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राजस्व अभिलेखागार से 35 गांवों के नक्शे गायब

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राजस्व अभिलेखागार से 35 गांवों के नक्शे गायब
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280 गांवों के 293 मानचित्र रख-रखाव के अभाव में नष्ट, डिजिटलाइजेशन कार्य नहीं हो पा रहा
2178 गांवों के कुल 2258 भू नक्शे हैं
1965 भू नक्शे अभिलेखागार में उपलब्ध
1570 का आरओआर लिंकिंग सत्यापन हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। राजस्व अभिलेखागार से 35 गांवों के नक्शे गायब हो गए हैं। इससे गांवों में भूमि विवाद के मामले नहीं सुलझ पा रहे हैं। इतना ही नहीं जनपद के 280 गांवों के 293 मानचित्र रख-रखाव के अभाव में फटकर नष्ट हो गए हैं। इस कारण इनका डिजिटलाइजेशन कार्य नहीं हो पा रहा है।
जिले के 2178 ग्रामों में 2258 भू-नक्शे हैं। शासन ने भू नक्शों को डिजिटलाइज्ड करने की कवायद चार साल पहले शुरू की थी। यह अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। 1898 गांवों के 1965 भू-नक्शे राजस्व अभिलेखागार में उपलब्ध हैं। इनको डिजिटलाइज्ड किया जा चुका है। तहसीलों के माध्यम से 1570 का आरओआर लिंकिंग का सत्यापन भी हो चुका है। दो गांव चकबंदी की सर्वे प्रक्रिया में हैं तो 11 गांवों में चकबंदी का कार्य किया जा रहा है। आठ गांव गैर आबाद हैं।
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भाटपाररानी के 228, बरहज के 239 व रुद्रपुर के 136 गांवों का सत्यापन किया जाना बाकी है। डिजिटलाइज्ड भू-नक्शों में खामियां मिल रही हैं। कई गांवों में सड़क, आबादी की भूमि गायब है तो कहीं गाटा संख्या व अन्य जानकारियां गलत अंकित हैं। देखरेख के अभाव में 293 गांवों के मानचित्र गंदे और कुछ के दीमक चाट जाने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। वहीं, 35 गांवों का नक्शा नहीं मिल रहा है।
विभागीय सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो काफी समय पहले से अभिलेखागार में कुछ बाहरी लोगों की दखल होने के कारण कर्मचारियों की मिलीभगत से बड़ा खेल किया गया है। इसका नतीजा इस समय ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। उनको अपने गांव का नक्शा लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कोट
1900 गांवों का डिजिटलाइजेशन का कार्य पूरा हो गया है। जिन गांवों के मानचित्र अस्पष्ट हो गए हैं या जहां के नहीं मिल रहे हैं, उसके लिए उनको उपलब्ध कराने के लिए राजस्व परिषद से लिखा-पढ़ी की जा रही है।
-अमृतलाल बिंद, मुख्य राजस्व अधिकारी
कोट
कई गांवों का नक्शा कई वर्षों से गायब है। नक्शे की नकल लेने में पसीना छूट जा रहा है। इसको लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं है। दूर-दराज गांवों से आने वाले लोगों को परेशान होकर लौट जाना पड़ रहा है। इस समस्या का निदान होना चाहिए।
-बृज बांके तिवारी, अध्यक्ष कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन
कोट
नक्शे के नकल लिए दो माह पहले प्रार्थनापत्र दिया था लेकिन अभी तक नहीं मिला है। संपर्क करने में पता चला कि रुद्रपुर के सिलहटा गांव का नक्शा रिकॉर्ड रूम में नहीं है। लेखपाल के पास का मानचित्र भी फटा है। इससे परेशान होना पड़ रहा है।
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-अजयानंद पांडेय, पूर्व सचिव, कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन
कोट
नक्शा गायब होने के बारे में पत्रक भी जिम्मेदार अधिकारियों को दिया गया है। नक्शे की नकल पाने के लिए दौड़ लगा कर थक जाते हैं। जिन गांवों के नक्शे नहीं मिल रहे हैं, वहां के लिए व्यवस्था होनी चाहिए। इससे भूमि विवाद बढ़ रहे हैं।
-संजय मिश्र, उपाध्यक्ष कलेक्ट्रेट बार एसोसिशन
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