देवरिया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान की ओर से रविवार को तरकुलवा क्षेत्र के रेशमा देवी महाविद्यालय अमवा में कृषक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें 320 किसानों ने भाग लिया। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कृषि की नई तकनीकों व वैज्ञानिक विधि से खेती की जानकारी दी।
प्रधान वैज्ञानिक आशीष कुमार ने किसानों को नए बीजों का प्रयोग और बीज शोधन के लिए प्रोत्साहित किया। कहा कि बीज शोधन और नई तकनीकी से खेती कर अधिक उपज प्राप्त की जा सकती है। साथ ही गेहूं, सरसों, मटर, मंसूर, मशरूम आदि में लगने वाले कीट एवं रोगों के प्रबंधन पर चर्चा की। दुग्ध निगम के महाप्रबंधक डॉ. इंदु भूषण सिंह ने कहा कि कृषि के साथ पशुपालन कर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. महेश राव ने संस्थान की ओर से चलाई जा रही शोध परियोजनाओं की जानकारी दी। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक मांधाता सिंह ने कहा कि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहिए। डॉ. युवराज ने जीनोम एडिटेड फसलों के बारे में जानकारी दी। किसानों को सब्जियों की बीज किट उपलब्घ कराई गई। इसमें दस तरह की नई प्रजाति की सब्जियों के बीज थे। इसके अलावा प्रमोद गुप्ता, राम प्रवेश सिंह, राकेश प्रसाद, धुरंधर गोंड, चंद्रबली सिंह सहित 16 प्रगतिशील किसानों को उन्नतिशील गेहूं बीज व आम का पौध प्रदान कर सम्मानित किया गया। संचालन चंद्रेश पांडेय ने किया।
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खेती में तकनीक का इस्तेमाल करें किसान
देवरिया। देसही देवरिया ब्लॉक परिसर में कृषि विभाग की तरफ से किसान जागरूकता गोष्ठी हुई। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती में तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया। कृषि प्रसार, निवेश तथा प्रबंधन योजना के तहत किसान जागरूकता गोष्ठी में मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि संजय तिवारी ने कहा कि परंपरागत खेती से किसान समृद्ध नहीं हो सकते। कृषि वैज्ञानिक ओमकार नाथ दुबे ने किसानों को रासायनिक खादों के प्रयोग से होने वाली हानियों से अवगत कराया। कहा कि किसान अधिक से अधिक जैविक खादों का प्रयोग करें। संचालन ब्लॉक तकनीकी मैनेजर मुन्ना लाल ने किया। इस दौरान अजय पाल सिंह उर्फ निप्पू, दिग्विजय सिंह, बीके मौर्य, श्रीकृष्ण सिंह, ध्रुव नारायण यादव, सुरेश चंद वर्मा, फूलचंद निषाद आदि मौजूद रहे।