कंसल्टेंट एजेंसी की लापरवाही के कारण मूर्त रूप नहीं ले पा रही योजना, भवन का नक्शा पास कराने में भी दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। महायोजना 2031 आपत्तियों के बीच में फंसकर तीन माह लेट हो गई है। इस कारण शहर के विकास की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। कंसल्टेंट एजेंसी की लापरवाही के कारण यह योजना धरातल पर नहीं उतर पा रही है। हालत यह है कि इसके पेंच में फंसने के कारण लोगों को भवन का नक्शा पास कराने में भी दिक्कतें आ रही हैं। कई ऐसे क्षेत्र हैं, जो लोग पहले आवास बनाने के लिए ले चुके हैं, वह क्षेत्र अब हरित और कार्मिशयल के रूप में चिह्नित हो गया है। इसके चलते उनके मकान के मानचित्र स्वीकृत होने के पहले ही निरस्त हो जा रहे हैं। विनियमित क्षेत्र की महायोजना-2031 एक जनवरी 2023 को ही लागू हो जानी थी। इसकी खामियों को दूर करने के लिए जून 2022 में आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। करीब 532 लोगों ने अपनी-अपनी बात रखी है। इस पर जिलाधिकारी की समिति ने नवंबर माह के अंतिम सप्ताह में आपत्तियों और सुझावों को सुनकर कंसल्टेंट कंपनी स्टेसलिस्ट सिस्टम लिमिटेड कोलकाता को नए तरीके से मानचित्र सहित अन्य कार्य करने के लिए सौंप दिया। पर हालत यह है कि तीन माह का समय बीतने वाला है, लेकिन कंसल्टेंट एजेंसी ने आपत्तियों का निराकरण भी नहीं किया और न ही सुझाव पर विचार किया है।
इसका असर यह है कि शहर में होने वाले विकास कार्य सुस्त पड़ गए हैैं। मास्टर प्लान के क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों का नया नक्शा पास नहीं हो पा रहा है। नियत प्राधिकारी कार्यालय में मानचित्र जमा करने वाले जुलाई 2022 से 15 मार्च 2023 तक हर माह 40 से 50 मानचित्र आवेदन को निरस्त किया गया है। करीब चार सौ मानचित्र के आवेदन निरस्त किए गए हैं। वहीं 205 मानचित्र लंबित पड़े हुए हैं। इसके चलते भूमि स्वामी अपना भवन नहीं बना पा रहे हैं।
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ये होने हैं विकास
महायोजना में बैतालपुर से रुद्रपुर जाने वाले मार्ग तक और बैतालपुर से कसया मार्ग तक दो बाईपास सड़कों का निर्माण कराया जाना है। साथ ही 34 से अधिक सड़कों का चौड़ीकरण और 45 नई सड़कों का निर्माण, नए पार्कों, आवासीय कॉलोनियां, व्यावसायिक भवन, औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाना है। इसके अलावा जलभराव से निजात दिलाने के लिए प्राकृतिक जल संसाधन जैसे तालाब और पोखरा के विकास, ड्रेनेज, सीवरेज, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान बनाया जाना है।
4.50 लाख शहरी आबादी को ध्यान में रखकर बनाया गया है प्लान
महायोजना 2031 को 4.50 लाख शहर की आबादी का ख्याल करते हुए बनाया गया है। इसमें करीब साढ़े चार हजार हेक्टेयर भू-क्षेत्र चिह्नित किया गया है। विकसित क्षेत्र का दायरा बढ़कर इस समय शहर के पास स्थित 71 राजस्व गांवों को भी शामिल किया गया है। ऐसे कई क्षेत्र जहां पर, हरित क्षेत्र, व्यावसायिक, गोदाम और अन्य कार्य के लिए भूमि के उपयोग का प्रस्ताव है। इन जगहों पर पहले से भूमि लेने वालों के सामने अब नई मुसीबत खड़ी हो गई है।
कोट
महायोजना लागू न होने से मानचित्र स्वीकृति कराने में देरी हो रही है। सबसे अधिक समस्या उन लोगों के सामने खड़ी हो गई है, जिन लोगों ने पहले भूमि ले लिया था। बाद में चलकर वह क्षेत्र दूसरे कार्य के उपयोग के लिए घोषित कर दिया गया है। हालांकि शासन का एक आदेश है कि अगर कोई पुरानी आबादी क्षेत्र में एक हजार स्क्वायर फीट से कम एरिया में आवासीय भवन बनवाता है तो उसे नक्शा पास कराने की जरूरत नहीं है। इसके बाद भी इन क्षेत्रों में बिना नक्शा के भवन नहीं बन पा रहे हैं।
बीडी पाठक, मानचित्रकार
कोट
कंसल्टेंट एजेंसी ने आपत्तियों का निराकरण नहीं किया है। इसके चलते देरी हुई है। एजेंसी पर कार्रवाई के लिए पत्र भेजा जा चुका है। महायोजन में जो क्षेत्र जिस कार्य के लिए चिह्नित है, वह मानचित्र पास किया जाएगा।
एके ओझा, जेई नियत प्राधिकारी
कोट
करीब छह माह पहले मानचित्र स्वीकृति के लिए दिया हूं, लेकिन अभी तक स्वीकृत नहीं हो पाई है। कार्यालय जाने पर पता चलता है कि जब तक महायोजना का संशोधित मानचित्र नहीं आ जाएगा, तब तक नक्शा नहीं पास होगा। इससे निर्माण नहीं हो पा रहा है।
अमिताभ सिन्हा, आवेदक