सिंचाई विभाग के डाक बंगला में तहसीलदार अलका सिंह को पैमाइस कराने का निर्देश देती राज्य मंत्री
सलेमपुर। जमुआ नंबर दो के रहने वाले नजीर की भूमि का अफसरों के निरीक्षण के बाद भूमाफिया सक्रिय हो गए हैं। शत्रु संपत्ति की सभी आराजी संख्या के लिए दलाल लगाकर ग्राहकों की तलाश करा रहे हैं। सूत्रों की माने तो भू माफिया औने-पौने दाम में भूमि बेचकर रफू चक्कर होने में लगे हैं। हालांकि इसको लेकर तहसील प्रशासन पहले ही बता चुका है कि इस नंबरों की खारिज दाखिल नहीं किया जाएगा।
तहसील क्षेत्र के जमुआ नंबर दो गांव के रहने वाले नजीर बंटवारे के समय पाकिस्तान में बस गए। उसके बाद उनकी संपत्ति पर उनका ही नाम चला आ रहा था। सुप्रीम कोर्ट के 4 अप्रैल 1988 के फैसले के मुताबिक यह जमीन शत्रु संपत्ति यानी भारत सरकार के होने का आदेश हुआ। पूरे देश में इसका पालन हुआ। लेकिन जमुआ में इसका तक पालन नहीं हुआ। नजीर की रकबा 54, 88, 105 मिजुलमा 107, 170, 202 मिजुलमा, 209 मिजुलमा पर कुछ लोग अपना नाम चढ़वाकर बेच दिया। करीब 50 से अधिक लोगों को यह जमीन बेची गई है। जिला प्रशासन को इसकी भनक लगी तो त्रिस्तरीय टीम गठित कर एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने तहसीलदार अलका सिंह हल्का लेखपाल रजनीश मिश्र के साथ पहुंची और मौके का मुआयना किया था। जिसकी खबर मिलते ही भूमाफियाओं में हड़कंप मच गया। अब आलम यह हो गया है कि जमीन हाथ से निकल न जाए इसके लिए भू माफिया तहसील से लेकर जिला मुख्यालय का चक्कर काट रहे हैं। तहसीलदार अलका सिंह ने कहा कि यह भूमि भारत सरकार की है। लेकिन अभी खतौनी में दर्ज नहीं हुई है। तहसील प्रशासन ने रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दिया है। आदेश मिलते ही शत्रु संपत्ति की भूमि को भारत सरकार के नाम से दर्ज कर लिया जाएगा। इन सभी नंबरों पर अगर कोई बैनामा लेता है, तो उसका किसी भी हाल में नाम नहीं चढ़ेगा