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डेढ़ साल बाद भी मेडिकल कॉलेज में आईसीयू नहीं

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डेढ़ साल बाद भी मेडिकल कॉलेज में आईसीयू नहीं
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संसाधन के अभाव में नहीं हो पा रहा गंभीर मरीजों का इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज को शुरू हुए डेढ़ साल हो गए, लेकिन अब तक आईसीयू की स्थापना नहीं हो सकी है। इससे गंभीर मरीजों का इलाज संभव नहीं हो पा रहा है। इस तरह के तकरीबन पचीस से तीस मरीजों को संसाधन के अभाव में रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में तीमारदारों को भटकना पड़ता है। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के स्थापित होने के बाद लोगों को उम्मीद जगी कि उन्हें इलाज के लिए गैर जनपद नहीं जाना पड़ेगा और न ही निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ेगा। सभी सुविधाएं मिलेंगी लेकिन डेढ़ साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अब तक आईसीयू स्थापित नहीं हो सकी है। अस्पताल में शहर से लेकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा बिहार प्रांत के सीमावर्ती गांवों के तकरीबन पंद्रह सौ लोग इलाज कराने आते हैं। चिकित्सक मरीजों को भर्ती कर इलाज करते हैं, लेकिन मरीज की हालत गंभीर होने पर चिकित्सक इलाज करने में सक्षम होने के बावजूद संसाधन न होने के चलते मजबूरी में रेफर कर देते हैं।
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वार्ड में भर्ती औसतन करीब आठ से दस लोगों को हायर सेंटर भेजा जाता है। आर्थिक रूप से सक्षम न होने पर कुछ लोग मरीज को समय से दूसरे अस्पताल में नहीं पहुंचा पाते हैं। वहीं, इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों का केवल प्राथमिक उपचार ही होता है। यहां से हर रोज तकरीबन बीस मरीजों को चिकित्सक तत्काल रेफर कर देते हैं। इसमें कुछ मरीज गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते हैं और रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
मेडिकल कॉलेज में सांस, अस्थमा, सर्जरी, बर्न, दुर्घटना में घायल, न्यूरो, लकवा के अलावा जिन मरीजों की स्थिति गंभीर होती है उन्हें आईसीयू की जरूरत होती, लेकिन इन मरीजों का इलाज संभव नहीं हो पा रहा है।
जिला अस्पताल में थी आईसीयू
जिला अस्पताल में पहले आईसीयू की सुविधा थी। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. यूडी त्रिपाठी गंभीर मरीजों का इलाज करते थे। मेडिकल कॉलेज के भवन निर्माण के समय वर्ष 2019 में आईसीयू को ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन फिर उसे स्थापित नहीं किया जा सका है।
ये होना चाहिए आईसीयू में
देवरिया। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में जीवन रक्षक प्रणाली होनी चाहिए। आईसीयू में वेंटीलेटर, हाईफ्लो ऑक्सीजन, डीफाइब्रिलेटर, इंफ्यूजन पंप, ऑक्सीजन कसेंट्रेटर, मानीटर, ईसीजी, ग्लूको मीटर, बाइपैप, प्रोटेबल एक्स-रे, सेक्सन मशीन, व्हील चेयर, स्ट्रेचर, अत्याधुनिक बेड सहित अन्य उपकरण होने चाहिए। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सक, दक्ष स्टाफ नर्स, एनेथेस्टिस्ट, ईसीजी, वेंटिलेटर एक्स रे टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय, स्वीपर की तैनाती होनी चाहिए।
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कोट
अस्पताल में आईसीयू स्थापित करने के लिए प्रक्रिया की जा रही है। संसाधन व दक्ष स्टाफ की कमी के चलते दिक्कत है। समस्या का समाधान हो जाएगा। आने वाले दिनों में आईसीयू की सुविधा मरीजों को मिलने लगेगी। मरीजों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. एचके मिश्रा, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक
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