फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेडिकल कॉलेज : दिन तो दिन रात में भी मरीजों पर रहती है दलालों की नजर

विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज के एमसीएचविंग के सामने रात में 12.20पर दर्द से कराह रही प्रसुता नीतू को 40मीनट बाद
विज्ञापन
-इमरजेंसी में डॉक्टर और दलालों में नहीं दिखाई देता है फर्क, सिर्फ दो स्टॉफ नर्स एप्रेन में मिलीं मौजूद
विज्ञापन

-दलालों की दिखी सक्रियता, लेबर रूम, पीआईसीयू में सो रही थीं स्टाफ नर्स
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज मरीज माफिया और दलालों के शिकंजे में है। दिन तो दिन रात में भी इमरजेंसी का माहौल और खराब हो जाता है। बिना एप्रेन पहने स्टाॅफ की आड़ में मरीज माफिया का मरीजों से लूट खसोट का खेल चल रहा है। विरोध करने व शोर मचाने पर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में रेफर करने की तीमारदारों को धमकियां मिलती हैं।
बघौचघाट के हरीमहुअवा गांव निवासी 60 वर्षीय अमीन अंसारी को बृहस्पतिवार को इमरजेंसी में पांच घंटे इलाज के बाद डॉक्टरों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज रात 11:30 बजे रेफर कर दिया। रिश्तेदार मोहफिल अंसारी ने बताया कि इतनी देर के इलाज में 2400 रुपये भी खर्च हो गया, जिसमें निजी जांच घर से 1700 का सीटी स्कैन कराया गया। बाकी दवा का खर्च अलग से लगा। यहां दलाल को पहचानना मुश्किल है। मईल के बकुची गांव निवासी जलेश्वर कुमार की पत्नी नीतू चौहान को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो घर वाले भागलपुर पीएचसी पर ले गए। वहां से डॉक्टर ने महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। रात 12.20 पर एंबुलेंस से महिला अस्पताल के इमरजेंसी पर आशा मेवाती देवी परिजनों के साथ पहुंची। ड्यूटी पर तैनात एक स्टाफ नर्स ने रात में ऑपरेशन की सुविधा नहीं होने की बात कही और शहर के एक निजी अस्पताल का नाम आशा कार्यकर्ता को बताया।
विज्ञापन


परिजन गर्भवती को वहां से निजी अस्पताल ले जाने के लिए टेंपो की तलाश करने लगे। आधे घंटे तक कोई साधन नहीं मिला और गर्भवती महिला दर्द से तड़पती रही। उधर आशा कार्यकर्ता निजी अस्पताल संचालक से मोबाइल से बार-बार बात कर रही थी। तब तक जलेश्वर टेंपो लेकर आए और पूछा अब कहां चलना है, अभी परिजन कुछ बोलते आशा कार्यकर्ता ने एक निजी अस्पताल का नाम लेकर वहां चलने की बात कह डाली। प्रसव पीड़ा से छटपटाती नीतू की दशा देख परेशान घर वाले उसके कहने के अनुसार निजी अस्पताल के लिए चल दिए।
भाटपाररानी के सिकरहटा गांव निवासी 60 वर्षीय रामसुरेश को सांस की दिक्कत थी। आराम नहीं होने पर इनके भाई ऋषिदेव शर्मा से कहने गए तो डॉक्टर के पास मौजूद एक युवक ने कुछ बोला नहीं, मरीज को देख रेफर का पर्चा थमा दिया। बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाने में असमर्थ ऋषिदेव ने बताया कि एक व्यक्ति के कहने पर उसके बताए निजी अस्पताल में लेकर जा रहा हूं। मरीजों की तकलीफ से परेशान तीमारदार और ऊपर से स्वास्थ्यकर्मियों के इस रवैये के चलते दलालों की बल्ले-बल्ले है।
-
कोट
दलालों का तिलिस्म तोड़ना हम भी चाहते हैं, लेकिन इनकी पहचान करना मुश्किल है। डॉक्टर और कर्मचारियों को हिदायत तो दी जा रही है। एसपी और कोतवाल से भी इसके लिए कई बार कहा जा चुका है। मरीजों के साथ आने वाले लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत है। रात को ड्यूटी के दौरान सोने या गायब रहने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की जांच कराई जाएगी।

