देवरिया। रक्षाबंधन के पर्व को लेकर ज्योतिषियों में भले ही मतभेद हो, राखियों का बाजार लोगों को लुभाने लगा है। इससे तीन साल बाद बाजार में धीरे-धीरे ही सही रौनक दिखने लगी है। राखी, मिष्ठान एवं कपड़ों की दुकानों पर महिलाएं व पुरुष जमकर खरीदारी कर रहे हैं। हालांकि ऑनलाइन खरीदारी ज्यादा होने से दुकानदार निराश हैं। राजकोट की बनी किवा राखियां बहनों को विशेषकर पसंद आ रही हैं।
रक्षाबंधन का पर्व जनपद में 30 व 31 अगस्त दोनों दिन मनाने की तैयारी चल रही है। शहर के प्रमुख बाजार में शामिल सब्जी मंडी, अंसारी रोड, मालवीय रोड, छहमुखी चौराहा आदि जगहों पर सजी राखी की दुकानों सभी के आकर्षण का केंद्र बनी हैं। बाजार में बच्चाें के लिए छोटा भीम, मोटूू-पतलू, कैप्टन अमेरिका, कृष्णा, डोरेमान व लाइट वालियां राखियां 10 से लेकर 60 रुपये तक में उपलब्ध है। इसके अलावा घड़ी, सेंटा क्लाज, बुटीक, चंदन की लकड़ी, रुद्राक्ष व चांदी की राखियां भी इस बार आई हैं। साथ ही पांच से लेकर 25 रुपये तक में सामान्य सी दिखने वाली राखियां भी हैं। जिले में ज्यादातर राखियां कोलकाता से ही आती हैं। इस बार राजकोट वाली राखियां भी आई हैं। दिल्ली से आने वाली फोम वाली राखियां इस बार कम दिख रही हैं। अंसारी रोड के फुटकर दुकानदार बुद्धिसागर व नसरूल ने बताया कि जिले में ज्यादातर राखियां कोलकाता से ही आती हैं। राजकोट से आई राखियों की क्वालिटी अच्छी है। महबूब आलम व अनस ने बताया कि अधिकतर ग्राहक ऑनलाइन ही राखी खरीद ले रहे हैं, इससे व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।
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भाभी को बांधने के लिए ननदें खरीद रहीं लुंबा
जो ननदें अपनी भाभियों को राखी बांधती हैं, उनके लिए बाजार में विशेष तरह की राखियां लुंबा आई हैं। मेटल, जेरी, बादला व मोती से बनी किवा की यह राखियां विशेष रूप से ननदों को ध्यान में रखकर ही बनाई गई हैं। बाजार में यह 35, 65 एवं 85 रुपये तक में उपलब्ध हैं।
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30 अगस्त की रात में रक्षाबंधन मनाने के पक्ष में दिख रहे आचार्य
बैकुंठपुर स्थित पवहारी संस्कृत महाविद्यालय के ज्योतिष विभाग के आचार्य पं. विवेक कुमार उपाध्याय ने बताया कि इस वर्ष पूर्णिमा का मान 30 अगस्त से आरंभ होकर 31 अगस्त के दिन सुबह छह घटी से न्यून होने के कारण तिथि को लेकर समाज में भ्रम की स्थिति बन रही है। शास्त्रों में वर्णित है कि यदि पूर्णिमा का मान दो दिन प्राप्त हो रहा हो तो तथा प्रथम दिन सूर्योदय के एकादि घटी के बाद पूर्णिमा का आरंभ होकर द्वितीय दिन पूर्णिमा छह घटी से कम प्राप्त हो रही हो तो पूर्व दिन भद्रा से रहित काल में रक्षाबंधन करना चाहिए। इस वर्ष 31 अगस्त को पूर्णिमा छह घटी से कम प्राप्त हो रही है तथा 30 अगस्त को नौ बजे तक भद्रा है। ऐसे में 30 अगस्त की रात्रि में भद्रा के बाद रक्षाबंधन मनाना श्रेयस्कर होगा।