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Deoria News: अयोध्या की तरह टीकर के 100 वर्ष पुराने मंदिर में भी विराजेंगे प्रभु श्रीराम

Sat, 20 Jan 2024 12:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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सेवानिवृत्त वाइस चांसलर ने जनसहयोग से कराया मंदिर का जीर्णोद्धार
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बरहज के टीकर में तैयारी जोर-शोर पर, 22 जनवरी को होगी प्राण-प्रतिष्ठा
पहले झोपड़ी रहते थे अब बाबा इंद्रमणि धाम के भव्य मंदिर में विराजेंगे प्रभु श्रीराम

बरहज(देवरिया)। अयोध्या की तरह 22 जनवरी को टीकर गांव स्थित बाबा इंद्रमणि धाम के नवनिर्मित भव्य मंदिर में प्रभु श्रीराम की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। घास-फूस और मिट्टी की झोपड़ी से निकलकर प्रभु श्रीराम अब मंदिर में विराजमान होंगे। जहां रामदरबार की मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा कराई जाएगी। इसको लेकर तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में अब तक 1500 लोगों को निमंत्रण भेजा जा चुका है।
टीकर गांव निवासी और मुरादाबाद के इंडियन फाॅरेन टेक्निकल डीम्ड यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रहे डॉ.ऋषिमुनी दूबे ने जनसहयोग से बाबा इंद्रमणि धाम में भव्य मंदिर का निर्माण कराया है। डॉ.दूबे ने बताया कि बाबा इंद्रमणि की प्रेरणा से मेहनत की कमाई और लोगों के जनसहयोग से 2010-11 में मंदिर की नींव रखी गई थी। जो अब पूरी तरह बनकर तैयार है। 22 जनवरी के मुहूर्त को लोग संयोग मानते हुए ऐतिहासिक पल बता रहे हैं। बैकुंठपुर के डॉ.अखिलेश और वाराणसी के चार अन्य विद्वानों के नेतृत्व में मंदिर में राम-लक्ष्मण, जानकी और हनुमानजी की मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा कराई जाएगी।
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इससे पहले विभिन्न आयोजन होंगे। इसमें 20 जनवरी को कलश यात्रा, 21 को मूर्तियों का भ्रमण और 22 जनवरी को विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। इसमें करीब पांच हजार लोगों के जुटने संभावना जताई जा रही है। प्राण प्रतिष्ठा को लेकर लगातार अनुष्ठान चल रहा है। संवाद
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इंसेट-झोपड़ी में प्रभु की आराधना करते थे बाबा इंद्रमणि
बरहज। बाबा इंद्रमणि टीकर गांव में झोपड़ी में प्रभु का पूजा-अर्चन करते थे। करीब डेढ़ एकड़ में विस्तारित इंद्रमणि धाम में भव्य मंदिर निर्माण हुआ हुआ है। गांव के 92 वर्षीय सुदामा दूबे, 88 वर्षीय भोला, 85 वर्षीय छेदी गुप्त, 90 वर्षीय सुशीला देवी, 86 वर्षीय कालिंदी गोंड आदि का कहना है कि इंद्रमणि धाम पर रामनवमी के आखिरी तीन दिन रामकथा और रामचरित मानस का पाठ होता है। श्रावण मास में पूरे माह मेले जैसा माहौल रहता है। यहां दूर-दूर से लोग पूजा-अर्चन के लिए आते हैं।
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