दिलीप कुमार-कामिनी कौशल अभिनीत 1948 में रिलीज फिल्म नदिया के पार में उन्होंने गीत लिखकर भोजपुरी को पहचान दिलाया था। फिल्म में इन्होंने कठवा के नईया बनइहे रे मलहवा..., मोरे राजा हो ले चलअ नदिया के पार...सहित 13 गीत लिखा था। जिसे संगीतकार रामचंद्र ने अपना सुर दिया था।
1951 में राजपूर फिल्म के लिए जोगीरा लिखा था। जिसे मोहम्मद रफी और शमशाद बेगम ने आवाज दिया था। जबकि सुरैय्या बेगम और जशराज ने अभिनय किया था। मोती बीए ने 80 से अधिक फिल्मों के लिए गीत, जबकि सेमर के फूल, भोजपुरी सानेट, तुलसी रसायन, तिनका-तिनका आदि साहित्यिक रचनाएं भी लिखा था। इन्होंने कालीदास कृत्य मेघदूत का भोजपुरी अनुवाद किया है। 18 जनवरी 2009 को इनका देहावसान हो गया। मोती बीए को साहित्य अकादमी पुरस्कार, राहुल सांकृत्यायन पुरस्कारों के अलावा कई सम्मानों से नवाजा गया। शिक्षा क्षेत्र में इन्हें राज्यपाल द्वारा पुरस्कृत किया गया था।
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आज मनाई जाएगी 15वीं पुण्यतिथि

नंदना वार्ड पश्चिमी निवासी मोती बीए के पैतृक आवास पर 18 जनवरी को उनकी 15वीं पुण्यतिथि मनाई जाएगी। छोटे पुत्र अंजनी उपाध्याय ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की तरह बार भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है। जिसमें साहित्यकार, लेखक और गणमान्य आमंत्रित किए गए हैं।
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