अवैध प्रापर्टी डिलिंग का काम करने वाले लोगों ने शहर के इर्द-गिर्द इलाकों में प्लाटिंग का काम कर दिया, लेकिन इसे बढ़े आसानी से बेच भी दिया। प्राॅपर्टी डिलिंग का काम करने वाले लोगों ने ग्रीन बेल्ट, व्यावसायिक स्थान और जलभराव वाले इलाकों को भी बेच दिया है। यहां की हालत यह है कि अब जिन लोगों ने जमीनें ली है, नक्शे नहीं पास हो रहे हैं। इसके कारण लोगों के भवन नहीं बन पा रहे हैं।
क्या है नया कंपाउडिंग नियम
नए कंपाउडिंग नियम के तहत अवैध निर्माण को कंपाउंडिंग के दायरे में लाया जाएगा। इसके हो जाने से शहर के करीब 1021 भवन ध्वस्त होने से बच तो जाएंगे, लेकिन गृहस्वामी से बैनामा के समय लिए जाने वाले विकास शुल्क के चार से सात गुना रुपये जमा कराया जाएगा। इतना नहीं बिना नक्शा के भवन निर्माण कराने पर उन्हें जुर्माने की राशि जमा करने के बाद उसका कंपाउंडिग कर मानचित्र स्वीकृति किया जाएगा।
केस- एक
2019 में हाटा-कसया मार्ग पर भूमि लिया था, ताकि मकान बनवाएंगे। करीब छह माह पहले भवन का नक्शा पास करने के आवेदन किया तो पता चला कि यह ग्रीन बेल्ट है। इसके कारण भवन निर्माण नहीं करा पा रहा हूं। -श्याम सुंदर सिंह, रिटायर्ड एलआईसी कर्मी
मकान बनवाने के लिए पुरवा में जमीन लिया था। उस समय एक प्रापर्टी डीलर से खरीद लिया, लेकिन नक्शा पास कराने के लिए गया तो पता चला कि यह आवासीय क्षेत्र नहीं है। इसके कारण मकान निर्माण नहीं करा पा रहा हूं।
-हरिश्चंद्र, अध्यापक
सदर एसडीएम व नियत प्राधिकारी योगेंद्र गौड़ ने कहा कि अगर शहर में आवास बनवाने के लिए भूमि खरीद रहे हैं तो पहले जानकारी जरूर कर लेना चाहिए। भू उपयोग बदले और बिना मानचित्र के भवन न बनाएं। नए कंपाउंडिंग के तहत जिन लोगों ने मकान बनवा लिया है उनका अब जुर्माना देना पड़ेगा। इस तरह का झंझट अन्य किसी के सामने न आए, इसलिए वह रजिस्ट्री कराते समय ही पूरी जानकारी कर ले।
बिना मानचित्र के बन गईं इन जगहों पर कॉलोनियां
शहर के कई ऐसे मुहल्ले हैं, जहां पर काफी सालों से बिना मानचित्र स्वीकृति किए भवन बन गए हैं। इसमें सबसे अधिक शहीद नगर, अली नगर, अमेठी मंदिर रोड, पुरवा, हाटा रोड, सकरापार, रुद्रपुर मोड़, खरजरवा, भीखमपुर रोड, आईटीआई आदि क्षेत्र हैं। इतना ही नहीं पुरवा इलाके में कुर्ना नाला के आस-पास जलभराव वाले स्थानों पर बेरोकटोक भवन का निर्माण कर दिया गया है, जो नियमों की अनदेखी है।