शनिवार की रात सदर रेलवे स्टेशन पर पेट दर्द से परेशान किशोर को नहीं मिला इलाज, भटकते रहे दंपती
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शनिवार रात करीब नौ बज रहे थे। नरकटियागंज निवासी गोविंद पांडेय सपरिवार कृषक एक्सप्रेस से गोरखपुर की ओर जा रहे थे। इसी बीच अचानक बेटे के पेट में दर्द शुरू हो गया। ट्रेन सदर रेलवे स्टेशन पर रुकी तो दंपती लोगों से पूछते हुए रेलवे अस्पताल पहुंचे तो गेट का ताला बंद था। भीतर टहल रहे एक युवक को आवाज दी तो उसने अनसुना कर दिया। इधर, ट्रेन हाॅर्न देने लगी। परेशान दंपती बेटे को लेकर वापस ट्रेन में लौट गए।
देवरिया सदर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को इलाज न मिल पाने की यह इकलौती कहानी नहीं है। आए दिन यात्रियों को ऐसी परेशानियों से गुजरना पड़ता है। रेलवे का अस्पताल सुबह आठ से दोपहर 12 बजे व सायं पांच से छह बजे तक ही खुलता है। यहां एक संविदा चिकित्सक, दो फार्मासिस्ट समेत चार कर्मियों की तैनाती की गई है। अस्पताल की सुविधा रेलवे कर्मचारी व उनके अश्रितों के अलावा रेल यात्रियों को दी जानी है। अप्रैल माह के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक करीब 20 यात्रियों ने रेलवे से ऑनलाइन इलाज की सेवा ली है। जिन लोगों को ऑनलाइन सेवाओं के बारे में जानकारी नहीं होती, वह स्टेशन पर भटकते हैं। प्राइवेट अस्पताल पहुंचने के चक्कर में उनकी ट्रेन छूट जाती है।
इनसेट
रोजाना गुजरती हैं सौ ट्रेनें
देवरिया सदर रेलवे स्टेशन से रोजाना लगभग 50 अप व 50 डाउन यात्री ट्रेनें गुजरती हैं। चार हजार यात्री हर दिन स्टेशन से यात्रा शुरू करते हैं। प्रतिदिन की आय करीब 10 लाख रुपये होती है।
बोले यात्री
रेलवे को चिकित्सा व्यवस्था दुरुस्त रखना चाहिए। अक्सर ट्रेनों में अनियमित खानपान के चलते लोगों की तबीयत खराब हो जाती है। ऐसे में उन्हें इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ती है।
- गिरिजेश त्रिपाठी, यात्री
ट्रेन से यात्रा करने वाले आधे से अधिक लोग ऑनलाइन इलाज की सेवा से अनजान हैं। उनकी तबीयत खराब होती है तो वह रेलवे स्टेशन पर ही इलाज की सुविधा के लिए भटकते हैं। ऐसे में यहां इमरजेंसी सेवा का होना जरूरी है।
- श्यामराज यादव, यात्री
वर्जन
139 पर कॉल करने वालों को ट्रेन में ही इलाज की सुविधा मुहैया कराई जाती है। इस महीने में करीब 20 लोगों ने इस सेवा का लाभ लिया है। अस्पताल खुलने का समय निर्धारित है। इस अवधि में आने वाले लोगों को दवा दी जाती है। - डॉ. अभिषेक