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बेपरवाही : नगर में बढ़ रही जर्जर भवनों की संख्या

Sat, 18 Mar 2023 11:37 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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अंसारी रोड पंजाबी गली के कॉर्नर पर जर्जर भवन। संवाद
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नगर में चिह्नित 110 जर्जर मकानों को ढहाने के लिए नगर पालिका की ओर से दिए गए नोटिस पर गृह स्वामी नहीं हैं गंभीर, प्रशासन भी मौन
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- फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। नगर पालिका परिषद ने नगर में जर्जर 110 मकान चिह्नित तो कर लिए, लेकिन उन्हें ध्वस्तीकरण कराने में हीलाहवाली कर रही है। सिर्फ अफसर नोटिस देकर कार्रवाई का कोरम पूरा कर रहे हैं। करीब एक साल बीतने के बाद भी नगर पालिका ने मकानों पर बुलडोजर नहीं चलवाया। जिससे हादसा होने का भय बना है। इसी तरह जनपद के अन्य निकायों में भी जर्जर मकान चिह्नित किए गए हैं, लेकिन ढहाने का कार्य नहीं किया गया है।
जर्जर भवनों में लोग जिंदगी दांव पर लगाकर रह रहे हैं। जिम्मेदार भी नोटिस देकर बेपरवाह हो गए हैं। गंभीर बात तो यह है कि शहर में जर्जर भवन के कारण हादसा होने के बाद भी सबक नहीं लिया जा रहा है। कई ऐसे भवन हैं, जो 90 वर्ष पुराने हैं। नगर पालिका परिषद ने एक साल के भीतर नगर के 25 वार्डों में 110 भवनों को चिह्नित किया था। जिनके मकान मालिक को ढहाने का नोटिस भी दिया गया, लेकिन यह जर्जर भवन अभी उसी तरह खड़े हैं। कई ऐसे भवन हैं, जिनमें बिना सरिया वाला छत पड़ा हुआ है। नगर पालिका के सर्वे पर ध्यान दिया जाए तो गरूलपार, स्टेशन रोड, सब्जी मंडी, मालवीय रोड, बजाजी गली, पेड़ा गली, भीखमपुर रोड में यह भवन हैं। यहां तक कि कई ऐसे जर्जर मकान हैं, जिसमें दुकानें संचालित होती हैं।
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हर साल बढ़ रही है जर्जर भवनों की संख्या
देवरिया। नगर पालिका क्षेत्र में हर साल जर्जर भवनों की संख्या में इजाफा हो रहा है। 2021 में 54 भवन और 2022 में करीब 95 भवन जर्जर थे। अब इनकी संख्या इस साल 110 के करीब पहुंच गई है। नगर पालिका ने जर्जर भवनों को खाली कराने और ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस दिया, पर कार्रवाई न होने के कारण इनका मनोबल बढ़ता गया। सबसे अधिक खतरा इन भवनों में बरसात के दिनों में है।
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हो चुके हैं हादसे
- 19 सितंबर 2022 को शहर के अंसारी रोड पर एक जर्जर मकान गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसी तरह भीखमपुर रोड पर भी एक जर्जर मकान गिरने से दो लोगों की मौत हो चुकी है। अंसारी रोड पर तो जिस मकान में हादसा हुआ था, उसके आधे हिस्से में अभी भी एक व्यक्ति कब्जा जमाए हुए है।
कोट:
- कांशीराम आवास में मकान मिला है, लेकिन वहां भी हालत ठीक न होने के कारण जर्जर भवन में रहना हमारी मजबूरी है, जो आवास मिला है, वह भी मरम्मत योग्य है।
प्रभावती देवी, अंसारी रोड

- जर्जर भवन से हादसा होने के कारण हमारे भाई और दो अन्य परिजन की मौत हो गई थी। काफी दिनों से हम लोग इस मकान में रहते हैं। यह मकान हमारे जन्म से पहले का है।
मनोज कुमार, तिलक रोड

- बार-बार मना करने के बावजूद भी लोग जर्जर भवन में रहते हैं। कई बार अगल-बगल के सभी लोग मना करते हैं कि मकान गिरने वाली है, लेकिन कोई मानता ही नहीं है।
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घनश्याम कुमार, अंसारी रोड

मुकदमे के पेंच में फंस जाती है कार्रवाई
- शहर में जर्जर भवन चिह्नित किए गए हैं। इसमें रहने वाले लोगों को खाली कराने के लिए नोटिस भी दिया गया है। कुछ मकानों को लोगों ने खुद भी ध्वस्त किया है। इसके लिए अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है कि जो मकानें जर्जर और उनका मामला मकान मालिक और किराएदार के बीच विवाद के कारण न्यायालय में विचाराधीन होता है।
रोहित सिंह ईओ, नगर पालिका
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