- निर्दल और बसपाइयों का रहा है दबदबा
बरहज। नगर निकाय चुनाव में अध्यक्ष सीट पर अब तक एक बार कमल का फूल खिला है। गौरा-बरहज सीट पर निर्दलीय और बसपा प्रत्याशियों का दबदबा रहा है, लेकिन समाजवादी पार्टी अपना खाता नहीं खोल सकी है।
निकाय चुनाव के आने वाले परिणाम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इस बार के मतदाताओं में खामोशी और हार-जीत के परिणाम को लेकर प्रत्याशियों में पशोपेश की स्थिति बनी हुई है। हालांकि हर एक प्रत्याशी अपनी जीत का दावा पेश कर रहा है। चुनाव में 25 केंद्रों के 49 बूथों पर 41 हजार 662 में करीब 25 हजार 200 मतदाताओं ने प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला किया है। जिसकी 13 मई को गणना की जानी है।
गौरा-बरहज नगरपालिका में अध्यक्ष की सीट पर 1995 में अनुराधा सोनकर ने भाजपा से एक बार कमल खिला है। 2006 में भाजपा से अजीत जायसवाल करीब 6200 मत पाकर दूसरे स्थान पर थे, लेकिन इसके बाद नगरपालिका चुनाव में पार्टी का जनाधार खिसका है। वर्ष 2000 में गोरख निषाद की पत्नी कमला निषाद 605 मत पाकर पांचवें, 2012 में नायाब हुसैन 1100 मत पाकर पांचवें और 2017 में अरविंद जायसवाल 2141 मत पाकर चौथे स्थान पर थे। पूर्व की स्थिति को देखते हुए इस बार के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अमरेंद्र गुप्त की जीत को लेकर पार्टी के दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।
हालांकि जहां समाजवादी पार्टी से अनूप मद्धेशिया खाता खोलने की फिराक में हैं। वहीं श्याम जायसवाल की पत्नी श्वेता और निर्दलीय प्रत्याशी अजीत जायसवाल की पत्नी तारा देवी वर्चस्व कायम रखने की जुगत में हैं। वहीं देखा जाए तो इस सीट पर बसपा और निर्दलीय प्रत्याशियों का पूर्व में दबदबा रहा है। भलुअनी और मदनपुर में भी नगर पंचायत चुनाव में कांटे का मुकाबला देखने को मिला है।