मिनी इंडस्ट्रीयल स्टेट के कारखानों का अपशिष्ट प्रदूषित कर रहा रुद्रपुर की आबोहवा
कुर्ना नदी में जा रहा फैक्ट्री से निकला जहरीला पानी, चिमनियों से निकली राख से गांव वाले परेशान
रुद्रपुर। उसरा स्थित मिनी इंडस्ट्रीयल स्टेट में बने कारखानों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं और जहरीला पानी रुद्रपुर की आबोहवा खराब कर रहा हैं। फैक्ट्री के जहरीले पानी से नदियां प्रदूषित हो रही हैं। अपशिष्टों का प्रबंधन नहीं होने से कुर्ना नदी मछलियों का कब्रगाह बन गई है। नदी से मछलियों का शिकार कर भरण पोषण करने वाले मछुआरे बेरोजगार हो रहे हैं। शराब फैक्ट्री से निकलने वाली राख सड़क के किनारे फेकी जा रही है। इससे वायु प्रदूषण इस कदर बढ़ गया है कि दर्जनों गांवों में फेफड़े से संबंधित रोगियों का संख्या बढ़ती जा रही है।
उसरा स्थित इंडस्ट्रीयल एरिया में बनी शराब की फैक्ट्री से निकला अपशिष्ट सीधे कुर्ना नदी में जा रहा है। फैक्ट्री में अपशिष्ट ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होने से यह हानिकारक जल कुर्ना नदी से होकर गोर्रा और राप्ती नदी में गिर रहा है। यह जलीय जीवों के जीवन पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। करमेल बनरही के ग्राम प्रधान रामबिलास यादव ने बताया कि नदी से शिकार के लिए हर साल तहसील से नीलामी होती है। पिछले दो साल से यह घाटे का सौदा साबित हो रहा है। शराब फैक्ट्री का गंदा पानी नदी में छोड़ने से कुर्ना नदी से मछलियां खत्म होने के कगार पर हैं।
हालत यह है कि कुर्ना में पानी की जगह फैक्ट्री का कचरा बह रहा है। नदी से दुर्गंध उठने से आसपास के गावों के लोग परेशान है। किसान हरेंद्र सिंह त्यागी ने बताया कि शराब फैक्ट्री के प्रदूषण से दो दर्जन गांवों के लोग प्रभावित हैं। कारखाने के इर्द-गिर्द चिमनी से निकली राख से फसल पट जा रही है। फैक्ट्री के लोग राख को सड़क के किनारे फेंक दे रहे है।
क्या कहते हैं जानकार
रामजी सहाय पीजी कॉलेज भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एनके शर्मा ने बताया कि प्रदूषण से नदियों के अस्तित्व पर संकट मड़रा रहा है। कुर्ना, बथुआ, राप्ती और गोर्रा नदी रुद्रपुर की लाइफ लाइन हैं। प्रदूषण से इन नदियों का दायरा सिकुड़ रहा है। जल जीवों के जीवन पर बुरा असर पड़ रहा है। वायु प्रदूषण से जलवायु परिवर्तन पर असर पड़ रहा है। पर्यावरण के संरक्षण के लिए अपशिष्टों के उचित ट्रीटमेंट की जरूरत है।
पूर्व विधायक ने दी आंदोलन की चेतावनी
शराब फैक्ट्री से हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए सपा के पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह ने आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि किसान को अपने खेत में अपशिष्ट जलाने पर हजारों रुपये जुर्माना लगाकर जेल भेज दिया जाता है। यह नियम शराब फैक्ट्री के मालिक पर क्यों नहीं लागू हो रहा है। उसरा में अपशिष्ट ट्रीटमेंट यदि 15 दिनों के अंदर नहीं हुआ तो प्रभावित गांवों के किसानों को लेकर धरना दिया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
वर्जन
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कारखाने को एनओसी मिलती है। यदि कारखाने को प्रदूषण नियंत्रण विभाग से एनओसी नहीं मिली होगी तो कार्रवाई होगी। प्रदूषण का मामला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड देखता है। - अनिल कुमार भारती, जिला आबकारी अधिकारी