भटनी। शराब तस्करों को पकड़ने के लिए लगाए गए बैरियर में बदमाशों ने स्कॉर्पियो से टक्कर मारी तो उसकी चपेट में सिपाही महानंद भी आ गए। बैरियर के रूप में लगाई गई पाइप आकर महानंद के सिर पर लगी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर से खून की धार बह रही थी लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने देखा कि स्कार्पियो सवार पहिए में फंसे बैरियर को निकालकर गाड़ी लेकर भागने की फिराक में हैं। इसपर उन्होंने हिम्मत जुटाई और होमगार्ड के साथ मिलकर स्कार्पियो सवारों को पकड़ लिया। सिपाही के जज्बे को देख गाड़ी में बैठे अन्य लोग वाहन छोड़कर भाग गए।
महानंद की हिम्मत की कहानी होमगार्ड शशिभूषण पांडेय थाने में पुलिसकर्मियों को दिनभर बताते रहे। थाने के पुलिसकर्मियों ने बताया कि महानंद बहुत ही मिलनसार और बहादुर थे। उन्होंने अपने साहस से कई बार पुलिस के सफल ऑपरेशन में महती भूमिका निभाई थी। पर मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में इलाज के दौरान वह जिंदगी और मौत की जंग हार गए। देर शाम जब सिपाही के शव को पुलिस लाइन में साथियों ने अंतिम विदाई दी तो सबकी आंखें नम हो गईं। एसपी संकल्प शर्मा, एएसपी राजेश कुमार, सीओ श्रीयश त्रिपाठी ने शव को कंधा दिया।
माता-पिता की इकलौती संतान थे महानंद
भटनी। गाजीपुर के हरि वल्लमपुर गांव निवासी सिपाही महानंद मां-पिता की इकलौता संतान थे। पिता दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते हैं। जबकि घर पर मां और पत्नी पूजा, सात वर्षीय बेटे के साथ रहती हैं। घरवालों ने बताया कि पुलिस की नौकरी करने के साथ ही महानंद घर की भी देखभाल करते थे। पिता के बाहर रहने के चलते खेती-किसानी और अन्य जिम्मेदारी भी महानंद ही निभाते थे। देवरिया स्थित पुलिस लाइन में ड्यूटी करने के बाद सोमवार को भटनी थाने में ड्यूटी ज्वाइन की थी। उन्होंने पत्नी से जल्द घर आने की बात कही थी। इकलौते बेटे को भी उन्होंने जल्द मिलने का भरोसा दिलाया था। लेकिन, नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। महानंद की मौत की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री के गांव का है स्कॉर्पियो का मालिक
भटनी। जिस स्कॉर्पियो से घटना हुई है उसका मालिक विजय माझी है, जो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के गांव गोपालगंज जनपद के फुलवरिया का रहने वाला है। पुलिस वाहन स्वामी का कुंडली खंगाल रही है कि उसका आपराधिक इतिहास है या नहीं।
राहगीरों ने पुलिस को दी महानंद के घायल होने की सूचना
भटनी। तस्करों के गाड़ी से घायल महानंद घंटों खून से लतपथ सड़क पर होमगार्ड के बाहों में जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे थे, तभी किसी काम से निकले बाइक सवारों की नजर सिपाही और होमगार्ड पर पड़ी। राहगीरों ने इसकी सूचना घांटी बाजार पुलिस चौकी पर इसकी जानकारी दी। तब जाकर पुलिस को इसकी जानकारी हुई और महानंद को इलाज के लिए ले जाया गया। उनकी मौत की जानकारी होने के बाद जिले के पुलिस कर्मियों में शोक की लहर दौड़ गई। एसपी, एएसपी, सीओ, एसओ आदि ने घटना पर दुःख व्यक्त किया है।
बिहार और यूपी में तस्करों के नेटवर्क हैं मजबूत
देवरिया। यूपी और बिहार के तस्करों का गठजोड़ खाकी पर भारी पड़ रहा है। लाख प्रयास के बाद भी तस्करों का नेटवर्क ध्वस्त नहीं हो पा रहा है। बरामदगी पर गौर किया जाए तो जिले की पुलिस दो साल के भीतर 40 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध शराब और वाहन बरामद कर चुकी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार शराब के तस्करों का नेटवर्क दिल्ली, हरियाणा, यूपी के विभिन्न जनपदों सहित बिहार तक फैला हुआ है। ये बिहार में शराबबंदी का फायदा उठाकर तस्करी का खेल कर रहे हैं। हर माह जिले की पुलिस को पुख्ता प्रमाण मिल रहे हैं कि शराब बिहार भेजी जा रही है। जिले के भटनी, बनकटा, खुखुंदू, मईल, लार, खामपार, श्रीरामपुर, भाटपाररानी, बरियारपुर सहित विभिन्न थानों में शराब की खेप पकड़ी जा रही है। पर सवाल यह है कि आखिर तस्करों का नेटवर्क क्यों नहीं ध्वस्त हो पा रहा है। शायद इसके पीछे कारण यह है कि सरगना पर हाथ डालने में पुलिस ठिठक जा रही है। इतना ही नहीं, शराब तस्कर लग्जरी वाहन और नए-नए तरीके इजाद कर बिहार में शराब भेज रहे हैं। कभी शौचालय सफाई करने वाले टैंकर से तो कभी चोरी के वाहन से शराब की खेप भेजते हैं। इतना ही नहीं पुलिस के खुलासे में ऐसा भी देखने को मिला है कि वाहन में ऐसी जगह शराब छिपाकर ले जाई जा रही थी कि जहां पर किसी की नजर न पड़े। यही हाल पशु तस्करों का भी है।
इससे पहले भी हो चुकी है घटना
देवरिया। दो माह पहले भाटपाररानी थाना क्षेत्र में सीओ की गाड़ी को पशु तस्करों ने टक्कर मार दी थी। दस साल पहले भाटपाररानी थाना क्षेत्र में दारोगा यूपी सिंह को पशु तस्करों ने कुचल दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। इसके कारण पुलिस कर्मी भी डरने लगे हैं। राह में जो आता है उसकी जान लेने से भी तस्कर पीछे नहीं हट रहे हैं। संवाद