पूरी रात ठप रही करीब 100 गांवों की बिजली आपूर्ति
देवरिया। तेज गर्मी के दौरान बुधवार रात आंधी और बूंदाबांदी के कारण शहर से लेकर गांव तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। करीब दो घंटे के लिए शहर के अधिकांश मोहल्लों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी। जबकि जिला मुख्यालय के पास के करीब 100 गांवों की बिजली पूरी रात ठप रही है। सुबह बिजली आपूर्ति बहाल हो सकी है।
रात में करीब साढ़े ग्यारह बजे आंधी आने से अचानक बिजली आपूर्ति ठप हो गई। बूंदाबांदी के बाद फाल्ट और तार टूटने से भटवलिया उपकेंद्र से जुड़े करीब 30 गांवों की बिजली आपूर्ति पूरी रात बाधित रही। रामलीला मैदान उपकेंद्र से जुड़े देवरिया खास, महारणा प्रताप कालोनी, भुजौली कालोनी, उमानगर में फाल्ट से रात में बिजली बाधित रही। करीब चार बजे टूटा तार और फाल्ट ठीक होने पर आपूर्ति बहाल हुई। शहर के पुरवा स्थित उपकेंद्र से जुड़े 70 गांवों की बिजली पूरी रात गुल रही। सुबह नौ बजे इन गांवों की बिजली आपूर्ति शुरू हुई तो लोगों ने राहत की सांस ली। इसी तरह भटनी, भाटपाररानी और सलेमपुर उपकेंद्र से जुड़े कई गांवों में बिजली आपूर्ति रात में बाधित रही। कुछ गांवों में बृहस्पतिवार को करीब 12 बजे आपूर्ति बहाल हो पाई।
स्पीकप
तेज हवा चलने से तार टूट जाते हैं। आंधी के कारण रात में बिजली आपूर्ति बाधित होने से परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह बिजली आई तो राहत मिली।
वेद प्रकाश, आईटीआई
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आंधी टूट तार दो साल हो गया लेकिन नहीं बदला गया है। जर्जर तार कब दगा दे देंगे, कोई ठीक नहीं है। रात में बिजली गायब होने से दिक्कत हुई है।
मार्कंडेय शर्मा, पईलहा
समय से तेल की जांच नही, क्षमता न बढ़ने से हर रोज फुंक रहे बीस ट्रांसफार्मर, मरम्मत पांच का
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गर्मी में ओवरलोड के कारण ट्रांसफार्मर के फुंक जाने से उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में 20 हजार ट्रांसफार्मरों में औसतन इस समय रोजाना 15 से 20 फुंक जा रहे हैं। जबकि वर्कशाप में हर रोज मरम्मत पांच से दस की हो पा रही है। इससे समय से ट्रांसफार्मर बदले नहीं जा पा रहे हैं।
गर्मी के दिनों में ओवरलोड ट्रांसफार्मर जल जा रहे हैं। इसके पीछे केवल ओवरलोड के अलावा भी अन्य कारण हैं। एक एक्सपर्ट की मानें तो पावर के अनुसार हर ट्रांसफार्मर का तेल चेंज किए जाने की अलग-अलग मियाद होती है। जनपद में लगे किसी ट्रांसफार्मर को तयशुदा समय पर रिपेयर नहीं किया जाता है। जिसका नतीजा ट्रांसफार्मर लोड या फिर स्पर्किंग में जल जाता है। जबकि निगम का कागजों में दावा है कि ट्रांसफार्मरों की जांच नियमित होती है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि मार्च और अप्रैल माह में करीब 14 सौ ट्रांसफार्मर कैसे जल गए। शहर में 35 ऐसे ट्रांसफार्मर हैं, जिनकी क्षमता बढ़ाने की योजना है, लेकिन अभी नहीं हो पाया है। इस कारण शहर देवरिया खास, रामनाथ देवरिया, सीसी रोड, आईटीआई, भुजौली काॅलोनी में एक ट्रांसफार्मर से काम न चलने पर उसके पास ही दो से तीन ट्रांसफार्मर लगाकर काम चलाया जा रहा है।
कोट
ट्रांसफार्मर जलने के बाद ऑनलाइन शिकायतें दर्ज होती हैं। इसके बाद समय से ट्रांसफार्मर बदल दिया जाता है। आंधी तेज नहीं थी, इस कारण आपूर्ति पर खास प्रभाव नहीं पड़ा है। जिन जगहों पर लोकल फाल्ट हुआ था, वहां ठीक करा दिया गया है। -जीसी यादव, अधीक्षण अभियंता