जूनियर हाईस्कूल रोपन छपरा में आयोजित छात्र-छात्राओं के आउटरिच कार्यक्रम में बोले सीआईएसएफ के सेना प्रमुख
- सफल होने के लिए अनुशासन निर्भीकता, ईमानदारी जरूरी : एडीजी
- सफलता पाने के लिए जुनून, जिद होना चाहिए : डीएम
संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। लार के रोपन छपरा गांव स्थित हाईस्कूल में एक दिवसीय स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए आउटरिच कार्यक्रम का आयोजन रविवार को किया गया। मुख्य अतिथि सीआईएसएफ के महानिदेशक शीलवर्धन सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि अगर जीवन में आगे बढ़ना है और लक्ष्य प्राप्त करना है, तो कुछ समय के लिए डिजिटल उपवास कीजिए। मोबाइल का गलत प्रयोग सफलता में बाधक है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य एवं उपयुक्त शिक्षा के लिए भद्रसेन सिंह ने इस विद्यालय की स्थापना आज से पचास वर्ष पहले की थी। इसका जीता जागता उदाहरण है कि यहां से पढ़ कर निकले छात्र-छात्राएं देश के बड़े पदों पर आसीन हैं। उन्होंने बच्चों को टिप्स देते हुए कहा कि जीवन में बुरे दौर भी आते हैं। उस दौरान शांत रहना चाहिए। साथ ही अपने विवेक से काम लेना चाहिए। परेशानी क्षणिक होती है। उन्होंने एक एक कर प्रश्न भी पूछे।
एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश ने कहा कि शिक्षा बहुत जरुरी है। अगर शिक्षा होगी तभी देश विकसित होगा। सफल होने के लिए अनुशासन निर्भीकता, ईमानदारी बहुत जरुरी है। जिलाधिकारी अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि बच्चों में सफलता पाने के लिए जुनून, जिद होनी चाहिए। अगर आपके अंदर है तो आप बड़े से बड़े लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। मठ लार के स्वामी अभ्यानंद गिरि ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों में उत्साहवर्धन होता है। साथ ही सही मार्गदर्शन मिलता है। इसके अलावा प्रो. ध्रुवसेन सिंह, ज्वाइंट डिप्टी डायरेक्टर इंटलीजेंस ब्यूरो डाॅ. चंद्रसेन सिंह, पूर्व चेयरमैन श्रीराम सिंह आदि ने भी संबोधित किया। संचालन डाॅ. हिमांशु सेन ने किया।
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कहीं भी दिखता है स्कूल, घर जैसा लगता है
सीआईएसफ के महानिदेशक शीलवर्धन सिंह ने कहा कि प्रो. का बेटा हूं। जब भी कहीं स्कूल दिखता है तो लगता है कि मेरा अपना घर है, क्योंकि यहां से जुड़ी स्मृतियां आंखों के सामने हमेशा तैरती है।
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डीएम के बंगले में रहने की जिद ने बना दिया डीएम
छात्रों को सफलता का गुरु मंत्र देते हुए जिलाधिकारी अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि एक बार मैं एक शहर से गुजर रहा था। तभी रास्ते में डीएम के बंगले को देखा। मन में ख्याल आया कि इतने बड़े बंगले में रहने के लिए मैं भी डीएम बनूंगा। चाहे कितनी भी मेहनत करनी पड़े। इसके बाद तैयारी में जुट गया। परिणाम आया तो 13वीं रैंक हासिल हुई। आप भी लक्ष्य निर्धारित कर पढ़िए।
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महिला कमांडों ने ड्रिल का डेमो दिखा छात्राओं को आत्मरक्षा के सीखाए गुर
- महानिदेशक शीलवर्धन सिंह के साथ पहुंचे पचास से अधिक महिला पुरुष कमांडों ने विद्यालय की छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाया और इसका डेमो प्रस्तुत किया। इसमें सबसे पहले महिला कमांडों ने चाकू, पिस्टल, डंडा से अगर मनचले या फिर दुश्मन प्रहार करते हैं तो कैसे पराजित किया जाए सिखाया। इसके बाद जवानों ने भी अपनी प्रस्तुति दी।