-जनपद के चार गांव आते हैं कुशीनगर की हाटा कोतवाली में
-इन गांवों के लोगों को अपने कार्यों के लिए लगाना पड़ता है दो जिलों का चक्कर
-पासपोर्ट सहित अन्य पुलिस रिपोर्ट में लग जाते हैं महीनों
-युवाओं को समय से नहीं मिल पाते नियुक्ति पत्र, डीएम से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जनपद के चार गांवों के लोगों को राजस्व कार्य के निपटारे के लिए सदर तहसील आना पड़ता है। वहीं मारपीट, फौजदारी के मामले में कुशीनगर नगर के हाटा कोतवाली में फरियाद करनी पड़ती है। इतना ही नहीं भूमि की पैमाइश में भी परेशानी होती है। पीड़ित व राजस्व कर्मियों को पुलिस बल समय से उपलब्ध नहीं हो पाता है, जिससे समस्या का समाधान तय समय पर नहीं हो पाता है। इसका दंश झेल रहे ग्रामीण कई बार जिले के महुआडीह थाने से जोड़ने की मांग उच्चाधिकारियों सहित जनप्रतिनिधियों से कर चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें निराशा ही हाथ लगी है।
देवरिया जिले का क्षेत्रफल बड़ा होने और ग्रामीणों की सुविधाओं के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने 13 मई, 1994 को कुशीनगर को नया जिला बनाया, लेकिन तत्कालीन अफसरों की लापरवाही या जानकारी के अभाव में जिले के चार गांव कुशीनगर की हाटा कोतवाली में दिए गए, जबकि ये गांव देवरिया की सदर तहसील क्षेत्र में हैं। इनके लोगों को अपने कार्यों के लिए दोनों जिलों का चक्कर काटना पड़ता है। विशेष तौर पर युवाओं को पासपोर्ट और नौकरी के लिए आवेदन करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे उद्देश्य से कुशीनगर को जिला बनाया गया, पर जिले के चार गांवों में पूरा होता नहीं दिख रहा। यहां के लोगों की मुश्किलें दोगुनी बढ़ गई हैं।
बैतालपुर विकास खंड की करज ग्रामसभा और इसका बेहनी टोला हाटा कोतवाली में है। दूसरी ग्राम सभा घड़ीपाकड़ भी बैतालपुर ब्लाक क्षेत्र में हैं। इस ग्राम सभा का नारायणपुर टोला महुआडीह थाना, जबकि अमवा टोला हाटा कोतवाली में है। वहीं इसी ब्लॉक का चैनपुर ग्रामसभा है। चैनपुर महुआडीह में है और कन्हौली टोला हाटा कोतवाली क्षेत्र में है। इन गांवों के लोगों को अपने कार्यों के लिए अब भी दो जिलों का चक्कर काटना पड़ रहा है। ब्लॉक, तहसील, दीवानी, कलक्ट्रेट आदि से जुड़े कार्यों के लिए जिले पर आना पड़ता है। वहीं फौजदारी, मारपीट, पासपोर्ट, पुलिस चरित्र प्रमाणपत्र, नौकरी के लिए आवेदन आदि कार्यों के लिए कुशीनगर और हाटा कोतवाली का भी चक्कर लगाना पड़ता है। इससे उन्हें बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इन गांवों की आबादी-
करज गांव की आबादी 2390, घुड़ीपाकड़ की 4000 और चैनपुर की 2500 सौ के करीब है।
डीएम और मंत्री से भी की मांग, नहीं हुआ समाधान
इन गांवों के लोगों का कहना है कि इस समस्या को लेकर डीएम, एसपी यहां तक कि स्थानीय विधायक और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही तक से कई बार लिखित रूप में भी कहा गया, लेकिन, अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका।
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महुआडीह थाना बनने के बाद जगी आस भी हो गई धूमिल
करीब तीन साल पहले रामपुर कारखाना और गौरी बाजार थानाक्षेत्र के करीब 77 ग्रामसभाओं को काटकर महुआडीह थाना बनाया गया। उस समय इन गांवों के लोगों को एक बार फिर लगा था कि अब हाटा से निकालकर जिले के महुआडीह में शामिल कर लिया जाएगा। मगर, प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही कहें या इच्छाशक्ति का अभाव कि इस बार भी लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
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2010 में हाटा कोतवाली से अलग हो चुके हैं जिले के ये गांव
वर्ष 2010 में हाटा कोतवाली में शामिल जिले के देसही देवरिया विकास खंड क्षेत्र के सहवा, बरवा मानसिंह, अमारी झांगा, रामपुर गौनरिया, विक्रम विशुनपुर गांवों को तत्कालीन रामपुर कारखाना और गौरीबाजार थानों में शामिल किया जा चुका है।
हत्या या मारपीट होने में पुलिस को पहुंचने में लग जाता है घंटों का समय
इन गांवों में मारपीट व आपराधिक वारदातों में पुलिस की मदद पीड़ित पक्ष को समय से नहीं मिल पाती है। करज गांव के दूधनाथ की हत्या, इसी गांव के श्रीकांत की चिउरहा नहर पर गला रेतकर हुई हत्या, हाल ही में नारायणपुर गांव के पास नहर में मिले राम गोपाल का शव, टावर से गिरकर मजदूर की मौत के मामलों में पुलिस को पहुंचने और कार्रवाई करने में घंटों मशक्कत करनी पड़ी।
लोगों की प्रतिक्रिया -
तहसील, ब्लॉक, दीवानी आदि से जुड़े कार्यों के लिए जिले पर जाना पड़ता है जबकि थाना से जुड़े कार्यों जैसे पासपोर्ट, पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र, युवाओं को नौकरी में आवेदन आदि के लिए या उसके जांच के लिए कुशीनगर का भी चक्कर लगाना पड़ता है। इससे समय और खर्च लोगों बढ़ जाता है।
- अखिलेश सिंह, पूर्व प्रधान, करज
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दो जिलों के चक्कर में युवाओं की किस्मत दांव पर लगी रहती है। नौकरी के लिए आवेदन हो या नियक्ति पत्र, दो जिलों के डाक से गुजरने में महीनों लग जाते हैं। तब तक समय ही बीत जाता है। मारपीट आदि मामलों में भी जमानत में दोनों जिलों पर जाना पड़ता है।
- लाल बाबू, पूर्व प्रधान घुड़ी पाकड़
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चारों गांवों को महुआडीह थाना में किया जाना जरूरी है। इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी
- अभिषेक, पूर्व प्रधान, विक्रम विशुनपुर