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Deoria News: पराग ने देवरिया और कुशीनगर के डेयरी संचालकों से दूध लेने से किया इन्कार

Thu, 22 Jun 2023 01:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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डेयरी संचालकों का बकाया भुगतान न होने के कारण दुग्ध अवशीतन केंद्र उसरा बाजार पर दूध बहाकर जताया
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देवरिया। दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड गोरखपुर (पराग) देवरिया और कुशीनगर में एक जून से बंद होने के कारण स्थानीय पशु पालकों व डेयरी संचालकों से दूध नहीं लिया जा रहा है। इससे नाराज पशु संचालकों ने बुधवार को दुग्ध अवशीतन केंद्र पर बहा कर विरोध जताया। इन दोनों जनपदों के पशुपालकों का आठ माह का करीब डेढ़ लाख लीटर दूध का अस्सी लाख रुपये बकाया है। इसमें देवरिया के 1.30 लाख लीटर दूध का करीब 45 लाख रुपये है। डेयरी कारोबार से जुड़े लोगों का हर रोज तीन हजार लीटर बर्बाद हो रहा है। इस कारण डेयरी संचालकों ने सैकड़ों लीटर दूध उसरा बाजार स्थित दुग्ध अवशीतन केंद्र पर बहा कर बुधवार को विरोध जताया है। जिलाधिकारी और सीडीओ को प्रार्थनापत्र देकर भुगतान की मांग की है।
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देवरिया में इस समय 122 और कुशीनगर में 61 दुग्ध समितियां हैं। इनसे करीब पांच डेयरी संचालक जुड़े हैं। हर रोज जिले में करीब तीन हजार लीटर दूध का उत्पादन होता है। पराग डेयरी दूध लेकर गोरखपुर जाती थी, लेकिन अब देवरिया और कुशीनगर जिलों का दूध पराग ने लेना बंद कर दिया है। जिम्मेदार अफसरों का कहना है कि दोनों जिलों का दूध मानक पर खरा नहीं है। इसके कारण दूध लेने से मंगलवार को इन्कार कर दिया है। सभी रूटों पर दूध कलेक्शन करने वाले वाहन बंद कर दिए गए हैं।
उसरा बाजार के दुग्ध अवशीतन केंद्र पर भी काम होना बंद हो गया है। विभागीय सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो सितंबर माह से फरवरी तक का भुगतान अटका हुआ है। बीच में मार्च का भुगतान कर दिया गया है। इसके बाद अप्रैल और मई का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। इसमें देवरिया का 45 लाख और कुशीनगर का 25 लाख रुपये पराग डेयरी में फंसा हुआ है। इसके पीछे जिम्मेदार अफसर दो कारण बता रहे हैं। उनका कहना है कि दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड गोरखपुर की क्षमता एक लाख लीटर प्रतिदिन होने से खर्च बढ़ गया है और घाटा हो गया। जिसके कारण दूध बेचकर भुगतान बिजली बिल, कर्मचारियों सहित अन्य मदों में खर्च कर दिया गया है। इसके कारण डेयरी संचालकों के भुगतान के लिए रुपये नहीं हैं।
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वर्जन
गोरखपुर में पहले पचास हजार लीटर का प्लांट था। पर बाद में चलकर एक लाख लीटर कर दिया गया है। इससे खर्चा बढ़ गया है और आय घट गई है। जो आय हुई है, उससे बिजली बिल और अन्य मदों में भुगतान कर दिया जा रहा है। डेयरी संचालकों का भुगतान आठ माह से बकाया है, शीघ्र भुगतान करने का प्रयास किया जा रहा है। टेस्टिंग मशीन किसी भी डेयरी पर नहीं है। दूध मानक के अनुरुप न होने के कारण कलेक्शन करना बंद कर दिया गया है। दूध ठीक न होने से दुकानदार लेना पसंद नहीं कर रहे हैं। अगर मानक पर सही दूध मिलेगा तो उसे फिर से लिया जाएगा।
-इंद्र भूषण सिंह, महा प्रबंधक, दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड गोरखपुर पराग

वर्जन
पशुपालकों के बकाया के बारे में जानकारी मिली है। समस्या के निदान के लिए दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड गोरखपुर पराग से बात की जा रही है। भुगतान की प्रक्रिया शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-रवींद्र कुमार, सीडीओ
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पराग 32 रुपये लीटर खरीद रहा दूध, फिर भी भुगतान नहीं, दम तोड़ रहीं समितियां
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले में डेयरी संचालकों की सेहत अफसरों की लापरवाही के कारण दिनोंदिन खराब होती जा रही है। समितियां एक के बाद एक बंद हो रही हैं। डेयरी संचालक भुगतान पाने के लिए भटक रहे हैं। हालत यह है कि अब दुग्ध अवशीतन केंद्र पर भी ताला लटकने का संकट छाने लगा है। जिले में 1996 में 325 दुग्ध समिति थीं। यह सभी दुग्ध संघ से संचालित होती थीं। इसे 1 जनवरी 2016 को गोरखपुर में मर्ज कर दिया गया है। इसके बाद एक के बाद एक समितियां बंद होती गईं। इसके जरिये हर रोज जहां जिले में बाहर हजार लीटर दूध का कारोबार होता था, वहां पर तीन से चार हजार लीटर दूध उत्पादन पर आकर सिमट गया। इस समय हालत यह है कि महज 122 समितियां ही दुग्ध उत्पादन कर रही हैं। वहीं दूसरी तरफ बाजार में जहां 50 रुपये लीटर दूध बिक रहा है। वहीं पराग महज 32 रुपये के भाव से खरीदने के बाद भी भुगतान नहीं कर रहा है। करीब आठ माह से भुगतान के लिए भटक रहे, डेयरी संचालकों को समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें। एक तरफ भुगतान भी रुक गया और दूसरी तरफ वह दूध का खपाएं। पशुओं के चारा आदि पर उनको खर्च उठाना पड़ रहा है और आय भी बंद हो गई है। पराग डेयरी देवरिया के विभिन्न मार्गों पर चलने वाली सभी गाड़िया बंद हो गई है क्योंकि वाहनस्वामियों का भी करीब सात लाख रुपये बकाया है।

कोट
पांच लाख रुपये बकाया है। घर पर शादी थी, आस लगी रही कि भुगतान हो जाएगा। पर 29 मई को शादी भी बीत गई और भुगतान भी नहीं हुआ। इसको लेकर सीडीओ से शिकायत भी की गई है। मानक पर अगर खरा दूध नहीं तो पहले कैसे लिया जाता था।
-उदयवीर, दुग्ध समिति पनिका

कोट
आठ माह से भुगतान बकाया है। जो पशुपालक समितियों को दूध दिए है, वह हर रोज तगादा कर रहे है। उनसे विवाद हो जा रहा हैै। अब समझ में नहीं आ रहा है क्या किया जाएं।
-शर्मानंद, डेयरी संचालक

कोट
बकाया भुगतान हुआ नहीं और दूध से लेने मना भी कर दिया गया है। पशुओं को चारा आदि घर पर रखी पूंजी से खिलाया जा रहा है। लापरवाही से डेयरी संचालकों की कमर टूट गई है।
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-संजीव सिंह, शहर के हनुमान मंदिर चौराहा
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