-डॉ. राजेश कुमार बरनवाल, प्राचार्य, महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज, देवरिया
-
अव्यवस्थाएं बनीं मरीज माफिया का हथियार
देवरिया। एमसीएच विंग बिल्डिंग के प्रथम तल पर प्रसव कक्ष के बाहर नर्सेज स्टेशन में रात 1.27 बजे ड्यूटी पर तैनात एक स्टाफ नर्स सो रही थी। रानीघाट से आई मनीष की पत्नी निशा को प्रसव पीड़ा हो रही थी। स्टाफ नर्स से तीमारदारों ने तीन बार कहा, इस पर नर्स झल्ला गई और सुबह ऑपरेशन होने की बात कही। इसके अलावा अन्य गर्भवती महिलाओं को लेकर तीमारदार परेशान नजर आए। बड़हरापुल निवासी कृष्णा की पत्नी ने बेटी को किशुनपाली सरकारी अस्पताल में जन्म दिया था। रात 1.32 बजे नवजात बेटी की तबीयत बिगड़ने पर कृष्णा और उसकी मां उसे लेकर आईं और एसएनसीयू में भर्ती कराया।
बिहार के विजयीपुर निवासी अंजुमन आरा के नवजात बेटे की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे लेकर रात को एसएनसीयू पहुंचे। वहां मौजूद स्टाफ नर्स ने बच्चे को भर्ती कर लिया। डॉक्टर के आने की बात तीमारदार ने पूछी तो स्टाफ नर्स भड़क गई और बोली कि सुबह डॉक्टर आएंगे, ज्यादा परेशान करोगे तो इसी समय बच्चे को रेफर कर देंगे। 1.40 बजे मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन पुरुष और महिला वार्ड में कोई स्टाफ नर्स नहीं थी। ड्यूटी के बजाय सभी सोने चली गई थीं। कई मरीज परेशान दिखे। इमरजेंसी में सलेमपुर के उरदौली निवासी गोली लगने से जख्मी ममता को पुलिस 2 बजे लेकर जब इमरजेंसी पहुंची तो डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की हलचल बढ़ी, नहीं तो इसके पूर्व इमरजेंसी में बिना एप्रेन पहने सिर्फ एक डॉक्टर ही मरीजों का इलाज करते नजर आए।
-
सो रही स्टाफ नर्स से हुई बहस

मेडिकल कॉलेज की पुराने बिल्डिंग में संचालित पीआईसीयू वार्ड में रात को 12.20 बजे झीरूआ चौराहा निवासी छोटेलाल अपनी नौ वर्षीय पोती आराध्या को लेकर पहुंचे, उसे तेज बुखार था। पीआईसीयू वार्ड में स्टाफ नर्सों ने भर्ती कर लिया। दो बजे ग्लूकोज खत्म हो गया, तो घर वाले सो रही स्टाफ नर्स से बोले तो वह नाराज हो गई। कहासुनी के बाद दूसरी ग्लूकोज की बोतल लगाई। छोटेलाल और इनके साथ आए युवकों ने स्टाफ नर्स पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए रात को स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी की मांग की।








