फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Deoria News: मोती बीए ने भोजपुरी को दिलाई विश्व पटल पर पहचान

विज्ञापन
बरहज के नंदना पश्चिमी निवासी स्व.मोती बीए संवाद - फोटो : DEORIA
विज्ञापन
मोती बीए ने भोजपुरी को दिलाई विश्व पटल पर पहचान
विज्ञापन

मोती बीए की पुण्यतिथि पर विशेष, 1935 में पहली कविता लिखी थी रे सखी घूंघट के पट खोल
बरहज। पूर्वांचल सहित पूरे भोजपुरी जनमानस में शायद ही कोई होगा, जो मोती बीए के नाम से परिचित न हो। अपनी रचनाओं के माध्यम से न सिर्फ उन्होंने भोजपुरी को विश्व पटल पर पहचान दिलाई, बल्कि एक भाषा के रूप में भी स्थापित करने में अहम योगदान दिया।
जन-जन को अपने गीतों पर झुमाने वाले मोती बीए नगर के नंदना पश्चिमी वार्ड के रहने वाले थे। रुपहले पर्दे पर भोजपुरी की महक बिखेरने वाले वह पहले शख्स थे। 1935 में लिखी पहली कविता रे सखी घूंघट के पट खोल... से उन्होंने अमिट छाप छोड़ी थी। 1948 में आई दिलीप कुमार-कामिनी कौशल अभिनीत फिल्म नदिया के पार के गीत मोरे राजा हो ले चल नदिया के पार... ने फिल्म जगत में भोजपुरी की दमदार उपस्थित दर्ज कराई थी। मोती बीए के लिखे फिल्मी गाने आज भी लोगों की जुबां पर हैं।
विज्ञापन

मूलरूप से बरेजी गांव के रहने वाले राधाकृष्ण-कौशल्या देवी की तीन संतानों में स्व. मोती बीए दूसरे नंबर पर थे। वह एसके इंटर कॉलेज में इतिहास के प्रवक्ता थे। राज्यपाल गणपतराव देशमुख ने 1978 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ शिक्षक जबकि 2001 में तत्कालीन राष्ट्रपति की ओर से साहित्य अकादमी पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया गया था।
मोती बीए ने 1942 में मुंबई के फिल्मिस्तान स्टूडियो और लाहौर के पंचौली आर्ट्स में फिल्मों के लिए गीत लिखना शुरू किया था। उन्होंने पहली बार नदिया के पार फिल्म के लिए मोरे राजा हो ले चल नदिया के पार, कठवा के नइया बनइह रे मलहवा, दिल ले के भागा दगा देकर भागा...आदि गीत लिखा था। 1951 में राजपूत फिल्म के लिए पहली बार लिखे जोगीरा को मोहम्मद रफी और शमशाद बेगम ने आवाज दिया था। इसे सुरैय्या बेगम और यशराज ने अभिनीत किया था।
उन्होंने हर गुल में है शबनम के कतरे, हर आंखों में आंसू की बूंदे, पंगु, बधिर, अर्द्धांध, मूक हूं, पीर कलेजे दबी हूंक हूं, तुम न अगर होती तो क्या था, पात्र हाथ से गिर जाना था, मधुकर पीते-पीते मुझे एक दिन मर जाना था आदि रचनाएं लिखी हैं। फिल्म जगत और साहित्यिक दुनियां में आज भी स्व. मोती बीए की चर्चा है। उन्होंने 80 से अधिक फिल्मों में गीत लिखे हैं। 18 जनवरी 2009 को निधन हो जाने के कारण महामौन, तीन बहनें आदि कुछ रचनाएं प्रकाशित नहीं हो सकी हैं। संवाद
विज्ञापन

पुण्यतिथि आज
बरहज। नगर के नंदना वार्ड पश्चिमी निवासी स्व. मोती बीए के पैतृक आवास पर 18 जनवरी बुधवार को उनकी पुण्यतिथि मनाई जाएगी। उनके पुत्र अंजनी उपाध्याय ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इसमें साहित्यकारों, लेखक सहित अन्य गणमान्यों को आमंत्रित किया गया है। संवाद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें