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मुसीबत में जन औषधि केंद्र : 17 सौ में मिलेंगी महज तीन सौ दवाएं

Thu, 11 May 2023 10:32 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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मेडिकल कॉलेज परिसर में स्थित प्रधानमंत्री जन औषधी केंद्र पर दवा लेने के लिए खड़े लोग।संवाद
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देवरिया। जिले में जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती और बेहतर जेनरिक दवाएं केंद्रों पर उपलब्ध होने का दावा स्वास्थ्य महकमा कर रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि 17 सौ दवाओं में से महज 300 दवाएं हैं। इसके पीछे यह भी कारण है कि डॉक्टर उन दवाओं को नहीं लिख रहे हैं। उनका ब्रांडेड दवाओं पर जोर है। मेडिकल कॉलेज और महिला अस्पताल में खुले जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की कमी के कारण मरीजों को बाहर की दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है, जबकि नियम है कि सारी दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए।
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बताया जा रहा है कि ब्रांडेड दवाओं के कारोबार वाले यह नहीं चाहते हैं कि सभी दवाएं जन औषधि केंद्र पर सस्ती उपलब्ध हों। अगर सभी दवाएं मिल जाएंगी तो उनका बड़ा मुनाफा मारा जाएगा। इस खेल में ड्रग विभाग भी सवालों के घेरे में है। जन औषधि केंद्रों और अन्य दुकानों की तुलना की जाए तो 80 से 85 प्रतिशत सस्ती दवाएं हैं। ऐसे में अगर आधी दवा भी जन औषधि केंद्रों पर मिलने लगे तो काफी तादाद में लोगों को सस्ती दवा मिलने लगेगी।
मेडिकल कॉलेज में हर रोज दो हजार से अधिक मरीज आते हैं, लेकिन इसमें से 20 से 25 प्रतिशत मरीज ही जन औषधि केंद्र से दवा खरीदते हैं, जबकि अन्य को बाहर से ब्रांडेड दवा खरीदनी पड़ रही है। अब सवाल उठता है कि व्यवस्था होने के बावजूद भी केंद्रों पर दवाएं क्यों नहीं पहुंच पा रही हैं। विभागीय सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो अस्पताल के अधिकांश डॉक्टर जन औषधि केंद्र की दवा लिखने से परहेज कर रहे हैं। उसकी आदत में ब्रांडेड दवा ही शुमार हो गया है। कुछ डॉक्टर तो ऐसे भी हैं कि अगर मरीज जन औषधि केंद्र से दवा खरीद भी लिया तो उसे वापस करा दे रहे हैं। इसको लेकर शासन ने कई बार नाराजगी भी जताई है।
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जनपद में हैं 26 जन औषधि केंद्र
जनपद में कुल 26 जन औषधि केंद्र हैं। इसमें शहर और देहात दोनों जगहों पर खुले हुए हैं, जबकि इसके अलावा 12 जन औषधि केंद्रों की स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन ये अभी तक नहीं खुल सके हैं।

इतनी सस्ती मिलती है दवा
- जन औषधि केंद्र पर ब्लड प्रेशर में दी जाने वाली दवा टेलसीसाल्टन 40 एमजी के दस टेबलेट के पैक की कीमत 12 रुपये और 20 एमजी के पैक की कीमत 17 रुपये है, जबकि ब्रांडेड दवा की कीमत 120 से 160 रुपये है।
- मानसिक रोग में दी जाने वाली नेप्राक्सान 250 से 500 के 15 टेबलेट के पैक की कीमत 48 रुपये है। जबकि ब्रांडेड दवा की कीमत करीब 125 रुपये है।
- गैस की दवा पेंटाप डीएसआर दस टेबलेट पैक की कीमत 22 रुपये है, जबकि ब्रांडेड की कीमत 115 रुपये है।
- चर्म रोग की दवा फ्लूकानाजोल के एक टेबलेट की कीमत पांच रुपये है, जबकि ब्रांडेड की कीमत 15 रुपये है।

जेनरिक दवाओं पर जोर दिया जाता है। जो दवाएं उपलब्ध नहीं रहती है उसे ही मरीज बाहर से खरीदते हैं। जन औषधि की दवा सस्ती और अच्छी होती है। इन दिनों अच्छी खासी मरीजों की भीड़ भी केंद्रों पर पहुंच रही है।
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-डॉ. एचके मिश्रा सीएमएस
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