मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में हर रोज पहुंच रहे 30-35 मरीज
देवरिया। जिले में इन दिनों गलसूआ (मम्पस) के मरीज बढ़ रहे हैं। बच्चों में इस बीमारी के होने की संभावना रहती है, लेकिन इन दिनों युवक भी चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। पीड़ित के खांसने, छींकने से भी यह बीमारी फैल सकती है। इससे ग्रसित होने पर कई लोग झाड़-फूंक के चक्कर में पड़कर ज्यादा बीमार हो जाते हैं। पीड़ित होने पर डॉक्टर को दिखाकर इलाज कराएं।
ठंड के मौसम में बच्चे से लेकर युवा गलसूआ रोग से पीड़ित हो रहे हैं। वायरस जनित इस बीमारी में कान के पास सूजन और लाल चकत्ते हो जाते हैं। इसके साथ ही बुखार और दर्द से लोग पीड़ित हो जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में इस रोग से ग्रसित 30 से 35 मरीज हर रोज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें सबसे अधिक संख्या बच्चों की है।
यह बीमारी अधिकतर बच्चों में होती है, लेकिन 20 से 40 वर्ष के युवा भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इसको लेकर डॉक्टर भी आश्चर्य में हैं। वहीं कुछ लोग झाड़-फूंक के चक्कर में भी लोग पड़ जा रहे हैं, जिससे उनकी परेशानी बढ़ जा रही।
छूत से फैलती है बीमारी
गलसूआ छूत की बीमारी है। परिवार में एक व्यक्ति के होने पर अन्य सदस्यों के चपेट में आने की संभावना बनी रहती है। मरीज के खांसने और छींकने से यह बीमारी फैलती है। एक व्यक्ति के पीड़ित होने पर उसे अन्य सदस्यों से अलग रखकर इससे बचा जा सकता है।
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कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले जल्दी आ रहे चपेट में
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप गुप्ता ने बताया कि गलसूआ (मम्पस) वायरल इंफेक्शन होता है। ठंड में वायरस फैलते हैं। जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है वे इसकी चपेट में आ जाते हैं। दस साल से कम उम्र के बच्चों के चपेट में आने की संभावना रहती है। जिस बच्चे को एमएमआर की वैक्सीन नहीं लगी होती है उनके पीड़ित होने का डर रहता है, लेकिन इन दिनों बच्चे और युवा भी चपेट में आ रहे हैं। इसमें गले के पास सूजन और लाल हो जाता है। ठंड लगकर बुखार, गले में दर्द, खाने में दिक्कत, गले में गिल्टी हो जाती है। छूने पर दर्द होता है। मरीज के खांसने और छींकने से यह फैलता है और आसपास के बच्चे पीड़ित हो सकते हैं। मरीज से दूरी बनाकर रहना चाहिए। परेशानी होने पर इधर-उधर न जाकर सीधे ईएनटी के डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराएं और बचाव करें।
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