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Deoria News: डीएल के लिए चढ़ावा देंगे तो तुरंत मिलेगी परीक्षा की तिथि और पास होने की गारंटी

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ए आरटीओ कार्यालय डीएल बनवाने पहुंचा युवक।संवाद
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घर बैठे वाहन चलाने का मिल जाएगा प्रमाण, दफ्तर के काउंटर पर नहीं लगानी पड़ेगी लाइन व चक्कर भी नहीं काटना पड़ेगा
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। हैवी हो या लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस की वैध फीस भले 350 से 1000 हजार रुपये हो, लेकिन आप आसानी से लाइसेंस बनवाना चाहते हैं तो इसके लिए चढ़ावा देना होगा। इसके बाद न तो काउंटर पर लाइन लगानी पड़ेगी और न ही दफ्तर के चक्कर काटने होंगे। आपके सारे काम दलाल फटाफट करा देंगे। इतना नहीं, हैवी डीएल के लिए लगने वाला मोटर ड्राइविंग स्कूल का प्रमाण बिना वाहन चलाए दो हजार में आसानी से मिल जाएगा। इन स्कूलों का हाल यह है कि इनके पास भारी वाहन तक नहीं है। पर प्रमाण सभी वाहनों के चलाने का आसानी से दे देंगे।
डीएल के लिए एआरटीओ दफ्तर पहुंचने वाले लोगों का सीधे तौर पर डीएल नहीं बनता है। उन्हें कर्मचारी ही दफ्तर के बाहर खुली दुकानों पर भेजकर सभी कागजी औपचारिकता पूरी करने की सलाह देते हैं। इसके बाद यहीं से सेटिंग का खेल शुरू हो जाता है। उन्हें आवेदक का कंप्यूटर से फोटो खिंचाने की औपचारिकता निभाने और चढ़ावा लेने के बाद इत्मीनान से घर भेज दिया जाता है। कुछ समय बाद लाइसेंस खुद-ब-खुद घर तक पहुंचा जाता है। दरअसल, लाइसेंस बनाने की इस प्रक्रिया में दलालों का नेटवर्क बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। मुंहमांगी कीमत देने की क्षमता है तो बिना भाग-दौड़ के आसानी से लाइसेंस बन सकता है। वरना चक्कर लगाते रह जाएंगे, फिर भी हाथ कुछ नहीं आएगा। अगर चढ़ावा दे दिए तो एक सप्ताह के भीतर परीक्षा तिथि मिल जाएगी और पास होने की गारंटी भी रहती है। ऐसा न करने वालों को एक से दो माह बाद परीक्षा के समय मिलते हैं और अधिक संभावना रहती है कि वह फेल भी हो सकते हैं।
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2500 दीजिए, एक बार में सब ओके
दलालों का सहारा लेने पर लर्निंग के लिए एक बार आवेदन देने के बाद परमानेंट लाइसेंस के लिए न तो दोबारा फोटो खिंचाने आना होता है और न ही किसी टेस्ट के लिए। लर्निंग लाइसेंस मिलते ही दलाल पुराने रिकॉर्ड के आधार पर परमानेंट लाइसेंस की प्रक्रिया को भी पूरी करा देते हैं। डेढ़ माह बाद परमानेंट लाइसेंस मिल जाएगा। सामान्य प्रक्रिया के तहत परमानेंट लाइसेंस जारी होने में चार से पांच माह का समय लग जाएगा।

आतंकी नूरा का भी दलालों ने बनवा दिया था लाइसेंस
एआरटीओ कार्यालय का कार्य इस समय ऑनलाइन होने से पहले से व्यवस्था में जरूर सुधार हुआ है, लेकिन एक बात यह भी सच है कि दलालों का राज विभागीय मिलीभगत से दशकों से चला रहा है। 2007 में आतंकी नूरा का शहर का निवासी होने का प्रमाणपत्र देकर डीएल बनवाया दिया गया था। इस मामले में विभागीय जांच के बाद कार्रवाई हुई और डीएल निरस्त हुआ था।
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कोट
शहर के खरजरवा निवासी संदीप ने बताया कि डीएल बनवाने के लिए गया था। हैवी लाइसेंस के लिए दो हजार रुपये की मांग की गई है। लर्निंग के समय छह सौ रुपये दिया तो बना था। इसके लिए कार्यालय के पास एक कंप्यूटर की दुकानदार ने आवेदन भरा था।
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कोट
आईटीआई निवासी विनय तिवारी ने बताया कि एक बार परीक्षा में फेल हो गया। दूसरी बार जब दफ्तर पर एक व्यक्ति से मिला तो उसने तुरंत परीक्षा करा दिया और पास भी हो गया। इसके लिए 400 रुपये अतिरिक्त देना पड़ा था।

स्कूलों के पास नहीं बड़े वाहन
प्रतिदिन लर्निंग 225 कोटा है और स्थायी का 50 है। हैवी लाइसेंस के लिए मोटर ट्रेनिंग सेंटर से प्रशिक्षण प्रमाण पर देना होता है। सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो कार्यालय के पास मोटर ड्राइविंग सेंटर से प्रमाणपत्र देने वाले करीब चार स्कूल हैं, जो दो हजार से पचीस सौ रुपये तक लेते हैं। इसमें अधिकांश के पास बड़े मालवाहक वाहन नहीं हैं।
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वर्जन
पूरी व्यवस्था ऑनलाइन है। किसी भी व्यक्ति के चक्कर में पड़ने की जरूरत नहीं। पूरी तरह पारदर्शिता के साथ परीक्षा होती है। कोई झांसा दे रहा तो उसके बारे में सूचना मिलने पर कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी।
एके शुक्ला, एआरटीओ
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