जल निगम निर्माण में हो रही गड़बड़ी पर नहीं है गंभीर, लोगों की शिकायत पर नहीं हुई सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर के बड़ा नाला निर्माण में गड़बड़ी होने की पुष्टि हुई है। सबसे गंभीर बात तो यह है कि जल निगम नाला निर्माण में हो रही गड़बड़ी को लेकर गंभीर नहीं रहा है। छह माह के दौरान रातों रात नाले की खुदाई के दौरान निकली लाखों रुपये की मिट्टी गायब भी हो गई। डिजाइन को लेकर भी सवाल खड़ा होता रहा है। कई मकानों में दरारें पड़ गईं। लोगों ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन किसी ने सुनी तक नहीं।
करीब 44 करोड़ की लागत से आरसीसी स्टार्म वाटर ड्रेनेज योजना के तहत करीब 8.8 किलोमीटर बड़े नाले का निर्माण मार्च 2023 से किया जा रहा है। नाला निर्माण के बाद से ही इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने लगे, क्योंकि सितंबर व अक्तूबर माह में हल्की बारिश में ही तीन बार नाले की दीवार गिर गई। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इसकी गुणवत्ता और डिजाइन को लेकर शासन को जांच के लिए पत्र लिखा था। इस पर एडीएम वित्त एवं राजस्व नागेंद्र प्रताप सिंह और गोरखपुर नगर निगम के मुख्य अभियंता संजय सिंह चौहान, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार को जांच मिली। जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में रिपोर्ट सौंपी गई। इसमें यह बात सामने आई कि बड़े नाले का निर्माण अधोमानक किया जा रहा है। डिजाइन सही नहीं है। इसके कारण दीवार गिर गई। इतना ही नहीं यह भी रिपोर्ट में बताया गया कि खुदाई के दौरान निकली कई ट्रॉली मिट्टी भी गायब हो गई। जिसके कारण नाले के दोनों तरफ मिट्टी की भराई ठीक ढंग से नहीं की गई। विभागीय सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो नाला निर्माण में घोर अनियमितता बरती गई है। डिजाइन को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। इसके चलते जिस नाले को सीधा बनना था वह टेढ़ा-मेढ़ा बना है। कहीं चौड़ाई अधिक तो कहीं कम कर दी गई है। इसके कारण देवरिया-खोराराम मार्ग स्थित कई मकानों में दरारें पड़ गईं। इतना ही नहीं इस रोड के निवासी विमल तिवारी के आवास का कुछ हिस्सा भी गिर गया था। उन्होंने इसकी शिकायत भी की थी। निर्मल कुमार तिवारी ने जांच रिपोर्ट मांगने के लिए आरटीआई भी दाखिल कर दिया था। नाले के गलत निर्माण की शिकायत भी उन्होंने की थी। बुधवार को जांच रिपोर्ट के आधार पर एई को निलंबित कर दिया गया था।
नाला एक नजर में
8.8 किलोमीटर निर्माण होना है।
700 सौ मीटर पर अभी काम चल रहा है।
15 जून तक कतरारी चौराहे पर काम पूरा होना था।
41.33 करोड़ रुपये की लागत है।
जांच का दायरा बढ़ा तो कइयों पर होगी कार्रवाई
शासन स्तर से हुई जांच में बड़ा नाला निर्माण में जल निगम के कई अफसरों पर गाज गिर सकती है। केवल सहायक अभियंता पर कार्रवाई होना, जांच की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है। आखिर इसमें शामिल जल निगम के जिम्मेदारों की भूमिका भी संदिग्ध है। इसको देखते हुए डीएम ने कुछ अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिखा है। जांच रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो बड़े नाले के निर्माण में लापरवाही बरतने की बात बताई गई है। इसके कारण दो अधिशासी अभियंता और पांच लोगों को दोषी माना गया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में जांच की परिधि में आए करीब आठ लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सकती है। इनके खिलाफ जिला स्तर से शासन को पत्र भी भेजा गया है।
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कोट: - नाला निर्माण में अनियमितता की गई है। डिजाइन और मानक का ध्यान नहीं दिया गया है। दोनों तरफ मिट्टी भरने में भी लापरवाही बरती गई है। मिट्टी भी गायब है। एई को निलंबित किया गया है। जांच रिपोर्ट में अन्य को भी दोषी पाया गया है। उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
जितेंद्र प्रताप सिंह
जिलाधिकारी, देवरिया