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Deoria News: इश्क तो कहीं दौलत के नशे में जीवन तबाह कर रहे रंगबाज

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गलत संगत में रास्ते से भटके प्यार में बन गए लुटेरे और कातिल, बर्बाद कर लिया कॅरियर
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जवानी में रंगबाजी का शौक कोई नई बात नहीं है। मगर कुछ दिनों की इस हनक के चक्कर में युवाओं का जीवन इस कदर तबाह हो जाता है कि दोबारा संभल नहीं पाता। दोस्तों की मंडली में रंगबाजी चाहे किसी को प्रेमजाल में फंसा कर अंदाज दिखाने की हो या शान-वो-शौकत के लिए गलत ढंग से दौलत कमाने की। दोनों ही दशा में अंजाम खतरनाक होता है। कोई किस्मत से बच जाए तो बात और है पर अधिकतर मामलों में जेल की सलाखों के पीछे ही नजर आते हैं। ऐसे ही कई रंगबाज पुलिस के हाथ चढ़े हैं। इनमें गलत ढंग से पैसा कमाने तो कोई प्रेमजाल में फंस कर हत्यारा बन गया। कइयों को महंगे कपड़े और शराब की लत ने भी लुटेरा बना दिया है।
ऐसे रंगबाज जब पुलिस के हाथ लग जाते हैं और कानूनी कार्रवाई में फंसते हैं तो उनके सामने पछताने के सिवाय कुछ नहीं रहता। माता-पिता भी अपने लाल की करतूत से शर्मिंदगी महसूस करते हैं। जिले के कई ऐसे युवा हैं, जिनके माता-पिता अच्छे स्कूल में नाम लिखवाए और सोचे थे कि बेटा बड़ा अफसर बनेगा, लेकिन वह कुसंगत में आकर गलत राह पकड़ लिया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और कैरियर ही बर्बाद हो गया। फंसने के बाद जीवन ही तबाह हो गया। यहां तक कि एक मामले में तो नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा है। जानिए कुछ ऐसे ही युवाओं का बुरा हश्र।
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केस- एक
- समाज कल्याण विभाग में करता था नौकरी, बना लिया चेन स्नेचिंग गिरोह जिले के भटवलिया निवासी वरुण कुमार समाज कल्याण निगम बलिया में वसूली सहायक के पद पर कार्यरत था। उसने रामनाथ देवरिया मोहल्ला निवासी अनूप तिवारी, भटवलिया निवासी शांतनु द्विवेदी, डुमरी निवासी आलोक वर्मा के साथ मिलकर चेन स्नेचिंग का गिरोह बना लिया। उसने पूर्वांचल के कई जनपदों में घटनाओं को अंजाम दिया। इस गिरोह के सभी सदस्य स्नातक की पढ़ाई किए थे। पकड़े जाने पर बताया कि महंगे कपड़े और दोस्ती निभाने के चक्कर में रुपये की जरूरत थी, जिस कारण गलत रास्ते पर चल पड़े। शराब की भी लत पड़ गई।

केस-दो
बनना था सिपाही, प्रेमजाल में फंसकर बन गया कातिल गौरीबाजार निवासी कुख्यात कामेश्वर उर्फ डब्लू ने प्रेमिका के लिए 23 अप्रैल 2017 को उसके पति विवेक सिंह की हत्या कर दी। इसने तो बड़े ही चालाकी से हत्या को हादसे में बदलने का भी प्रयास किया था। डब्लू पढ़-लिखकर सिपाही की नौकरी करना चाहता था। पिता के अरमान थे कि बड़ा भाई सिपाही बन गया है तो छोटा भी सिपाही बन जाए, लेकिन प्रेेमजाल के चलते क्राइम के दलदल में फंस गया।
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केस-तीन
बीयर और शराब की पड़ी लत तो बन गए लुटेरा
थाना सुरौली क्षेत्र में फाइनेंस कर्मी संतोष भारती से 84 लूट की घटना को अंजाम देने वाले बदमाशों ने पकड़े जाने के बाद खुलासा किया कि वह शराब पीने के लिए पैसे कम पड़ रहे थे, इसके कारण वह लूट की वारदात को अंजाम दिए थे। पकड़े गए आरोपी हनुमान बारीडीहा, विशाल यादव जंगल परसा, अभिषेक बैदा कुंवर, विकास चौहान बढ़या बुजुर्ग बाइक के शौकीन हैं। सभी बीयर और शराब के चक्कर में रंगबाजी करते थे। पकड़े जाने के बाद पुलिस ने उन पर लूट का केस दर्ज किया है।

कोट:
- घटना के खुलासे में कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जिसमें आरोपी पहली बार घटना कारित किया होता है। अच्छे परिवार से तालुक रखते हैं। अधिकतर मामलों में यह देखने को मिला है कि तेजी से धनवान होने के चक्कर में गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं। कुसंगत में पड़कर वह घटना को अंजाम दे देते हैं। संकल्प शर्मा एसपी
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युवा के संगत के प्रति अभिभावकों की उदासीनता बढ़ रही है। परिवार में बहुत कठोर और बहुत नरम अनुशासन होना भी नुकसानदायक है। वर्तमान में जो नया ट्रेंड आया है, खुद को दिखाने और सिद्ध करने की। ऐसी अवस्था में वह सही और गलत का निर्णय भी नहीं ले पाता, इससे युवा ऐसे तरीके अपना लेते हैं, जिसे समाज मान्यता नहीं देता। सबसे जरूरी है परिवेश को बेहतर करना।
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डॉ. विवेक मिश्र, समाजशास्त्री

युवा पीढ़ी में नशाखोरी की प्रवृत्ति खूब बढ़ी है। युवावस्था में शारीरिक क्षमता सबसे बेहतर होती है। वर्तमान परिवेश उसे बार-बार दिग्भ्रमित करता है। सोशल मीडिया भी इसमें एक बड़ा कारण बन रहा है। ध्यान नहीं देने का कारण है कि उसकी तार्किक क्षमता कमजोर हो रही है। जो ऊर्जा समाज को बेहतर बनाने के लिए लगना चाहिए, ऐसे में वह नकारात्मकता की ओर लग रही है। अभिभावकों को यह ध्यान देना होगा बच्चा किसके साथ जा रहा है, रह रहा है और उसकी संगत कैसी है। समाज के बेहतरी के लिए दंड की व्यवस्था बहुत जरूरी है।
डॉ. नाजिश बानो, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान, संत विनोबा पीजी कॉलेज
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