रात को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में आने वाले मरीजों पर दलालों की निगाहें गड़ी रहती हैं। डॉक्टर और दलालों में फर्क भी मरीज नहीं समझ पाते हैं, क्योंकि डॉक्टर एप्रेन नहीं पहनते हैं। इसी आड़ में इलाज के नाम पर मरीजों से लूट-खसोट का खेल चलता है। विरोध करने व शोर मचाने पर बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर करने की तीमारदारों को धमकियां मिलती हैं। वार्ड में भर्ती मरीजों की जिंदगी राम भरोसे है, क्योंकि 12 बजे रात के बाद स्टाफ नर्स अपने कक्ष में सोने चली जाती हैं, और जो रहती हैं वह कुर्सी पर सोती हैं। रात की स्वास्थ्य सेवाओं की बदलहाली पर पोल खोलती रिपोर्ट।
बघौचघाट के हरीमहुअवा गांव निवासी 60 वर्षीय अमीन अंसारी को बृहस्पतिवार को इमरजेंसी में पांच घंटे इलाज के बाद डॉक्टरों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज रात 11:30 बजे रेफर कर दिया। रिश्तेदार मोहफिल अंसारी ने बताया कि इतनी देर के इलाज में 2400 रुपये भी खर्च हो गया, जिसमें निजी जांच घर से 1700 का सीटी स्कैन कराया गया। बाकी दवा का खर्च अलग से लगा। यहां दलाल को पहचानना मुश्किल है। मईल के बकुची गांव निवासी जलेश्वर कुमार की पत्नी नीतू चौहान को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो घर वाले भागलपुर पीएचसी पर ले गए। वहां से डॉक्टर ने महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। रात 12.20 पर एंबुलेंस से महिला अस्पताल के इमरजेंसी पर आशा मेवाती देवी परिजनों के साथ पहुंची। ड्यूटी पर तैनात एक स्टाफ नर्स ने रात में ऑपरेशन की सुविधा नहीं होने की बात कही और शहर के एक निजी अस्पताल का नाम आशा कार्यकर्ता को बताया।
परिजन गर्भवती को वहां से निजी अस्पताल ले जाने के लिए टेंपो की तलाश करने लगे। आधे घंटे तक कोई साधन नहीं मिला और गर्भवती महिला दर्द से तड़पती रही। उधर आशा कार्यकर्ता निजी अस्पताल संचालक से मोबाइल से बार-बार बात कर रही थी। तब तक जलेश्वर टेंपो लेकर आए और पूछा अब कहां चलना है, तो आशा कार्यकर्ता बोली कि अपनी बेटी का प्रसव एक अस्पताल में कराया था। वहीं लेकर चलना है। प्रसव पीड़ा से छटपताती नीतू की दशा देख परेशान घर वाले उसके कहने के अनुसार निजी अस्पताल के लिए चल दिए।
एमसीएच विंग बिल्डिंग के प्रथम तल पर प्रसव कक्ष के बाहर नर्सेज स्टेशन में रात 1.27 बजे ड्यूटी पर तैनात एक स्टाफ नर्स सो रही थी। रानीघाट से आई मनीष की पत्नी निशा को प्रसव पीड़ा हो रही थी। स्टाफ नर्स से तीमारदारों ने तीन बार कहा, इस पर नर्स झल्ला गई और सुबह ऑपरेशन होने की बात कही। इसके अलावा अन्य गर्भवती महिलाओं को लेकर तीमारदार परेशान नजर आए। बड़हरापुल निवासी कृष्णा की पत्नी ने बेटी को किशुनपाली सरकारी अस्पताल में जन्म दिया था। रात 1.32 बजे नवजात बेटी की तबीयत बिगड़ने पर कृष्णा और उसकी मां उसे लेकर आईं और एसएनसीयू में भर्ती कराया।
बिहार के विजयीपुर निवासी अंजुमन आरा के नवजात बेटे की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे लेकर रात को एसएनसीयू पहुंचे। वहां मौजूद स्टाफ नर्स ने बच्चे को भर्ती कर लिया। डॉक्टर के आने की बात तीमारदार ने पूछी तो स्टाफ नर्स भड़क गई और बोली कि सुबह डॉक्टर आएंगे, ज्यादा परेशान करोगे तो इसी समय बच्चे को रेफर कर देंगे। 1.40 बजे मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन पुरुष और महिला वार्ड में कोई स्टाफ नर्स नहीं थी। ड्यूटी के बजाय सभी सोने चली गई थीं। कई मरीज परेशान दिखे। इमरजेंसी में सलेमपुर के उरदौली निवासी गोली लगने से जख्मी ममता को पुलिस 2 बजे लेकर जब इमरजेंसी पहुंची तो डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की हलचल बढ़ी, नहीं तो इसके पूर्व इमरजेंसी में बिना एप्रेन पहने सिर्फ एक डॉक्टर ही मरीजों का इलाज करते नजर आए।
भाटपाररानी के सिकरहटा गांव निवासी 60 वर्षीय रामसुरेश को सांस की दिक्कत थी। आराम नहीं होने पर इनके भाई ऋषिदेव शर्मा से कहने गए तो डॉक्टर के पास मौजूद एक युवक ने कुछ बोला नहीं, मरीज को देख रेफर का पर्चा थमा दिया। बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाने में असमर्थ ऋषिदेव ने बताया कि एक व्यक्ति के कहने पर उसके बताए निजी अस्पताल में लेकर जा रहा हूं। मरीजों की तकलीफ से परेशान तीमारदार और ऊपर से स्वास्थ्यकर्मियों के इस रवैये के चलते दलालों की बल्ले-बल्ले है।
विज्ञापन

-
सो रही स्टाफ नर्स से हुई बहस
मेडिकल कॉलेज की पुराने बिल्डिंग में संचालित पीआईसीयू वार्ड में रात को 12.20 बजे झीरूआ चौराहा निवासी छोटेलाल अपनी नौ वर्षीय पोती आराध्या को लेकर पहुंचे, उसे तेज बुखार था। पीआईसीयू वार्ड में स्टाफ नर्सों ने भर्ती कर लिया। दो बजे ग्लूकोज खत्म हो गया, तो घर वाले सो रही स्टाफ नर्स से बोले तो वह नाराज हो गई। कहासुनी के बाद दूसरी ग्लूकोज की बोतल लगाई। छोटेलाल और इनके साथ आए युवकों ने स्टाफ नर्स पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए रात को स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी की मांग की।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें