खामपार, सलेमपुर और गौरीबाजार थाने से जुड़ा है मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। लाइसेंसी पिस्टल एसओजी के लिए गले की फांस बन गई है। मजे की बात यह है कि डीएम कार्यालय से पिस्टल के बारे में दो बार में दो अलग-अलग रिपोर्ट न्यायालय को भेजा गया है। मामला खामपार, सलेमपुर और गौरीबाजार थाने से जुड़ा हुआ है। अपने बचाव में एसओजी ने तीनों थानों की पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
खुखुंदू थाना क्षेत्र के एकडंगा गांव निवासी रामप्रवेश यादव अब गौरीबाजार थाना क्षेत्र के ठाकुरपुर गांव में रहते हैं। रामप्रवेश यादव को बीते वर्ष 15 दिसंबर को एसओजी प्रभारी अनिल यादव, हेड कांस्टेबल सुदामा यादव और कांस्टेबल मेराज अहमद घर से बुलाकर खामपार थाने ले गए। वहां इनका लाइसेंसी पिस्टल, लाइसेंस, मोबाइल और फार्च्यूनर गाड़ी कब्जे में ले लिया। दो दिन बाद 17 दिसंबर को रामप्रवेश का चालान तमंचा में कर दिया गया। सक्षम न्यायालय में राम प्रवेश को पुलिस ने पेश किया। इस राम प्रवेश के अधिवक्ता ने कहा कि जिस व्यक्ति का तमंचा में चालान किया गया है, उसके नाम लाइसेंसी पिस्टल, जिसे एसओजी ने रख लिया है। इस पर निजी मुचलके पर छोड़ते हुए लाइसेंसी पिस्टल के बारे में खामपार पुलिस से आख्या मांगी। इस पर पुलिस ने आख्या में न्यायालय को बताया कि मामला गौरीबाजार थाने से संबंधित है। फिर न्यायालय ने गौरीबाजार थाना प्रभारी से 24 जनवरी को डीएम कार्यालय से रिपोर्ट लेकर कोर्ट को बताया कि इस नाम-पते से कोई लाइसेंस नहीं है। पीड़ित रामप्रवेश ने जिला सत्र न्यायालय में निगरानी दाखिल किया। 31 जनवरी को इसमें रामप्रवेश के नाम से लाइसेंस पिस्टल होने की रिपोर्ट दी गई। अब सवाल यह उठता है कि आखिर डीएम कार्यालय ने दो बार में दो तरह की रिपोर्ट क्यों दी गई है। मामले को पुलिस इस तरह से लापरवाह क्यों बनी रही। यही नहीं डीएम कार्यालय के लिपिकों ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया।