- धान की नर्सरी डालने से पहले खेत की निराई-गुड़ाई जरूरी
- भूमि शोधन के बाद ही धान की रोपाई करें किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। धान की खेती करने वाले किसानों को उसकी तैयारी में अभी से जुट जाना चाहिए। चार दिन पूर्व हुई बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी हो गई है। इस समय खेत की गहरी जुताई करा देने से खरपतवार सूख जाते हैं। साथ ही मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ जाती है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी रतन शंकर ओझा ने बताया कि धान की नर्सरी डालने के लिए जून का प्रथम सप्ताह अनुकूल माना जाता है। इससे पहले किसानों को नर्सरी वाले खेत की अच्छे से निराई-गुड़ाई कर लेनी चाहिए। ताकि बीज उगने के साथ खरपतवार न उपज सकें।
नर्सरी डालने के 25 दिन पर धान की रोपाई की जाती है। ऐसे में किसानों को भूमि शोधन जरूर करा लेना चाहिए। एक हेक्टेयर भूमि शोधन के लिए किसान पांच किलो ट्राइकोडर्मा 60 किलो गोबर की खाद में मिलाकर हफ्ते दिन तक किसी छायादार जगह पर ढक कर रख दें। धान रोपाई से पूर्व इसे खेत में छिड़ककर गहरी जुताई करा दें। इससे खेतों में मौजूद नुकसानदायक कीट समाप्त हो जाएंगे। पौधों को गोबर की खाद मिलने से उनकी बढ़वार अच्छी होगी।
ये प्रारंभिक सावधानियां अपना लेने से फसल सेहतमंद होती है। बाद के दिनों में बीमारी लगने का खतरा कम रहता है। किसानों को स्थानीय वातावरण के अनुकूल प्रजातियों का चुनाव करना चाहिए।
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धान की पांच उन्नतशील प्रजातियां
1- सांभा बीपीटी 5204
2- सांभा सब वन
3- शियाट्स 4- सीओ 51
5 - एमटीयू 7029