फिजां में गूंजने लगी या हुसैन..या हुसैन की सदाएं, खेल करतबों के लिए अखाड़ों को किया गया सक्रिय
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मुहर्रम के पहले दिन से ही मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में ताजियां बनाने की शुरुआत हो गई। ताजिएदारों ने ताजिए में लगने वाली झंडी, पताका और बांस की खरीदारी शुरू कर दी है। इसी के साथ सातवीं, आठवीं, नौवीं व दसवीं के जुलूस में दिखाए जाने वाले खेल करतबों के लिए भी युवाओं ने अभ्यास करना शुरू कर दिया।
शहर से लेकर देहात क्षेत्र के इलाकों में या हुसैन और हमारे हैं हुसैन की सदाओं के बीच ताजियां बननी शुरू हो गई है। अंजुमन इस्लामिया के पूर्व सदर शकील अहमद सिद्दीकी ने बताया कि इस्लाम की वका के लिए कर्बला के रेतीले मैदान में शहीद हो गए हजरत इमाम हुसैन की याद में ताजिए बनते हैं। बृहस्पतिवार को इस्लामी संवत का पहला महीना यानी मोहर्रम शुरू हो गया। अंजुमन इस्लामिया के सदर मो.जलालुद्दीन कहते हैं कि मोहर्रम के महीने में इस्लाम की वका के लिए 10 वीं तारीख को हजरत इमाम हुसैन भूखे प्यासे कर्बला के रेतीले मैदान में शहीद हो गए थे। उन्होंने शहीद होना मुनासिब समझा, लेकिन यजीद की खिलाफत को मंजूर नहीं किया। जामा मस्जिद के पेश इमाम अशफाक अहमद काशमी कहते हैं कि इस महीने में नेक अमल से अल्लाह ताला को राजी किया जा सकता है।
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बाजार में ताजिया बनाने के सामान की बिक्री शुरू
मोहर्रम का महीना शुरू होते ही ताजिया बनाने वाली सामग्री खरीदने के लिए ताजियादार बाजार में पहुंचने लगे हैं। ताजिया बनाने के लिए कागज की झंडी, पताका, रस्सी और बांस की जरूरत पड़ती है। मोहर्रम की दसवीं तारीख को ताजिए कर्बला में दफन किए जाते हैं।