-मेडिकल कॉलेज में डाॅक्टरों की दूसरे दिन भी हड़ताल, मरीज परेशान
- रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास धरना-प्रदर्शन कर की नारेबाजी
- आंशिक रूप से चली ओपीडी, गेट से ही लौट जा रहे थे मरीज
- छात्रों ने नुक्कड़ नाटक के जरिए दर्दनाक घटना प्रस्तुत किया
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। कोलकाता में डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या के विरोध में मेडिकल कॉलेज में दूसरे दिन शनिवार को भी अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रही। जूनियर डॉक्टरों व छात्रों ने मुख्य गेट पर धरना-प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। उन्होंने आरोपियों को फांसी की सजा दिए जाने और डॉक्टरों को सुरक्षा देने की मांग की। इसका ओपीडी पर असर रहा।
प्राचार्य के निर्देश के बाद आंशिक रूप से चली। डॉक्टर चैंबर में बैठे, लेकिन काफी कम संख्या में मरीज पहुंचे। मात्र 547 मरीजों ने ही इलाज कराया। केवल इमरजेंसी सेवा चालू रही। आईएमए ने भी आंदोलन का समर्थन किया। प्राइवेट डॉक्टर क्लीनिक, अस्पताल बंद रखे और सुभाष चौक पर प्रदर्शन कर नारेबाजी किए। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा और बर्खास्त करने की तथा आरोपियों को सख्त सजा देने के साथ डॉक्टरों के सुरक्षा की मांग की। डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज परेशान रहे।
कोलकाता की घटना को लेकर डॉक्टरों और एमबीबीएस के छात्रों में आक्रोश है। महिला डॉक्टर के साथ हुई हृदय विदारक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना के विरोध में फेडरेशन आफ रेजिडेंट एसोसिएशन, यूनाइटेड डॉक्टर फ्रंट एसोसिएशन के आह्वान पर चल रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन के समर्थन में मेडिकल कॉलेज में रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन व अन्य संगठनों सहित छात्रों का आंदोलन शनिवार को भी जारी रहा। सुबह डॉक्टर व छात्र प्रशासनिक भवन से ओपीडी में पहुंचे और नारेबाजी करने लगे। पर्ची काउंटर चल रहा था, जिसे करीब साढ़े बजे बंद करा दिए। कंसल्टेंट डॉक्टर वार्ड में राउंड लेने के बाद चैंबर में पहुंचे थे, लेकिन मरीज नहीं आए थे।
इसी बीच प्राचार्य डॉ. राजेश बरनवाल, सीएमएस डॉ. एचके मिश्रा, प्रभारी मुख्य अधीक्षक डॉ. अजीत पाल, डॉ. प्रदीप गुप्ता, डॉ. अजय यादव, डॉ. राकेश कुमार के साथ ओपीडी का निरीक्षण किए, जिस चैंबर में डॉक्टर नहीं थे उन्हें आकर बैठने और पर्ची काउंटर चालू करने के निर्देश दिए गए, जो मरीज पहुंच रहा था उनका इलाज किया गया। कुल मात्र 547 रजिस्ट्रेशन ही हुआ। उधर जूनियर डॉक्टर व छात्र मुख्य गेट के बीच में हैवानियत की शिकार महिला डॉक्टर की तस्वीर रख कर फर्श पर ही धरने पर बैठ गए। वक्ताओं ने कहा कि कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ हुई घटना हृदय विदारक है। जबकि कॉलेज परिसर में अराजकतत्वों द्वारा तोड़फोड़ घटना दुस्साहसिक है। घटना की तह तक जांच की जाए।
इसमें शामिल आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी कर उन्हें फांसी की सजा दी जाए। डॉक्टरों के सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। डॉक्टर सुरक्षा सेल का गठन कर कार्यस्थल की सुरक्षा को चुस्त-दुरुस्त किया जाए, जो ऑन एवं ऑफ ड्यूटी डॉक्टर को सुरक्षा प्रदान करने के लिए जिम्मेदार हो। साथ ही मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गई। ओपीडी का समय समाप्त होने के बाद आंदोलनकारी धूप में इमरजेंसी के पास पहुंचे, जहां नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। इसमें घटना का रूपांतरण किया गया। प्राचार्य डॉ. राजेश बरनवाल, सीएमएस डॉ. एचके मिश्रा, प्रभारी मुख्य अधीक्षक डॉ. अजीत पाल, डॉ. आरके श्रीवास्तव, संगठन के अध्यक्ष डॉ. मो. ताहिर, उपाध्यक्ष डॉ. आशुतोष प्रताप सिंह, कोषाध्यक्ष डॉ. पवन कुमार, डॉ. कौशिक मिश्रा, डाॅ. प्रिया शर्मा, डॉ. अमन, डॉ. रोहित, डॉ. शुभम, डॉ. प्रतिभा, डॉ. शिवम, डॉ. जवाहर, डॉ. सुशील, डॉ. आकांक्षा, डॉ. निहारिका, डॉ. विमल, डॉ. शशांक आदि मौजूद रहे।
आईएमए ने आंदोलन का किया समर्थन, ओपीडी बंद कर किया प्रदर्शन
देवरिया। कोलकाता की घटना के विरोध में आईएमए भी उतर आया है। शहर के सभी प्राइवेट डॉक्टरों ने अपना क्लीनिक बंद कर सुभाष चौक पर प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई व पश्चिम बंगाल सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए बर्खास्त करने की मांग की। इसके बाद मेडिकल कॉलेज पहुंचकर आंदोलन में शरीक हुए।
आईएमए से जुड़े शहर के डॉक्टर शनिवार को अपनी क्लीनिक बंद कर सुबह करीब दस बजे सुभाष चौक पर पहुंचे और जिलाध्यक्ष डॉ. जेएन पांडेय के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किए। वक्ताओं ने कहा कि निर्दयता पूर्वक घटना को अंजाम दिया गया है। दरिंदों को फांसी की सजा दी जाए। घटना के बाद अराजकतत्वों द्वारा तोड़फोड़ की गई और साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया। यह सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ, जो शर्मनाक है। आरोप लगाया गया कि इसके लिए सरकार भी दोषी है। सरकार में बैठे कुछ लोग दोषियों को बचाने में लगे हैं। ऐसे में सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए। साथ ही डॉक्टरों के सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। इसके बाद कुछ लोग मेडिकल कॉलेज पहुंच आंदोलन का समर्थन कर उसमें शामिल हुए। इस दौरान डॉ. विपिन बिहार शुक्ला, फिजियोथेरेपिस्ट संघ के डॉ. डीके पांडेय, डॉ. केडी द्विवेदी, डॉ. सौरभ बरनवाल, डॉ. राजीव सिंह, डॉ. रणधीर सिंह, डॉ. पवन अरोरा, डॉ. वरेश नागरथ, डॉ. असफाक आलम, डॉ. मनीष तिवारी, डॉ. नवेंदु राय, डॉ. पवन त्रिपाठी, डॉ. श्वेता त्रिपाठी, डॉ. अभिषेक सिंह, डॉ. अनोखी शाह, डॉ. सुभाष गुप्ता, डॉ. अविनाश सिंह, डॉ. अनिरुद्ध सिंह, डॉ. चंद्रभान मिश्रा, डॉ. संजय मिश्रा, डॉ. जितेंद्र राय, डाॅ. अविनाश चौरसिया, डॉ. जितेंद्र मणि त्रिपाठी, डॉ. नीतीश राय, डॉ. मधुसूदन, डॉ. डीके तिवारी, डॉ. गंगा सारण तिवारी, डॉ. प्रशांत मिश्रा, डॉ. केडी मिश्रा, डॉ. नरेंद्र त्रिपाठी, डॉ. सतीश जायसवाल आदि मौजूद रहे।
ओपीडी में बैठे रहे डॉक्टर, नहीं आए मरीज
कोलकाता की घटना को लेकर आंदोलन से मरीजों को दिक्कत न हो, इसके लिए प्राचार्य डॉ. राजेश बरनवाल ने भ्रमण कर ओपीडी में डॉक्टरों के बैठने का निर्देश दिया। इसके बाद नेत्र विभाग में डॉ. कन्हैया, डॉ. अदिती, ईएनटी में डॉ. प्रदीप गुप्ता, मेडिसिन में डॉ. विजय गुप्ता, डॉ. सराजुद्दीन, डॉ. निखिलेश मिश्रा, आर्थों में डॉ. विकास मित्तल, मानसिक में डॉ. अंबु पांडेय, चेस्ट व टीबी में डॉ. अनुराग शुक्ला, चर्म रोग में डॉ. सुधा, बाल रोग में डॉ. रवि गुप्ता, गायनी में डॉ. शिप्रा पांडेय बैठी थीं, लेकिन काफी कम संख्या में पहुंचे। डॉक्टरों ने कुछ मरीजों का इलाज किया, लेकिन अधिकांश मरीजों को गेट से ही वापस लौट गए। ओपीडी में जूनियर डॉक्टर व छात्र मरीजों से दूसरे दिन आने की बात कह वापस कर दिए। उधर पैथोलाॅजी, एक्स-रे, सीटी स्कैन केंद्र पर भी भर्ती व इमरजेंसी के मरीज ही पहुंचे।