बरहज। राक्षसी पूतना पूर्व जन्म में राजा बलि और विंध्यावली की पुत्री रत्नमाला थी। राजा बलि के दरबार में आए बामन भगवान को देख रत्नमाला के मन में मातृत्व भावना जागृत हो गई थी लेकिन क्रोधवश उसके मन में यह विचार आया था कि ऐसे बालकों को जहर लगाकर दूध पिला देना चाहिए। इन दो मनोभावनाओं के कारण उसे पूतना के रूप में जन्म लेना पड़ा था। ये कहना है कथा वाचक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र का। वह नंदना पश्चिमी वार्ड में संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में शनिवार को भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीला का वर्णन कर रहे थे। कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण गोपियों के घर माखन चोरी किए थे। इसका अभिप्राय चोरी से नहीं, बल्कि मन के चोरी से है। उन्होंने लोगों का मन चुराया था। संवाद