भागलुपर में बंधो की नहीं हुई मरम्मत
भागलपुर-मईल मार्ग पर स्थित कई गांवों की बंधों से होती है सुरक्षा
संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। बाढ़ में कई गांवों के लिए बंधे का कार्य करने वाले भागलपुर-मईल मार्ग की सुरक्षा के लिए बने पांच स्पर बंधों के मरम्मत का कार्य मानसून आने के पहले नहीं हो सका है। लोगों का कहना है कि विभाग की लापरवाही कहीं तटवर्ती गांवों के लिए भारी न पड़ जाए। जीव जंतुओं की ओर से बनाए गए बिल को बंद भी नहीं किया गया है। वहीं मार्ग के चौड़ीकरण का कार्य कर रहे ठेकेदार ने सड़क के दोनों तरफ से मिट्टी निकाल कर छह फीट गड्ढा कर दिया है।
बीते सालों में नदी के कटान से गांवों को बचाने के लिए कई करोड़ की लागत से भागलपुर और मईल मार्ग के बीच विभाग ने पांच स्पर बंधों का निर्माण कराया था। शासन का निर्देश है कि 15 जून के पहले बंधों के मरम्मत कार्य पूर्ण कर लिया जाए, लेकिन आज तक इस मार्ग और स्पर बंधों का मरम्मत कार्य नहीं कराया गया। बंधों पर जगह-जगह इस क्षेत्र में रहने वाले जीव-जंतु बिल बना चुके हैं। बरसात में बाढ़ आने पर शाही मांद और रैट होल के चलते बंधा कट सकता है, जिससे भागलपुर, छित्तूपुर, देवसिया, नरियांव, पिपरा दवन, पिपराबांध, गोड़वली, इशारू, जिरासो सहित एक दर्जन से अधिक गांवों की फसल डूब सकती है और घरों में पानी घुस कर तबाह कर सकता है। वर्ष 1998 की बाढ़ में यह बंधा कट गया था। पिछले साल मामूली अंतर से कटते- कटते बच गया था, इसके बावजूद विभाग मौन है। पांचों स्पर बंधों पर बोल्डर उखड़ गए हैं और झाड़ झंखाड़ उग गए हैं। जंगली जीव इस पर अपना बसेरा बना लिए हैं। उधर ठेकेदार की ओर से भागलपुर-मईल मार्ग के चौड़ीकरण का कार्य दो साल से कराया जा रहा है। इसके लिए सड़क के दोनों तरफ छह फीट मिट्टी निकालने से गड्ढा बन गया है जो बाढ़ के समय खतरा पैदा कर सकता है। बाढ़ विभाग के सहायक अभियंता अशोक द्विवेदी ने बताया कि बंधों का मरम्मत कार्य चल रहा है। भागलपुर में भी जल्द से जल्द मरम्मत कार्य कराया जाएगा।